फाल्गुन त्रयोदशी पर जसोल धाम में श्रद्धालुओं का सैलाब, चंद्रग्रहण के दौरान रहेंगे कपाट बंद
राजस्थान की लोकआस्था और परंपरा का प्रमुख केंद्र श्री राणी भटियाणी मंदिर में फाल्गुन शुक्ल पक्ष त्रयोदशी के पावन अवसर पर श्रद्धा, आस्था और भक्ति का अनुपम संगम देखने को मिला। प्रातःकालीन मंगला आरती के साथ ही मंदिर परिसर “जय मां जसोल” के जयघोष से गूंज उठा। सूर्योदय से पहले ही दूर-दराज जिलों और ग्रामीण अंचलों से आए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें मुख्य द्वार से लेकर बाहरी परिक्रमा पथ तक दिखाई देने लगीं।
अलसुबह से शुरू हुआ दर्शन का सिलसिला
भोर की पहली किरण के साथ जब मंदिर के कपाट खुले, तो श्रद्धालुओं ने अनुशासित ढंग से दर्शन प्रारंभ किए। महिलाएं सिर पर चुनरी और थाल में नारियल-चूनरी लिए भाव-विभोर नजर आईं, वहीं पुरुष भक्त परिवार सहित कतारों में खड़े होकर अपनी बारी की प्रतीक्षा करते रहे। पूरे परिसर में भक्ति गीतों की मधुर ध्वनि वातावरण को आध्यात्मिक बना रही थी।
श्रद्धालुओं ने विधिवत रूप से श्री राणीसा भटियाणीसा के मुख्य मंदिर में पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और मंगलमय जीवन की कामना की। इसके साथ ही परिसर में स्थित श्री बायोसा, श्री सवाईसिंह जी, श्री लाल बन्ना सा, श्री खेतलाजी एवं श्री काला-गौरा भैरूजी के मंदिरों में भी भक्तों की विशेष आस्था देखने को मिली। हर मंदिर में श्रद्धालु दीप प्रज्वलित कर, पुष्प अर्पित कर और माथा टेककर मनोकामनाएं मांगते रहे।
नवविवाहित जोड़ों की विशेष उपस्थिति
त्रयोदशी को विशेष रूप से नवविवाहित दंपतियों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इसी परंपरा का निर्वाह करते हुए बड़ी संख्या में नवविवाहित जोड़े मंदिर पहुंचे। दुल्हनें पारंपरिक परिधान में और वर पगड़ी धारण किए माता के चरणों में शीश नवाते नजर आए। दंपतियों ने अपने दाम्पत्य जीवन में प्रेम, सौहार्द, अखंड सौभाग्य और समृद्धि की कामना की। कई परिवारों ने इसे “पहला सामूहिक दर्शन” मानते हुए पूरे उत्साह के साथ भागीदारी की।
संस्थान की सुदृढ़ व्यवस्थाएं
श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर संस्थान ने व्यापक स्तर पर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की थीं। मुख्य प्रवेश द्वार से लेकर गर्भगृह तक जिग-जैग लाइनिंग प्रणाली लागू की गई, जिससे भीड़ नियंत्रित और व्यवस्थित रही। परिसर में शुद्ध पेयजल के स्टॉल, छाया के लिए टेंट एवं अस्थायी शेड, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए विश्राम स्थल तथा प्राथमिक उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई गई।
सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए सीसीटीवी कैमरों से पूरे परिसर की निगरानी की गई। पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम के माध्यम से समय-समय पर श्रद्धालुओं को दिशा-निर्देश और आवश्यक सूचनाएं प्रसारित की जाती रहीं। स्वयंसेवकों की टीम लगातार कतारों में व्यवस्था बनाए रखने और वरिष्ठ नागरिकों की सहायता में जुटी रही। इन सभी प्रयासों के चलते दर्शन व्यवस्था दिनभर शांतिपूर्ण और सुचारू बनी रही।
कन्या पूजन और प्रसाद वितरण
त्रयोदशी के पुण्य अवसर पर जसोल नगर पालिका क्षेत्र के सर्व समाज की कन्याओं का विधिवत पूजन किया गया। मंदिर परिसर में विशेष रूप से सजे मंच पर कन्याओं को आमंत्रित कर उनके चरण पूजे गए। उन्हें फल-प्रसाद, अन्नपूर्णा प्रसादम एवं दक्षिणा भेंट कर आशीर्वाद प्रदान किया गया। इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और कन्याओं को “मां का स्वरूप” मानकर सम्मानित किया।
पूर्व संध्या पर भव्य रात्रि जागरण
त्रयोदशी की पूर्व संध्या पर मंदिर परिसर में भव्य रात्रि जागरण का आयोजन हुआ। स्थानीय भजन मंडलियों ने मां जसोल की महिमा का गुणगान करते हुए सुमधुर भक्ति प्रस्तुतियां दीं। ढोलक और हारमोनियम की ताल पर गूंजते भजनों ने श्रद्धालुओं को देर रात तक बांधे रखा। पूरा वातावरण भक्ति रस से सराबोर रहा और श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भजनों का आनंद लेते रहे।
संध्याकालीन आरती का लाइव प्रसारण
इस विशेष अवसर पर आयोजित संध्याकालीन आरती का सीधा प्रसारण भी किया गया। डिजिटल माध्यम से देश-विदेश में बसे भक्तों ने घर बैठे ही दिव्य आरती और दर्शन का लाभ उठाया। लाइव प्रसारण के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने ऑनलाइन सहभागिता कर भक्ति भाव के साथ आरती में शामिल होकर आध्यात्मिक आनंद का अनुभव किया।
चंद्रग्रहण के दौरान मंदिर रहेगा बंद
आगामी चंद्रग्रहण को ध्यान में रखते हुए संस्थान प्रवक्ता कुंवर हरिश्चंद्र सिंह जसोल ने जानकारी दी कि 03 मार्च 2026 को प्रातः 06:30 बजे से सायं 07:00 बजे तक मंदिर के कपाट परंपरानुसार बंद रहेंगे। ग्रहण काल के दौरान नियमित पूजा-पाठ, आरती एवं दर्शन व्यवस्था स्थगित रहेगी। संस्थान की ओर से श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे इस अवधि में अपने घरों एवं प्रतिष्ठानों में रहकर मां जसोल का स्मरण और ध्यान करें।