हृदय स्वास्थ्य: क्या मंत्र जाप से रक्तचाप नियंत्रित हो सकता है? नए अध्ययन में दिलचस्प तथ्य

पुरानी फिल्मों में अक्सर दिखाया जाता है कि मंत्रोच्चारण से बीमारियां दूर हो जाती हैं, लेकिन क्या वास्तविकता में भी ऐसा संभव है? विशेष रूप से महामृत्युंजय मंत्र के जाप से हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम कम हो सकता है? यह प्रश्न इसलिए प्रासंगिक है क्योंकि हाल ही में एक शोध में दावा किया गया है कि महामृत्युंजय या शांति मंत्र के नियमित उच्चारण से रक्तचाप और हृदय गति में उल्लेखनीय सुधार देखा जा सकता है।

लंबे समय से लोग आध्यात्मिक अनुभवों के आधार पर मानते आए हैं कि मंत्रजाप मन को शांति प्रदान करता है। अब इस धारणा को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी जांचा जा रहा है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि यदि स्वस्थ व्यक्ति मात्र पांच मिनट तक महामृत्युंजय मंत्र का उच्चारण करें और उसके बाद पांच मिनट शांत बैठकर विश्राम करें, तो उनके शरीर में हृदय स्वास्थ्य में सुधार के स्पष्ट संकेत दिखाई देते हैं। यह उपाय रक्तचाप, हृदय गति और हृदय पर पड़ने वाले तनाव को कम करने में सहायक हो सकता है। आइए इस अध्ययन के बारे में विस्तार से समझते हैं।

मंत्रजाप से रक्तचाप और हृदय गति में कमी

यह अध्ययन दिल्ली स्थित एक प्रतिष्ठित योग संस्थान के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया है। इसमें पाया गया कि यदि व्यक्ति प्रतिदिन केवल पांच मिनट महामृत्युंजय या शांति मंत्र का जाप करे और उसके बाद पांच मिनट शांत बैठकर आराम करे, तो उसके रक्तचाप और हृदय गति में कमी आ सकती है। इस शोध के परिणाम एक अंतरराष्ट्रीय मेडिकल रिसर्च जर्नल में प्रकाशित किए गए हैं।

शोधकर्ताओं ने देखा कि जब प्रतिभागी ऊंची आवाज में मंत्र का जाप कर रहे थे, तब कुछ समय के लिए हृदय संबंधी गतिविधियां बढ़ गईं। लेकिन जैसे ही जाप के बाद पांच मिनट का विश्राम किया गया, शरीर में स्पष्ट रूप से आराम के संकेत दिखाई देने लगे। यह बदलाव बताता है कि मंत्रोच्चारण के बाद का शांत समय शरीर को गहराई से आराम देने में मदद करता है।

अध्ययन में क्या निष्कर्ष सामने आए?

शोध में शांति मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र दोनों का जाप करने वालों में विश्राम के बाद कई सकारात्मक बदलाव दर्ज किए गए। मुख्य रूप से निम्नलिखित परिवर्तन देखने को मिले:

  • हृदय गति में कमी: प्रतिभागियों की दिल की धड़कन की गति सामान्य से कम हो गई।
  • रक्तचाप में गिरावट: सिस्टोलिक और डायस्टोलिक दोनों प्रकार के रक्तचाप में कमी दर्ज की गई।
  • दिल पर कम दबाव: रेट प्रेशर प्रोडक्ट में कमी आई, जो यह बताता है कि हृदय को काम करने के लिए कम ऑक्सीजन की आवश्यकता है। इसका कम होना हृदय पर कम तनाव का संकेत है।
  • डबल प्रोडक्ट में सुधार: यह हृदय के कार्यभार को मापने का एक महत्वपूर्ण संकेतक है। इसमें कमी का अर्थ है कि मंत्रजाप के बाद हृदय को पहले की तुलना में कम मेहनत करनी पड़ी।

शोध की प्रक्रिया और प्रतिभागी

यह अध्ययन योग संस्थान के विभिन्न विशेषज्ञों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इसमें 30 स्वस्थ युवा विद्यार्थियों को शामिल किया गया। प्रतिभागियों से पांच मिनट तक शांति मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का जाप कराया गया। जाप शुरू होने से पहले, जाप के दौरान और जाप समाप्त होने के बाद पांच मिनट के विश्राम के दौरान उनके शरीर में होने वाले विभिन्न शारीरिक बदलावों को रिकॉर्ड किया गया।

श्वसन दर पर भी प्रभाव

शोध में यह भी सामने आया कि महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने वाले लोगों की श्वसन दर विश्राम के बाद काफी धीमी हो गई। इसका मतलब है कि उनका शरीर अधिक शांत और विश्राम की अवस्था में पहुंच गया। हालांकि, इस दौरान शरीर में ऑक्सीजन के स्तर, नाड़ी दबाव और पूरे समय के औसत रक्तचाप में कोई विशेष परिवर्तन नहीं देखा गया।

शोधकर्ताओं का मानना है कि मंत्र जाप करने से शरीर का पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम अधिक सक्रिय हो जाता है। यह वह प्रणाली है जो तनाव को कम करने, शरीर को आराम देने, पाचन में सुधार करने और हृदय गति को सामान्य बनाए रखने में सहायता करती है। इसे अक्सर ‘आराम और पुनर्प्राप्ति’ वाला सिस्टम कहा जाता है। जब यह प्रणाली सक्रिय होती है, तो शरीर तनाव से बाहर निकलकर शांत अवस्था में आ जाता है। यही कारण हो सकता है कि मंत्र जाप के बाद हृदय और रक्तचाप से जुड़े कई मापदंड बेहतर हुए।

विशेषज्ञों की राय

शोध में शामिल एक विशेषज्ञ के अनुसार, यह अध्ययन साबित करता है कि कुछ मिनटों का मंत्र जाप और उसके बाद थोड़ा आराम शरीर में ऐसे बदलाव ला सकता है जो बेहतर स्वास्थ्य की ओर इशारा करते हैं। इन परिणामों के आधार पर योग और स्वास्थ्य कार्यक्रमों में मंत्र जाप को शामिल किया जा सकता है। हालांकि, इसके दीर्घकालिक प्रभावों को समझने के लिए और बड़े पैमाने पर अध्ययन की आवश्यकता है।

एक अन्य शोधकर्ता ने कहा कि हृदय गति, रक्तचाप और डबल प्रोडक्ट में आई कमी यह दर्शाती है कि मंत्र जाप के बाद शरीर तुरंत विश्राम की स्थिति में आ जाता है और हृदय पर काम का बोझ भी कम हो जाता है।

शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अध्ययन केवल स्वस्थ और युवा योग विद्यार्थियों पर किया गया है और इसमें केवल मंत्र जाप के तत्काल प्रभावों का आकलन किया गया। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि इससे किसी विशेष बीमारी का इलाज संभव है। फिर भी, यह एक सकारात्मक संकेत है कि प्राचीन आध्यात्मिक पद्धतियों का आधुनिक विज्ञान से मिलान हो रहा है।