नकली आईटी कर्मचारी बनकर क्रिप्टो दुनिया में सेंधमारी: नॉर्थ कोरियाई हैकर्स का बड़ा राज खुला
एक नई जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जो साइबर सुरक्षा की दुनिया में हड़कंप मचा रहे हैं। नॉर्थ कोरिया से जुड़े एक हैकर समूह ने फर्जी पहचान बनाकर खुद को आईटी पेशेवर के रूप में पेश किया और कई क्रिप्टोकरेंसी प्रोजेक्ट्स को अपना निशाना बनाया। यह पूरा ऑपरेशन इतना पेशेवर था कि इन हैकर्स ने हर महीने लगभग 1 मिलियन डॉलर (करीब 93 लाख रुपये) की कमाई की। रिपोर्ट के अनुसार, अब तक इन्होंने 3.5 मिलियन डॉलर (लगभग 3.25 करोड़ रुपये) से अधिक की राशि चुरा ली है।
कैसे हुआ इस गुप्त ऑपरेशन का पर्दाफाश?
इस पूरे साइबर अपराध का भंडाफोड़ एक छोटी सी चूक से हुआ। ‘जेरी’ नाम के एक नॉर्थ कोरियाई आईटी कर्मचारी का डिवाइस ‘इन्फोस्टीलर’ नामक मैलवेयर का शिकार हो गया। एक अज्ञात स्रोत ने इस डिवाइस से गुप्त चैट लॉग, नकली पहचान पत्र और ब्राउज़र हिस्ट्री जैसी अहम जानकारियां निकाल लीं। इन दस्तावेजों से पता चला कि ये हैकर न सिर्फ क्रिप्टो प्रोजेक्ट्स में सेंध लगा रहे थे, बल्कि कानूनी दस्तावेजों में भी जालसाजी कर रहे थे।
‘123456’ पासवर्ड से चल रहा था पूरा नेटवर्क
इन हैकर्स ने अपनी पूरी योजना को अंजाम देने के लिए ‘luckyguys.site’ नाम से एक गुप्त वेबसाइट बनाई थी। इस साइट का इस्तेमाल वे आपस में संवाद करने और अपने अगले कदमों की योजना बनाने के लिए करते थे। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस अत्यधिक संवेदनशील वेबसाइट की सुरक्षा के लिए रखा गया साझा पासवर्ड बेहद सामान्य ‘123456’ था। जांच में यह भी पता चला कि इस ग्रुप के कई सदस्य उन संगठनों (जैसे सोबेक्सू, सीनल और सोंगक्वांग) से जुड़े थे, जिन्हें अमेरिका पहले ही प्रतिबंधित कर चुका है।
चुराई गई रकम को सुरक्षित रखने के लिए इन हैकर्स ने एक जटिल प्रक्रिया अपनाई। वे पहले चुराए गए क्रिप्टो को फिएट मुद्रा (सामान्य पैसे) में बदलते थे। इसके बाद Payoneer जैसे ऑनलाइन भुगतान प्लेटफॉर्म का उपयोग करके इस रकम को चीनी बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिया जाता था। अपनी गतिविधियों की लगातार रिपोर्ट देने और अपने हैंडलर्स से जुड़े रहने के लिए ये हैकर ‘डिस्कॉर्ड’ जैसे मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल करते थे।
अपना खुद का ‘लीडरबोर्ड’ और नकली नौकरियां
इस हैकर समूह ने अपनी वेबसाइट पर एक पेशेवर ‘लीडरबोर्ड’ भी बना रखा था। इस बोर्ड पर 8 दिसंबर 2025 के बाद से प्रत्येक हैकर द्वारा की गई कमाई का लेखा-जोखा रखा जाता था। सबूत के तौर पर इसमें ब्लॉकचेन ट्रांजैक्शन के लिंक भी मौजूद थे। अपनी पहचान छिपाने के लिए ये जालसाज कितनी दूर तक जा सकते हैं, इसका अंदाजा ‘जेरी’ और ‘रास्कल’ नाम के हैकर्स से लगाया जा सकता है। ‘जेरी’ ने टेक्सास की एक टी-शर्ट कंपनी में वर्डप्रेस और एसईओ विशेषज्ञ के रूप में नौकरी के लिए फर्जी आवेदन किया था। वहीं, ‘रास्कल’ ने हांगकांग के पते वाले नकली बिल और एक आयरिश पासपोर्ट की फोटो साझा की थी। यह दर्शाता है कि ये हैकर दुनिया भर में फर्जी पहचान के जरिए घुसपैठ करने में माहिर हैं।
पहले भी हो चुका है 65 हजार करोड़ का बड़ा घोटाला
सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह कोई नया खतरा नहीं है। नॉर्थ कोरियाई आईटी वर्कर्स का यह नेटवर्क लंबे समय से उनकी निगरानी में रहा है। सुरक्षा शोधकर्ता टेलर मनोनान के आंकड़ों के अनुसार, ये हैकर पिछले सात वर्षों से लगातार DeFi (विकेंद्रीकृत वित्त) प्लेटफॉर्म्स को निशाना बना रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि 2017 से अब तक इन्होंने लगभग 7 बिलियन डॉलर (करीब 65 हजार करोड़ रुपये) से अधिक की क्रिप्टोकरेंसी चुराई है। यहां तक कि 285 मिलियन डॉलर (लगभग 2,600 करोड़ रुपये) के चर्चित ‘ड्रिफ्ट प्रोटोकॉल’ हैक के पीछे भी इन्हीं नॉर्थ कोरियाई इकाइयों का हाथ बताया गया है, जो उनकी खतरनाक क्षमताओं को उजागर करता है।