क्या सिर्फ बाहर का खाना ही नहीं, घर का बना भोजन भी बन सकता है फूड पॉइजनिंग का कारण?

गर्मी और बरसात के मौसम में पेट से जुड़ी समस्याएं जैसे उल्टी, दस्त और पेट दर्द आम हो जाती हैं। कई बार ये लक्षण इतने गंभीर हो जाते हैं कि व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती होने तक की नौबत आ जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इन पाचन संबंधी बीमारियों का एक प्रमुख कारण फूड पॉइजनिंग हो सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़े बताते हैं कि दुनिया भर में हर साल असुरक्षित भोजन और उससे होने वाली बीमारियों के कारण लगभग 86.6 करोड़ से अधिक लोग बीमार पड़ते हैं, जिनमें से 15.2 लाख से ज्यादा लोगों की जान चली जाती है। इससे सबसे ज्यादा प्रभावित पांच साल से कम उम्र के बच्चे होते हैं। आमतौर पर बासी खाना और खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों को इसका मुख्य कारण माना जाता है।

अक्सर यह धारणा है कि फूड पॉइजनिंग केवल सड़क किनारे या बाजार के खाने से होती है, लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है। अगर भोजन को सही तापमान पर न रखा जाए, हाथों की सफाई का ध्यान न रखा जाए, या पका हुआ भोजन लंबे समय तक खुला छोड़ दिया जाए, तो घर का बना खाना भी बैक्टीरिया, वायरस और अन्य हानिकारक रोगाणुओं से दूषित हो सकता है। यानी, घर की रसोई में तैयार भोजन भी फूड पॉइजनिंग के खतरे को बढ़ा सकता है।

गर्मियों में क्यों बढ़ जाता है फूड इंफेक्शन का खतरा?

फूड पॉइजनिंग के अधिकांश मामलों में उल्टी, दस्त, पेट दर्द और बुखार जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। हालांकि, कई बार यह समस्या इतनी गंभीर हो जाती है कि मरीज को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता पड़ सकती है।

बरसात और गर्मी के मौसम में यह समस्या और भी बढ़ जाती है। इसका कारण यह है कि गर्म और नम वातावरण में बैक्टीरिया तेजी से पनपते और फैलते हैं। यही वजह है कि इन दिनों खाने-पीने की चीजों को सुरक्षित रखने पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है।

कई लोग बचे हुए खाने को बार-बार गर्म करके खा लेते हैं, लेकिन यदि उसे सही तरीके से फ्रिज में नहीं रखा गया हो, तो यह भी संक्रमण का एक बड़ा कारण बन सकता है।

फूड पॉइजनिंग क्या है और यह कैसे होती है?

जब आप ऐसा भोजन या पानी ग्रहण करते हैं जो बैक्टीरिया, वायरस या परजीवी से दूषित हो, तो फूड इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। आमतौर पर साल्मोनेला, ई. कोलाई, कैम्पिलोबैक्टर, लिस्टेरिया और नोरोवायरस जैसे रोगाणु इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। दूषित भोजन खाने के कुछ घंटों से लेकर कई दिनों के भीतर इसके लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

  • साल्मोनेला: यह आमतौर पर कच्चे या अधपके मांस और अंडे में पाया जाता है।
  • ई. कोलाई: दूषित पानी और अधपके मीट के सेवन से यह संक्रमण फैलता है।
  • कैम्पिलोबैक्टर: यह दूषित पानी और कच्चे पोल्ट्री मांस में पाया जाता है।
  • लिस्टेरिया: यह बैक्टीरिया बिना पाश्चुरीकृत दूध और पनीर में तेजी से पनपता है।

क्या वाकई घर के खाने से भी हो सकती है फूड पॉइजनिंग?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि फूड इंफेक्शन से बचने के लिए लोगों को घर का बना खाना खाने की सलाह दी जाती है। हालांकि, यह तभी सुरक्षित रहता है जब इसे साफ-सफाई और सही तरीके से बनाया और संग्रहीत किया जाए।

अगर कच्चे मांस और पकी हुई सब्जियों के लिए एक ही चाकू का इस्तेमाल किया जाए, खाना बनाने से पहले हाथ अच्छी तरह न धोए जाएं, या भोजन को लंबे समय तक कमरे के तापमान पर छोड़ दिया जाए, तो घर का भोजन भी दूषित हो सकता है। बचे हुए खाने को कई घंटों तक बाहर रखने के बाद दोबारा गर्म करके खाने से भी संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

कैसे पहचानें कि आपको फूड पॉइजनिंग हो गई है?

फूड पॉइजनिंग के लक्षणों में मतली, उल्टी, बार-बार दस्त आना, पेट में मरोड़, पेट दर्द, बुखार, कमजोरी और डिहाइड्रेशन शामिल हैं। कुछ लोगों में सिरदर्द और शरीर में दर्द भी हो सकता है।

गंभीर मामलों में मल में खून आना, लगातार उल्टी होना और तेज बुखार जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। छोटे बच्चों और बुजुर्गों में डिहाइड्रेशन का खतरा अधिक होता है। यदि दस्त या उल्टी लगातार बनी रहे या डिहाइड्रेशन के कोई भी संकेत दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

फूड पॉइजनिंग होने पर शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी न होने देना सबसे जरूरी है। खूब पानी पीते रहें और ओआरएस के घोल से गंभीरता को कम किया जा सकता है। मरीजों को हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन ही खाना चाहिए। फूड पॉइजनिंग के लक्षण दिखते ही डॉक्टर की सलाह लेना न भूलें।