आईआईटी एमटेक पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव: अब विशेषज्ञता, उद्योग और अनुसंधान पर होगा जोर

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) में एमटेक कार्यक्रमों के पाठ्यक्रम में जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। आईआईटी काउंसिल ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया है, जिसके तहत एमटेक पाठ्यक्रम को उद्योग की वर्तमान आवश्यकताओं और अनुसंधान क्षेत्र की मांगों के अनुरूप ढाला जाएगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य छात्रों को अधिक विशेषज्ञता (स्पेशलाइजेशन) प्रदान करना और उन्हें रोजगार के बेहतर अवसरों से जोड़ना है।

एमटेक पाठ्यक्रम में क्यों जरूरी है बदलाव?

आईआईटी काउंसिल की अगस्त 2025 की बैठक में विभिन्न मुद्दों पर गहन चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया। पिछले कुछ वर्षों में यह देखा गया है कि बीटेक के बाद अधिकांश छात्र एमटेक में दाखिला लेने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इसके पीछे दो मुख्य कारण सामने आए: पहला, एमटेक करने के बाद रोजगार के सीमित अवसर, और दूसरा, पाठ्यक्रम में उद्योग-आधारित इंटर्नशिप का अभाव। इसके अलावा, छात्रों को मौजूदा एमटेक प्रोग्राम में विशेषज्ञता के पर्याप्त विकल्प नहीं मिल पा रहे थे, जिससे वे इस कोर्स को चुनने से कतरा रहे थे।

खाली हो रही हैं एमटेक की सीटें

आंकड़े बताते हैं कि आईआईटी में एमटेक की सीटें लगातार खाली रह रही हैं। वर्ष 2020-21 में लगभग 3,229 सीटें रिक्त रह गई थीं, जबकि 2021-22 में यह संख्या 3,083 थी। इसका सीधा असर पीएचडी कार्यक्रमों पर भी पड़ा है। वर्ष 2020 में पीएचडी में 1,779 सीटें खाली रहीं, जो 2021 में बढ़कर 1,852 हो गईं। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि उन्नत और अनुसंधान-आधारित कार्यक्रमों में छात्रों की रुचि कम हो रही है, जिसे देखते हुए पाठ्यक्रम में बदलाव अनिवार्य हो गया है।

नए एमटेक प्रोग्राम के प्रमुख बिंदु

आईआईटी काउंसिल की सिफारिशों के अनुसार, एमटेक पाठ्यक्रम को पूरी तरह से नया रूप दिया जाएगा। इसके तहत तीन नए प्रकार के एमटेक प्रोग्राम शुरू करने की योजना है:

  • डुअल एमटेक (इंडस्ट्री और रिसर्च): इसमें छात्रों को दो ट्रैक का विकल्प मिलेगा। एक ट्रैक उद्योग की जरूरतों पर केंद्रित होगा, जबकि दूसरा राष्ट्रीय अनुसंधान लक्ष्यों और निजी क्षेत्र की मांगों से जुड़ा होगा।
  • मल्टीडिसिप्लिनरी एमटेक: यह कार्यक्रम कई विषयों को एक साथ जोड़कर तैयार किया जाएगा, जिससे छात्र विभिन्न क्षेत्रों की समझ विकसित कर सकें।
  • ब्लेंडेड मोड एमटेक: इसमें ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से पढ़ाई का विकल्प होगा, जिससे अधिक से अधिक छात्र लाभान्वित हो सकें।

इनके अलावा, प्रोडक्ट-आधारित एमटेक प्रोग्राम शुरू करने का भी प्रस्ताव है। इसमें छात्रों को शोध पत्र प्रकाशित करने की अनिवार्यता नहीं होगी, बल्कि वे व्यावहारिक उत्पाद विकास पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।

उद्योग विशेषज्ञों की भूमिका और इंटर्नशिप

पाठ्यक्रम में बदलाव के लिए सभी आईआईटी मिलकर काम करेंगे और एक वर्ष के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। इस प्रक्रिया में उद्योग विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाएगा, ताकि वे अपनी आवश्यकताओं के अनुसार नए विषयों को शामिल कर सकें। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह होगा कि एमटेक पाठ्यक्रम में अब उद्योग इंटर्नशिप को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा। इससे छात्रों को व्यावहारिक अनुभव मिलेगा और उनकी रोजगार क्षमता में वृद्धि होगी।

इस पहल से उम्मीद है कि आईआईटी में एमटेक कार्यक्रमों की लोकप्रियता बढ़ेगी और छात्र उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित होंगे। साथ ही, यह बदलाव उद्योग और शिक्षा जगत के बीच की खाई को पाटने में भी मददगार साबित होगा।