खाने को अखबार में लपेटना: सेहत के लिए कितना खतरनाक?
भारत की सड़कों पर आज भी कई छोटे दुकानदार और ठेले वाले समोसे, पकौड़े, कचौड़ी या वड़ा पाव जैसे स्नैक्स को अखबार में लपेटकर देते हैं। यह एक आम दृश्य है, लेकिन यह आदत सेहत के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने बार-बार इस प्रथा के खिलाफ चेतावनी जारी की है। उनके अनुसार, अखबार में खाना पैक करना न केवल असुरक्षित है, बल्कि ‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (पैकेजिंग) रेगुलेशंस, 2018’ के तहत यह पूरी तरह से गैरकानूनी भी है। आइए जानते हैं कि यह आम आदत आपकी सेहत पर कैसे भारी पड़ सकती है।
स्याही में छिपा जहर
अखबारों को छापने के लिए जिस स्याही का इस्तेमाल होता है, उसमें कई तरह के जहरीले रसायन, भारी धातुएं, सॉल्वेंट और कृत्रिम रंग मौजूद होते हैं। जब आप गर्म और तैलीय खाने को अखबार में लपेटते हैं, तो ये हानिकारक तत्व सीधे भोजन में प्रवेश कर जाते हैं। ये रसायन शरीर में पहुंचकर लीवर, किडनी और हार्मोन सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकते हैं। लंबे समय तक ऐसे दूषित भोजन का सेवन करने से शरीर में धीरे-धीरे विषाक्त पदार्थ जमा होते रहते हैं, जो कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
गंभीर बीमारियों का बढ़ता जोखिम
अखबार में पैक किए गए भोजन के नियमित सेवन से शरीर में टॉक्सिन्स की मात्रा बढ़ जाती है। इसके कारण पेट से जुड़ी समस्याएं जैसे गैस, अपच और फूड पॉइजनिंग हो सकती है। इसके अलावा, यह हार्मोनल असंतुलन और इम्यून सिस्टम को भी कमजोर कर सकता है। कई शोधों में यह बात सामने आई है कि अखबार की स्याही में मौजूद कुछ रसायन कैंसर जैसी घातक बीमारियों के खतरे को बढ़ा सकते हैं। लगातार इन जहरीले केमिकल्स के संपर्क में रहने से शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है और दीर्घकालिक रोगों का खतरा बढ़ जाता है।
बैक्टीरिया और गंदगी का खतरा
अखबार एक ऐसी चीज है जो कई लोगों के हाथों से गुजरता है और खुले वातावरण में रखा जाता है। इसकी सतह पर धूल, मिट्टी, बैक्टीरिया और कई तरह के सूक्ष्म जीव जमा हो सकते हैं। जब इसी अखबार का इस्तेमाल खाने को लपेटने के लिए किया जाता है, तो ये सभी हानिकारक सूक्ष्म जीव सीधे भोजन के संपर्क में आ जाते हैं। इससे पेट में संक्रमण, डायरिया और अन्य गंभीर इंफेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह खतरा और भी ज्यादा होता है, क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है।
गर्म और तैलीय खाने में सबसे ज्यादा खतरा
समोसे, पकौड़े, कचौड़ी जैसे गर्म और तैलीय खाद्य पदार्थ अखबार की स्याही को बहुत तेजी से सोख लेते हैं। गर्मी और तेल मिलकर रासायनिक प्रतिक्रिया को तेज कर देते हैं, जिससे केमिकल्स और भी आसानी से भोजन में घुल जाते हैं। यही कारण है कि स्ट्रीट फूड में अखबार का उपयोग सबसे ज्यादा खतरनाक माना जाता है। गर्म भोजन में मौजूद नमी और तेल, स्याही के कणों को तुरंत अवशोषित कर लेते हैं, जिससे यह जहर सीधे आपके पेट में पहुंचता है।
- अखबार की स्याही में पाए जाने वाले रसायन जैसे लेड, कैडमियम और क्रोमियम शरीर के लिए बेहद हानिकारक होते हैं।
- ये भारी धातुएं तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचा सकती हैं और बच्चों के विकास पर बुरा असर डाल सकती हैं।
- अखबार में इस्तेमाल होने वाले ब्लीच और अन्य रसायन भी भोजन में मिल सकते हैं, जो पाचन तंत्र को खराब कर सकते हैं।
- लंबे समय तक इस प्रथा को जारी रखने से शरीर में कैंसर पैदा करने वाले तत्वों का संचय हो सकता है।
अखबार में खाना लपेटने की यह परंपरा भले ही पुरानी और आम हो, लेकिन यह आपकी सेहत के लिए किसी भी तरह से सुरक्षित नहीं है। FSSAI द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को गंभीरता से लेना चाहिए। अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य को बचाने के लिए इस खतरनाक आदत को तुरंत बदलना जरूरी है। खाने को पैक करने के लिए हमेशा साफ और खाद्य-सुरक्षित सामग्री जैसे बटर पेपर, एल्युमिनियम फॉयल या कांच के बर्तनों का ही इस्तेमाल करें।