सरकारी और विश्वविद्यालय वेबसाइटें बनीं हैकर्स का नया हथियार, फर्जी OnlyFans पेजों से 80 देशों में धोखाधड़ी

साइबर अपराधी लगातार लोगों को ठगने के नए-नए तरीके खोज रहे हैं। हाल ही में सामने आई एक साइबर सुरक्षा रिपोर्ट के अनुसार, हैकर्स अब सरकारी और विश्वविद्यालयों की वेबसाइटों को निशाना बना रहे हैं। वे इन वेबसाइटों को हैक करके उन पर फर्जी OnlyFans पेज बना रहे हैं, जो गूगल सर्च में दिखाई देते हैं और उपयोगकर्ताओं को खतरनाक वेबसाइटों तक ले जाते हैं। आइए समझते हैं कि यह पूरा स्कैम कैसे काम करता है और रिपोर्ट में इस बारे में क्या खुलासा हुआ है।

कैसे काम करता है यह साइबर स्कैम?

साइबर सुरक्षा कंपनी की रिपोर्ट के अनुसार, हैकर्स ने दुनिया भर के करीब 80 देशों में दो हजार से अधिक डोमेन पर OnlyFans से जुड़े कॉपीराइट उल्लंघन (DMCA) नोटिस ट्रिगर किए हैं। जांच में यह भी पता चला कि पिछले 15 वर्षों में सरकारी (.gov) और शैक्षणिक (.edu) वेबसाइटों से जुड़े 3.84 लाख से अधिक DMCA हटाने के अनुरोध भेजे गए। इनमें से गूगल ने लगभग 1.30 लाख यूआरएल को अपने सर्च रिजल्ट से हटा दिया है।

रिपोर्ट बताती है कि साइबर अपराधी पहले किसी सरकारी या विश्वविद्यालय वेबसाइट की सुरक्षा में कमजोरी ढूंढते हैं। इसके बाद वे उस वेबसाइट पर OnlyFans क्रिएटर्स के नाम से फर्जी वेबपेज बना देते हैं। इन पेजों के शीर्षक अक्सर ‘Leaked OnlyFans’ या ‘Biggest Leak Yet’ जैसे रखे जाते हैं ताकि वे गूगल सर्च में अधिक से अधिक लोगों को आकर्षित कर सकें।

जब कोई उपयोगकर्ता इन लिंक पर क्लिक करता है, तो उसे असली कंटेंट देखने को नहीं मिलता। इसके बजाय, उसे डेटिंग वेबसाइटों, ऑनलाइन धोखाधड़ी वाले पेजों या मैलवेयर डाउनलोड कराने वाली संदिग्ध साइटों पर भेज दिया जाता है।

मामला कैसे सामने आया?

साइबर सुरक्षा फर्म के शोध निदेशक के अनुसार, OnlyFans क्रिएटर्स अपने कंटेंट की सुरक्षा के लिए कॉपीराइट नोटिस भेजते हैं। इन्हीं नोटिसों की जांच के दौरान पता चला कि बड़ी संख्या में सरकारी और विश्वविद्यालय वेबसाइटों का दुरुपयोग किया जा रहा है। यह एक वैश्विक समस्या है, जो किसी एक देश तक सीमित नहीं है।

किन देशों पर पड़ा है असर?

रिपोर्ट के अनुसार, इस स्कैम का प्रभाव भारत, बांग्लादेश, कोलंबिया, नाइजीरिया, पेरू और अमेरिका समेत कई देशों में देखा गया है। इन देशों की सरकारी और शैक्षणिक वेबसाइटें इस धोखाधड़ी का हिस्सा बनी हैं। यह साफ करता है कि साइबर अपराधियों का नेटवर्क काफी व्यापक है और यह एक अंतरराष्ट्रीय चुनौती है।

यह मामला क्यों है गंभीर?

सरकारी (.gov) और विश्वविद्यालय (.edu) वेबसाइटों पर आमतौर पर लोग भरोसा करते हैं। गूगल सर्च में भी इन्हें अधिक विश्वसनीय माना जाता है। जब ऐसी भरोसेमंद वेबसाइटों का दुरुपयोग होने लगता है, तो उपयोगकर्ताओं के फर्जी लिंक पर क्लिक करने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक संस्थानों को अपनी वेबसाइटों की नियमित सुरक्षा जांच करनी चाहिए। समय पर सुरक्षा अपडेट (पैचिंग) और संदिग्ध गतिविधियों की लगातार निगरानी जरूरी है, ताकि इस तरह के साइबर हमलों को समय रहते रोका जा सके।