गूगल का भारत में 1.36 लाख करोड़ रुपये का निवेश: एआई बुनियादी ढांचे और कौशल विकास पर जोर
टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक बड़ी खबर सामने आई है। गूगल ने एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान भारत और वैश्विक स्तर पर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। इनमें सबसे अहम है भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बुनियादी ढांचे के लिए 15 अरब डॉलर यानी करीब 1.36 लाख करोड़ रुपये के निवेश की योजना। इसके साथ ही कंपनी ने अमेरिका-भारत डिजिटल कनेक्ट पहल, सरकारी एआई कार्यक्रम, कौशल प्रशिक्षण और सुरक्षित एआई उत्पादों पर भी ध्यान केंद्रित किया है।
भारत में डिजिटल कनेक्टिविटी को मिलेगी मजबूती
गूगल ने अपने निवेश के तहत प्रशांत महासागर, अफ्रीका और अन्य क्षेत्रों में सबसी केबल नेटवर्क बिछाने की भी योजना बनाई है। इसके अलावा, कंपनी ने “अमेरिका-इंडिया कनेक्ट” नामक एक नई पहल शुरू की है। इस पहल के तहत अमेरिका, भारत और दक्षिणी गोलार्ध के विभिन्न हिस्सों के बीच नए रणनीतिक फाइबर-ऑप्टिक रूट विकसित किए जाएंगे। इससे डिजिटल कनेक्टिविटी की पहुंच, स्थिरता और विश्वसनीयता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।
सरकारी सेवाओं और विज्ञान में एआई का विस्तार
गूगल का मानना है कि मजबूत बुनियादी ढांचे के साथ-साथ लोगों और संस्थानों में निवेश करना भी उतना ही जरूरी है। दुनिया भर में 74% सरकारी कर्मचारी एआई का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन केवल 18% का मानना है कि उनकी सरकार इसका प्रभावी ढंग से उपयोग कर पा रही है। इस अंतर को कम करने के लिए गूगल ने कई कदम उठाए हैं:
- गूगल.ओआरजी की ओर से 30 मिलियन डॉलर का “ग्लोबल एआई फॉर गवर्नमेंट इनोवेशन इम्पैक्ट चैलेंज” शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक सेवाओं में एआई के उपयोग को बढ़ावा देना है।
- इसी तरह, 30 मिलियन डॉलर का “एआई फॉर साइंस इम्पैक्ट चैलेंज” वैज्ञानिक अनुसंधान को गति देने के लिए शुरू किया गया है।
- गूगल डीपमाइंड ने भारत सरकार और स्थानीय संस्थानों के साथ एक नई साझेदारी की है। इसके तहत अत्याधुनिक एआई मॉडल तक पहुंच प्रदान की जाएगी और इनोवेशन हब को जनरेटिव एआई असिस्टेंट से सशक्त बनाया जाएगा।
- भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय के सहयोग से “गूगल सेंटर फॉर क्लाइमेट टेक्नोलॉजी” की स्थापना की जाएगी। यह केंद्र एआई आधारित जलवायु समाधानों को बढ़ावा देने पर काम करेगा।
एआई कौशल से रोजगार और नवाचार को बढ़ावा
गूगल ने बताया कि वह अब तक 10 करोड़ से अधिक लोगों को डिजिटल कौशल में प्रशिक्षित कर चुका है। अब कंपनी ने और बड़े स्किलिंग कार्यक्रम शुरू किए हैं।
- एआई प्रोफेशनल सर्टिफिकेट प्रोग्राम लॉन्च किया गया है, जिससे लोग कार्यस्थल पर एआई का उपयोग सीख सकेंगे। भारत में यह कार्यक्रम वधवानी एआई के साथ मिलकर छात्रों और शुरुआती करियर पेशेवरों तक पहुंचाया जाएगा।
- कर्मयोगी भारत के साथ साझेदारी करते हुए “मिशन कर्मयोगी” के तहत सिविल सेवाओं को भविष्य के लिए तैयार किया जाएगा।
- गूगल क्लाउड आईजीओटी कर्मयोगी प्लेटफॉर्म को सुरक्षित बुनियादी ढांचा प्रदान कर रहा है। यह प्लेटफॉर्म 800 से अधिक जिलों में 2 करोड़ से अधिक सरकारी कर्मचारियों को सहायता प्रदान करता है।
- प्रशिक्षण सामग्री को 18 से अधिक भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें।
सुंदर पिचाई का दृष्टिकोण: एआई से हर क्षेत्र में बदलाव
एआई समिट में गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता लोगों के जीवन को हर उस क्षेत्र में बेहतर बनाएगी, जिससे वे रोजमर्रा में जुड़े होते हैं। उनके अनुसार, आने वाले समय में लगभग हर सेक्टर और हर संदर्भ में बदलाव देखने को मिलेगा। पिचाई ने यह भी कहा कि आज पूरी तरह से यह कल्पना करना मुश्किल है कि यह बदलाव किस स्तर तक जाएगा, लेकिन इतना तय है कि इसका प्रभाव बेहद गहरा और व्यापक होगा।
पिचाई के इस बयान से साफ है कि टेक इंडस्ट्री एआई को सिर्फ एक तकनीकी उपकरण नहीं, बल्कि समाज और अर्थव्यवस्था को बदलने वाली ताकत के रूप में देख रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, सेवाएं और डिजिटल संचार जैसे क्षेत्रों में एआई की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है। गूगल का यह कदम भारत को एआई के क्षेत्र में वैश्विक नेता बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।