हाई स्कूलों में ब्रॉडबैंड इंटरनेट: अगले तीन साल में सभी स्कूल होंगे जुड़े

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बड़ी घोषणा करते हुए कहा है कि देशभर के सभी हाई स्कूलों में अगले दो से तीन साल के भीतर ब्रॉडबैंड इंटरनेट कनेक्शन उपलब्ध करा दिया जाएगा। यह जानकारी उन्होंने संसद में एक प्रश्न के उत्तर में दी। मंत्री ने बताया कि सरकार डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रही है और इस दिशा में यह एक अहम कदम है।

प्रधान के अनुसार, वर्तमान में देश के लगभग 60 प्रतिशत हाई स्कूल पहले से ही ब्रॉडबैंड इंटरनेट से जुड़े हुए हैं। शेष स्कूलों को जोड़ने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि अगले दो-तीन वर्षों में कोई भी हाई स्कूल इंटरनेट कनेक्टिविटी से वंचित न रहे। इससे छात्रों को डिजिटल संसाधनों तक आसान पहुंच मिलेगी और उनकी शिक्षा का स्तर बेहतर होगा।

शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का समावेश

मंत्री ने शिक्षा के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को शामिल करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत AI तकनीक में अग्रणी देशों में से एक है, और अब इसका लाभ स्कूली शिक्षा में भी दिया जाएगा। प्रधान ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत नए पाठ्यक्रम में कक्षा तीन से ही छात्रों को AI का प्रारंभिक ज्ञान दिया जाएगा। यह कदम छात्रों को आधुनिक तकनीक के लिए तैयार करने में मददगार साबित होगा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि AI को लगभग सभी मातृभाषाओं में शामिल किया जा रहा है, ताकि हर क्षेत्र के छात्र इस तकनीक को आसानी से समझ सकें। शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची में आती है, इसलिए अधिकांश स्कूल राज्य सरकारों के अधीन हैं। केंद्र और राज्य मिलकर शिक्षकों को AI का प्रशिक्षण देने और उनकी क्षमता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

स्कूली पाठ्यक्रम में आधुनिक तकनीक का एकीकरण

सरकार स्कूली पाठ्यक्रम में AI और अन्य आधुनिक तकनीकों को शामिल करने के लिए कई पहल कर रही है। NEP 2020 में साफ तौर पर कहा गया है कि छात्रों में समकालीन कौशल विकसित करने के लिए AI, डिज़ाइन थिंकिंग और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग जैसे विषयों को पाठ्यक्रम में जोड़ा जाना चाहिए। इसके तहत शिक्षण और सीखने की प्रक्रिया में तकनीक को एकीकृत करके शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

मंत्री ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा मंत्रालय ने AI और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। उदाहरण के लिए, कक्षा 11वीं की कंप्यूटर विज्ञान और सूचना विज्ञान की NCERT पाठ्यपुस्तकों में पहले से ही AI, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और अन्य उभरती तकनीकों का उल्लेख है। इसके अलावा, NCERT ने कक्षा 6 की व्यावसायिक शिक्षा की पाठ्यपुस्तक में एनिमेशन और गेम्स पर एक प्रोजेक्ट भी शामिल किया है, जिससे छात्रों को व्यावहारिक अनुभव मिल सके।

कक्षा 3 से AI शिक्षा और डिजिटल कौशल पर जोर

सरकार ने कक्षा 3 से ही AI शिक्षा लागू करने की योजना बनाई है। इसका उद्देश्य छात्रों में डिजिटल साक्षरता और समस्या-समाधान कौशल विकसित करना है। विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने इसके लिए कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और AI पर एक विशेष पाठ्यक्रम तैयार किया है। यह पाठ्यक्रम सत्र 2026-27 से कक्षा 3 से 8 तक लागू किया जाएगा।

इसके अतिरिक्त, सीबीएसई ने कक्षा 6 से 8 के लिए AI पर एक कौशल मॉड्यूल और कक्षा 9 से 12 के लिए एक वैकल्पिक कौशल-आधारित विषय तैयार किया है। राज्य और केंद्र शासित प्रदेश भी अपने शैक्षणिक ढांचे में AI और अन्य उभरती तकनीकों को शामिल करने पर काम कर रहे हैं।

डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए दीक्षा, स्वयं और पीएम ईविद्या जैसे राष्ट्रीय प्लेटफार्मों का उपयोग किया जा रहा है। इन प्लेटफार्मों के माध्यम से शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल सामग्री का विकास और AI जागरूकता मॉड्यूल उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मंत्री ने कहा कि इन सभी प्रयासों का उद्देश्य छात्रों में नवाचार और समस्या-समाधान की क्षमता को बढ़ावा देना है, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हो सकें।

  • देश के 60% हाई स्कूल पहले से ब्रॉडबैंड से जुड़े हैं, शेष को जोड़ने की योजना तेजी से चल रही है।
  • कक्षा 3 से AI शिक्षा शुरू करने का लक्ष्य, ताकि छात्रों को तकनीक की बुनियादी समझ विकसित हो।
  • NCERT की पाठ्यपुस्तकों में AI, IoT और अन्य आधुनिक तकनीकों को पहले ही शामिल किया जा चुका है।
  • सीबीएसई ने कक्षा 6-8 और 9-12 के लिए AI आधारित कौशल मॉड्यूल तैयार किए हैं।
  • दीक्षा, स्वयं और पीएम ईविद्या जैसे प्लेटफॉर्म डिजिटल शिक्षा को मजबूत कर रहे हैं।