गुप्त तकनीक ‘घोस्ट मर्मर’: दिल की धड़कन ने बचाई ईरान में फंसे अमेरिकी पायलट की जान
अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने हाल ही में एक ऐसी गुप्त तकनीक का सफलतापूर्वक उपयोग किया है जो किसी भी इंसान की दिल की धड़कन के जरिए उसकी सटीक लोकेशन का पता लगा सकती है। ‘घोस्ट मर्मर’ नामक इस अत्याधुनिक तकनीक ने ईरान में दुर्घटनाग्रस्त हुए एक अमेरिकी पायलट को खोजने में अहम भूमिका निभाई।
कैसे काम करता है ‘घोस्ट मर्मर’?
यह तकनीक ‘क्वांटम मैग्नेटोमेट्री’ के वैज्ञानिक सिद्धांत पर आधारित है। हर इंसान के दिल की धड़कन एक अनोखा विद्युत-चुंबकीय सिग्नल उत्पन्न करती है, जो उस व्यक्ति की पहचान के लिए एक विशेष फिंगरप्रिंट की तरह काम करता है। ‘घोस्ट मर्मर’ मीलों दूर से इस बेहद कमजोर सिग्नल को पकड़ लेता है। इसके बाद कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से हजारों अन्य इलेक्ट्रॉनिक शोरों के बीच से केवल उस इंसान की धड़कन को अलग करके उसकी सटीक लोकेशन का पता लगाया जाता है।
सामान्य चिकित्सा उपकरणों के विपरीत, जिन्हें धड़कन मापने के लिए सीधे छाती से जोड़ा जाता है, यह तकनीक बिना किसी शारीरिक संपर्क के लंबी दूरी से भी काम कर सकती है। इसका नाम ‘घोस्ट मर्मर’ इसलिए रखा गया है क्योंकि ‘मर्मर’ दिल की धड़कन की लय को दर्शाता है, जबकि ‘घोस्ट’ उस व्यक्ति को खोजने की क्षमता को बताता है जो दुनिया की नजरों से पूरी तरह ओझल हो चुका है।
ईरान में दुर्घटना और बचाव अभियान
पिछले सप्ताह ईरान के दक्षिणी क्षेत्र में एक अमेरिकी F-15 लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। विमान में सवार वेपन सिस्टम ऑफिसर, जिसे कोडनेम ‘ड्यूड 44 ब्रावो’ के नाम से जाना जाता है, किसी तरह इस हादसे में बच गया। लगभग दो दिनों तक वह ईरान की सुनसान पहाड़ियों और ठंडे रेगिस्तान में छिपा रहा। इस दौरान ईरानी सेना उसे पकड़ने के लिए हर जगह तलाश कर रही थी। जब उम्मीदें कम होने लगीं, तब ‘घोस्ट मर्मर’ ने इस मिशन को सफल बनाया।
सुनसान इलाका बना तकनीक के लिए वरदान
विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान का वह इलाका इस तकनीक के पहले इस्तेमाल के लिए बेहद उपयुक्त था। वहां मानवीय आबादी बहुत कम होने के कारण अन्य विद्युत-चुंबकीय तरंगों का हस्तक्षेप न के बराबर था। इसके अलावा, रात के समय रेगिस्तान की ठंडी रेत और एक जीवित इंसान के शरीर की गर्मी के बीच स्पष्ट अंतर होने से यह तकनीक और अधिक प्रभावी हो गई। हालांकि, यह भी माना जा रहा है कि यह तकनीक अभी अपने शुरुआती चरण में है और भीड़-भाड़ वाले शहरी इलाकों में उतनी सटीक नहीं हो सकती जितनी सुनसान जगहों पर होती है।
पहाड़ की दरार में छिपे पायलट को ऐसे ढूंढा गया
हादसे के बाद घायल पायलट एक पहाड़ की संकरी दरार में छिप गया था। उसने बोइंग कंपनी द्वारा निर्मित अपना आपातकालीन सिग्नल बीकन चालू कर दिया था, लेकिन बचाव दल उसकी सटीक लोकेशन का पता नहीं लगा पा रहा था। जैसे ही वह पायलट बीकन सिग्नल भेजने के लिए कुछ पल के लिए दरार से बाहर निकला, ‘घोस्ट मर्मर’ ने तुरंत उसकी दिल की धड़कन के सिग्नल को पकड़ लिया। इसी जानकारी के आधार पर बचाव दल ने उसकी सटीक लोकेशन का पता लगाकर उसे सुरक्षित बचा लिया।
सीआईए प्रमुख ने दिए तकनीक के संकेत
हालांकि अमेरिकी सरकार ने आधिकारिक तौर पर ‘घोस्ट मर्मर’ जैसी तकनीक के अस्तित्व को स्वीकार नहीं किया है, लेकिन सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ ने एक ब्रीफिंग के दौरान इसके संकेत जरूर दिए। उन्होंने गर्व से कहा कि एजेंसी के पास ऐसी ‘बेहतरीन तकनीकें’ हैं जो दुनिया की किसी भी अन्य खुफिया एजेंसी के पास नहीं हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इनमें से कई क्षमताएं अत्यधिक गुप्त होती हैं और सुरक्षा कारणों से उनकी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि आधुनिक तकनीक किस तरह से युद्धक्षेत्र और खुफिया अभियानों में क्रांतिकारी बदलाव ला रही है। ‘घोस्ट मर्मर’ जैसी तकनीकें भविष्य में सैन्य अभियानों और बचाव कार्यों को पूरी तरह से बदल सकती हैं।