AI तकनीक के सैन्य इस्तेमाल पर Google और OpenAI के कर्मचारियों का बड़ा विरोध
ईरान पर अमेरिकी हमलों के बाद तकनीकी दुनिया में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। Google और OpenAI के लगभग 900 कर्मचारियों ने अपनी कंपनियों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग सैन्य जासूसी या घातक हथियारों के विकास के लिए न होने दें। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी तकनीक का इस्तेमाल मानव जीवन को खतरे में डालने वाले कामों में नहीं किया जाना चाहिए।
पेंटागन के फैसले ने बढ़ाई चिंता
यह विरोध तब और तेज हो गया जब अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने AI कंपनी एंथ्रोपिक को ब्लैकलिस्ट कर दिया। एंथ्रोपिक पर आरोप था कि उसने अपनी AI तकनीक को जासूसी या स्वचालित हथियारों में इस्तेमाल करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इस फैसले ने टेक उद्योग में हड़कंप मचा दिया है।
Google और OpenAI के कर्मचारियों ने एक संयुक्त पत्र जारी कर कहा है कि पेंटागन टेक कंपनियों को डराकर और उनके बीच फूट डालकर अपनी शर्तें मनवाना चाहता है। उनका मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से AI के नैतिक उपयोग पर गंभीर सवाल उठते हैं।
Google का पुराना विवाद फिर जीवित
Google के लिए यह कोई नई बात नहीं है। साल 2018 में कंपनी के ‘प्रोजेक्ट मावेन’ को लेकर कर्मचारियों ने जबरदस्त विरोध किया था, जिसके बाद Google को ड्रोन प्रोग्राम से हटना पड़ा था। अब खबरें हैं कि Google अपने सबसे शक्तिशाली AI मॉडल जेमिनी को सेना के खुफिया सिस्टम में शामिल करने के लिए बातचीत कर रहा है।
हाल ही में Google ने अपने आचार सिद्धांतों में बिना किसी सार्वजनिक घोषणा के बदलाव किया और हथियार न बनाने की शर्त को हटा दिया। इस फैसले ने कर्मचारियों के गुस्से को और भड़का दिया है। Google के मुख्य वैज्ञानिक जेफ डीन ने भी स्वीकार किया है कि AI के जरिए सामूहिक जासूसी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ है।
उद्योग का बढ़ता समर्थन
यह विरोध केवल Google और OpenAI तक सीमित नहीं है। Salesforce, Databricks, IBM और Cursor जैसी कंपनियों के सैकड़ों कर्मचारियों ने भी इस मुहिम का समर्थन किया है। उन्होंने पेंटागन से एंथ्रोपिक को ‘सप्लाई चेन रिस्क’ घोषित करने का फैसला वापस लेने की मांग की है।
कर्मचारियों ने कांग्रेस से भी अपील की है कि वह जांच करे कि क्या किसी अमेरिकी टेक कंपनी के खिलाफ इस तरह की असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल उचित है। उनका कहना है कि इस तरह के फैसले AI के विकास और उसके नैतिक उपयोग को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं।
एक्टिविस्ट समूहों की चेतावनी
सक्रिय समूह ‘No Tech For Apartheid’ ने Google, Amazon और Microsoft जैसी बड़ी क्लाउड कंपनियों से अपील की है कि वे ऐसे पेंटागन कॉन्ट्रैक्ट्स को अस्वीकार करें, जिनसे बड़े पैमाने पर निगरानी या AI के दुरुपयोग की आशंका हो। समूह ने जेमिनी मॉडल को गोपनीय माहौल में तैनात करने की संभावना पर चिंता जताई है और इसकी तुलना xAI के ग्रोक मॉडल को रक्षा क्षेत्र में पहुंच मिलने से की है।
जहां एंथ्रोपिक और OpenAI ने पेंटागन के साथ अपने समझौतों की सीमाओं और सुरक्षा उपायों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया है, वहीं Google की ओर से अभी तक कोई ठोस बयान सामने नहीं आया है।
जैसे-जैसे AI तकनीक और अधिक शक्तिशाली होती जा रही है, वैसे-वैसे यह सवाल भी तेज होता जा रहा है कि इसका इस्तेमाल किस सीमा तक और किस उद्देश्य के लिए किया जाना चाहिए। टेक कंपनियों और उनके कर्मचारियों के बीच यह बहस आने वाले दिनों में और गहरी हो सकती है।