हिमाचल बोर्ड 10वीं परिणाम 2026: पिछले वर्ष से बेहतर प्रदर्शन, परंतु छह वर्षों का रिकॉर्ड कायम

हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड (HPBOSE) ने कक्षा 10वीं के वार्षिक परिणाम 2026 की घोषणा कर दी है। इस वर्ष का समग्र प्रदर्शन पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय रूप से बेहतर रहा है। वर्ष 2025 में जहां उत्तीर्ण प्रतिशत 79.08 फीसदी दर्ज किया गया था, वहीं 2026 में यह बढ़कर 83.87 फीसदी तक पहुंच गया है। हालांकि, यह आंकड़ा अब तक के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से काफी दूर है।

बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 में यह उत्तीर्ण प्रतिशत 99.70 फीसदी था, जो पिछले छह वर्षों में सबसे अधिक है। उस वर्ष कोरोना महामारी के कारण मूल्यांकन की प्रक्रिया में किए गए विशेष बदलावों के चलते यह असाधारण परिणाम संभव हो सका था। इस बार के परिणाम में सुधार के बावजूद, 2021 का यह रिकॉर्ड कायम है और इसे तोड़ा नहीं जा सका है।

पिछले वर्षों में उत्तीर्ण प्रतिशत का रुझान

हिमाचल बोर्ड 10वीं परीक्षा के पिछले छह वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदर्शन में उतार-चढ़ाव स्पष्ट दिखाई देता है। यह रुझान दर्शाता है कि इस बार का परिणाम भले ही पिछले वर्ष से बेहतर हो, लेकिन यह 2022 और 2023 के स्तर को भी छू नहीं पाया है।

  • 2026 — 83.87%
  • 2025 — 79.08%
  • 2024 — 74.60%
  • 2023 — 89.70%
  • 2022 — 87.50%
  • 2021 — 99.70%

परीक्षा में शामिल हुए विद्यार्थी और परिणाम

इस वर्ष हिमाचल बोर्ड की 10वीं की परीक्षा में कुल 93,694 विद्यार्थी शामिल हुए थे। इनमें से 78,150 छात्र-छात्राओं ने सफलता प्राप्त की है। वहीं, 8,433 विद्यार्थियों को कंपार्टमेंट परीक्षा के लिए अवसर दिया गया है, जबकि 6,559 छात्र इस परीक्षा में असफल रहे हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने परीक्षा दी और अधिकांश ने सफलता पाई।

छात्राओं का उत्कृष्ट प्रदर्शन

इस वर्ष भी छात्राओं ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। प्रदेश भर में टॉप करने वाली छात्रा अनमोल ने 699 अंक प्राप्त किए हैं, जो कांगड़ा जिले के एवीएम सीनियर सेकेंडरी स्कूल पहरा की छात्रा हैं। मेरिट सूची में भी अधिकांश स्थानों पर छात्राओं का वर्चस्व देखने को मिला है, जो शिक्षा के क्षेत्र में उनकी बढ़ती भागीदारी और मेहनत को दर्शाता है।

परीक्षा आयोजन और मूल्यांकन प्रक्रिया

हिमाचल बोर्ड की 10वीं की परीक्षाएं 3 मार्च से 29 मार्च 2026 तक संचालित की गई थीं। परीक्षा के बाद उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए प्रदेशभर में 41 केंद्र स्थापित किए गए थे। इस कार्य में लगभग 5,000 शिक्षकों को तैनात किया गया था, जिन्होंने समय पर परिणाम तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बोर्ड द्वारा पारदर्शी और कुशल मूल्यांकन प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए यह व्यापक व्यवस्था की गई थी।