आईआईटी मद्रास का अमेरिका में पहला अनुसंधान केंद्र: डीप-टेक स्टार्टअप्स को मिलेगी वैश्विक उड़ान

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास ने वैश्विक अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। संस्थान के ‘आईआईटीएम ग्लोबल रिसर्च फाउंडेशन’ ने अमेरिका में अपना पहला केंद्र स्थापित करने की औपचारिक घोषणा की है। इस पहल के साथ, भारत के डीप-टेक स्टार्टअप्स को सीधे वैश्विक बाजार, निवेश और नवाचार के पारिस्थितिकी तंत्र से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है।

यह नया केंद्र कैलिफोर्निया के मेनलो पार्क में स्थित है, जो सिलिकॉन वैली के बेहद करीब है। हालांकि इसकी शुरुआत 24 अप्रैल को हो चुकी थी, लेकिन आधिकारिक घोषणा मैरीलैंड के नेशनल हार्बर में आयोजित ‘सिलेक्ट यूएसए इन्वेस्टमेंट समिट’ के दौरान की गई। यह सम्मेलन वैश्विक निवेश और तकनीकी साझेदारी के लिए जाना जाता है।

7.5 मिलियन डॉलर का निवेश और रणनीतिक दृष्टिकोण

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए कुल 7.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश किया जाएगा। आईआईटीएम ग्लोबल रिसर्च फाउंडेशन के सीईओ तिरुमलाई माधवनारायण के अनुसार, इसमें से 4.5 मिलियन डॉलर का ‘ग्रीनफील्ड’ निवेश संस्थान की ओर से किया जा रहा है। यह केंद्र ‘सीए स्टार्टअप्स’ के सहयोग से संचालित होगा और अमेरिका में आईआईटी मद्रास के संचालन का मुख्य आधार बनेगा।

इस पहल का प्रमुख उद्देश्य भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप्स को प्रयोगशाला से सीधे वैश्विक बाजार तक पहुंचाने के लिए एक मजबूत मंच तैयार करना है। साथ ही, दुनिया भर के बेहतरीन नवाचारों को भारत की ओर आकर्षित करने की भी योजना है, ताकि दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग को नई ऊंचाई दी जा सके।

सिलिकॉन वैली में भारतीय स्टार्टअप्स के लिए लॉन्चपैड

यह नया केंद्र सिलिकॉन वैली के नजदीक स्थित है, जो दुनिया का सबसे बड़ा तकनीकी केंद्र माना जाता है। इस रणनीतिक स्थान का लाभ उठाते हुए इसे भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए एक ‘लॉन्चपैड’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां से स्टार्टअप्स को निम्नलिखित सुविधाएं प्राप्त होंगी:

  • वैश्विक पूंजी और निवेश तक सीधी पहुंच
  • अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रवेश के अवसर
  • विशेषज्ञों से उच्च स्तरीय मेंटरशिप
  • दुनिया की प्रमुख कंपनियों के साथ साझेदारी की संभावनाएं

यह सेंटर न केवल डीप-टेक अनुसंधान और उसके व्यावसायीकरण पर ध्यान केंद्रित करेगा, बल्कि स्टार्टअप इन्क्यूबेशन के लिए एक मुख्य केंद्र के रूप में भी काम करेगा। इसका लक्ष्य उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच साझेदारी को मजबूत करना है, जिससे उच्च क्षमता वाले नवाचारों को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके।

अमेरिका के पूर्वी तट पर भी बनेगा दूसरा केंद्र

कैलिफोर्निया में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के बाद आईआईटी मद्रास यहीं रुकने वाला नहीं है। संस्थान ने अमेरिका के प्रमुख नवाचार गलियारों में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूर्वी तट पर एक दूसरा केंद्र स्थापित करने की भी घोषणा की है। यह आगामी केंद्र प्रमुख नीतिगत, वित्तीय और शैक्षणिक पारिस्थितिकी तंत्रों से जुड़कर अमेरिका में संस्थान की मौजूदगी को और अधिक व्यापक और प्रभावी बनाएगा।

भारतीय राजदूत से मुलाकात और भविष्य की संभावनाएं

इस बड़े कदम के दौरान, आईआईटीएम ग्लोबल के प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा से विशेष मुलाकात की। इस प्रतिनिधिमंडल में आईआईटी मद्रास द्वारा इन्क्यूबेट किए गए पांच प्रमुख डीप-टेक स्टार्टअप्स के संस्थापक शामिल थे:

  • अत्री एआई (Atri AI)
  • जीरोवॉट (Zerowatt)
  • सटोरी एक्सआर (Satori XR)
  • ग्रीनएनवायरनमेंट (Greenvironment)
  • ई-प्लेन कंपनी (ePlaneCompany)

इस मुलाकात के बाद राजदूत क्वात्रा ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी इन युवा तकनीकी नेताओं के साथ बहुत ही ज्ञानवर्धक बातचीत हुई। उन्होंने इन स्टार्टअप्स के काम की सराहना करते हुए कहा कि वे उनसे काफी प्रेरित हुए हैं। इस दौरान भारत और अमेरिका के तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र में उपलब्ध नए अवसरों पर चर्चा की गई और दोनों देशों के बीच नवाचार सहयोग के उज्ज्वल भविष्य पर विश्वास जताया गया।