गूगल के नए डेटा सेंटर को मिलेगी दुनिया की सबसे बड़ी बैटरी, 100 घंटे का बैकअप

टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक बड़ी उपलब्धि की ओर कदम बढ़ाया जा रहा है। दिग्गज टेक कंपनी गूगल अपने अमेरिकी डेटा सेंटर के लिए एक ऐसी बैटरी सिस्टम लगाने जा रही है, जिसे दुनिया की सबसे बड़ी बैटरी का दर्जा दिया जा रहा है। इस विशाल बैटरी की क्षमता 300 मेगावाट (MW) और 30 गीगावाट-घंटे (GWh) होगी। इसे फॉर्म एनर्जी नामक कंपनी विकसित कर रही है और इसे अमेरिका के मिनेसोटा राज्य में पाइन आइलैंड क्षेत्र में स्थापित किया जाएगा।

हवा और धूप से मिलेगी ताकत

यह परियोजना सिर्फ बैटरी तक सीमित नहीं है। स्थानीय ऊर्जा कंपनी Xcel Energy इस पूरे प्रोजेक्ट को लागू करेगी। गूगल के साथ हुए समझौते के तहत, स्थानीय ग्रिड में 1.4 गीगावाट पवन ऊर्जा और 200 मेगावाट सौर ऊर्जा भी जोड़ी जाएगी। ये सभी नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत मिलकर डेटा सेंटर को बिजली प्रदान करेंगे। Xcel Energy का दावा है कि यह आयरन-एयर बैटरी सिस्टम ऊर्जा भंडारण क्षमता के मामले में अब तक की सबसे बड़ी घोषित परियोजना होगी। यह बैटरी डेटा सेंटर को लगातार 100 घंटों तक चलाने के लिए पर्याप्त ऊर्जा संग्रहीत कर सकेगी।

दुनिया के अन्य प्रोजेक्ट्स से तुलना

हालांकि दुनिया के अन्य हिस्सों में भी बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण परियोजनाएं चल रही हैं, जिससे इस दावे की तुरंत पुष्टि करना मुश्किल है। उदाहरण के लिए, संयुक्त अरब अमीरात में 19 GWh क्षमता का एक लिथियम-आयन बैटरी सिस्टम बन रहा है। वहीं, चीन का फेंगिंग पंप्ड-हाइड्रो स्टोरेज प्लांट लगभग 40 GWh क्षमता का है। इन तुलनाओं के बावजूद, 30 GWh का आंकड़ा मौजूदा बैटरी परियोजनाओं की तुलना में काफी बड़ा माना जा रहा है और यह एक नया मील का पत्थर साबित हो सकता है।

नवीकरणीय ऊर्जा की बड़ी चुनौती

आज के समय में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि पवन और सौर ऊर्जा जैसे स्रोतों से चौबीसों घंटे लगातार बिजली कैसे उपलब्ध कराई जाए। इन स्रोतों से बिजली का उत्पादन मौसम और समय पर निर्भर करता है। लंबे समय तक ऊर्जा को स्टोर करने की तकनीक इस समस्या का समाधान बन सकती है। फॉर्म एनर्जी की आयरन-एयर बैटरी तकनीक इसी दिशा में एक बड़ी सफलता है। कंपनी का दावा है कि यह तकनीक 100 घंटे या उससे भी अधिक समय तक ऊर्जा संग्रहीत कर सकती है, और इसकी लागत पारंपरिक बिजली संयंत्रों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी हो सकती है।

कैसे काम करती है आयरन-एयर बैटरी?

यह बैटरी एक अनोखी प्रक्रिया पर काम करती है जिसे ‘रिवर्सिबल रस्टिंग’ यानी उलटा जंग लगना कहा जाता है। जब बैटरी डिस्चार्ज होती है, तो हजारों छोटे लोहे के कण (आयरन पेलेट्स) हवा के संपर्क में आते हैं और जंग (आयरन ऑक्साइड) में बदलने लगते हैं, जिससे ऊर्जा निकलती है। वहीं, चार्जिंग के दौरान बिजली के करंट की मदद से जंग से ऑक्सीजन को अलग कर दिया जाता है और लोहा फिर से अपने मूल रूप में वापस आ जाता है। यह सरल लेकिन प्रभावी तकनीक भविष्य में ऊर्जा भंडारण के तरीके को बदल सकती है।