भारत में बनेगा संपूर्ण एआई स्टैक, स्टार्टअप्स और शोध को मिलेगी बड़ी डेटा सुविधा

भारत सरकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में नवाचार को गति देने के लिए एक संपूर्ण एआई स्टैक विकसित करने जा रही है। केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने बताया कि इस योजना के तहत शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स को सुरक्षित डेटा सेट उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे नए एआई समाधानों के विकास को बढ़ावा मिलेगा। यह घोषणा उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित एआई प्रभाव शिखर सम्मेलन के दौरान की।

क्या है संपूर्ण एआई स्टैक?

संपूर्ण एआई स्टैक का अर्थ है एआई से जुड़ी सभी आवश्यक तकनीकों और संसाधनों का एक समग्र तंत्र। इसमें हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, डेटा और सेवाएं शामिल होती हैं, जिनकी मदद से एआई सिस्टम को डिजाइन, प्रशिक्षित और संचालित किया जाता है। इसके प्रमुख घटक इस प्रकार हैं:

  • हार्डवेयर: जीपीयू और सर्वर जैसे उपकरण
  • सॉफ्टवेयर: एआई विकास के लिए उपकरण और प्लेटफॉर्म
  • डेटा सेट: वे डेटा जिनसे एआई मॉडल को प्रशिक्षित किया जाता है
  • प्रशिक्षण और तैनाती प्रणाली: एआई मॉडल को तैयार करने और उपयोग में लाने की प्रक्रिया
  • प्रबंधन सेवाएं: एआई सिस्टम की निगरानी और संचालन के लिए सेवाएं

इस पूरे ढांचे का मुख्य उद्देश्य एआई अनुप्रयोगों के निर्माण, प्रशिक्षण, तैनाती और प्रबंधन की प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाना है।

शोध और स्टार्टअप्स के लिए सुरक्षित डेटा

केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने बताया कि सरकार ऐसे डेटा सेट तैयार कर रही है जिनमें व्यक्तिगत पहचान की जानकारी को सुरक्षित रखा जाएगा। ये गुप्त डेटा सेट शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स के लिए उपलब्ध होंगे, ताकि वे नए एआई समाधान विकसित कर सकें और नवाचार को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में संपूर्ण एआई स्टैक बनाने पर विचार किया जा रहा है, जहां गुप्त डेटा सेट शोध और नवाचार के लिए उपलब्ध होंगे। इससे स्टार्टअप्स को सरकार और नागरिकों द्वारा साझा किए गए डेटा का उपयोग कर नई तकनीक विकसित करने का अवसर मिलेगा।

एआई प्रणालियों के लिए ऑडिट और जवाबदेही

सरकार एआई सिस्टम को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए ऑडिट ट्रेल तंत्र विकसित करने पर विचार कर रही है। केंद्रीय मंत्री ने सुझाव दिया कि भविष्य में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) जैसी संस्थाएं एआई मॉडल का ऑडिट कर सकती हैं और उनकी रिपोर्ट जारी कर सकती हैं। इससे यह सुनिश्चित होगा कि एआई सिस्टम पारदर्शी तरीके से काम कर रहे हैं और उनका उपयोग जिम्मेदारी और निर्धारित नियमों के अनुसार हो रहा है।

एआई विकास में सार्वजनिक-निजी भागीदारी और लोगों की भूमिका

भारत का एआई मिशन सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर आधारित है। जयंत चौधरी ने कहा कि पीपीपी में सबसे महत्वपूर्ण ‘पी’ यानी लोग हैं, जो एआई विकास के केंद्र में नागरिकों की भूमिका को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि एआई से जुड़ी नीतियां बनाते समय डेटा गोपनीयता, विश्वास, डेटा सुरक्षा और रोजगार पर संभावित प्रभाव जैसी महत्वपूर्ण चिंताओं को ध्यान में रखा गया है। उन्होंने कहा कि एआई के लिए आवश्यक सुरक्षा उपाय होने चाहिए, लेकिन नवाचार की संभावनाओं को सीमित नहीं करना चाहिए।

इंडियाएआई मिशन के तहत बढ़ती कंप्यूटिंग क्षमता

इंडियाएआई मिशन के तहत भारत ने शुरुआत में 18,000 जीपीयू का लक्ष्य रखा था, लेकिन यह संख्या पहले ही बढ़कर 38,000 से अधिक हो चुकी है। सरकार को उम्मीद है कि इस साल के अंत तक देश की कंप्यूटिंग क्षमता एक लाख जीपीयू से अधिक हो जाएगी। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस कंप्यूटिंग बुनियादी ढांचे को शैक्षणिक संस्थानों में स्थापित किया जाएगा, ताकि उच्च स्तरीय शोध संभव हो सके और शिक्षा और उद्योग के बीच सहयोग को बढ़ावा मिल सके।

भारत के एआई भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम

सरकार की यह पहल भारत को एआई के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। संपूर्ण एआई स्टैक, उन्नत कंप्यूटिंग संसाधनों और डेटा तक बेहतर पहुंच से देश में नए स्टार्टअप्स, शोध और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे न केवल भारत का प्रौद्योगिकी क्षेत्र मजबूत होगा, बल्कि देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी और भारत वैश्विक एआई पारिस्थितिकी तंत्र में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकेगा।