यूरोप में गर्मी का प्रकोप: एयर कंडीशनर और कूलर की मांग ने मचाई भगदड़

यूरोप इस समय भीषण गर्मी और हीटवेव की चपेट में है। रिकॉर्ड तोड़ तापमान ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है, और इसी के साथ एयर कंडीशनर, कूलर और पंखों की मांग में अचानक भारी उछाल आ गया है। कई शहरों में दुकानों के खुलते ही लोग कूलिंग उत्पादों को खरीदने के लिए उमड़ पड़े हैं, जिससे अफरा-तफरी का माहौल बन गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे लोग स्टोर में घुसते ही पंखे और एसी लेने के लिए दौड़ पड़ते हैं।

यूरोप में एयर कंडीशनर का उपयोग इतना कम क्यों है?

भारत, अमेरिका या जापान जैसे देशों की तुलना में यूरोप में एयर कंडीशनर का उपयोग बहुत कम है। इसके पीछे कई ठोस कारण हैं:

  • मौसम की मार: यूरोप के अधिकांश हिस्सों में साल के ज्यादातर महीने ठंडे रहते हैं। गर्मी का मौसम बहुत छोटा होता है, इसलिए लोग आमतौर पर पंखे या कूलर से ही काम चला लेते हैं।
  • चौंकाने वाले आंकड़े: ऊर्जा विभाग के अनुसार, अमेरिका में लगभग 90 प्रतिशत घरों में एयर कंडीशनर लगे हैं, जबकि यूरोप में यह आंकड़ा मात्र 20 प्रतिशत है।

यूरोप में एसी लगवाना इतना मुश्किल क्यों है?

भारत में एयर कंडीशनर खरीदने के बाद कुछ ही घंटों में इसे लगवाना आसान है, लेकिन यूरोप में यह प्रक्रिया काफी जटिल है। इसकी मुख्य वजहें ये हैं:

  • ऐतिहासिक इमारतें और सख्त नियम: यूरोप के कई शहर अपनी ऐतिहासिक विरासत के लिए प्रसिद्ध हैं। पुरानी इमारतों के बाहरी स्वरूप में बदलाव करने पर कड़ी पाबंदी है। दीवार में छेद करके स्प्लिट या विंडो एसी लगाने की अनुमति नहीं मिलती।
  • प्रशासनिक मंजूरी का झंझट: नई इमारतों में भी एसी लगाने के लिए स्थानीय निकायों और सोसायटी से कई तरह की अनुमतियां लेनी पड़ती हैं। यह प्रक्रिया लंबी और थकाऊ होती है।

किराएदारों के लिए एसी लगाना एक बड़ी चुनौती

यूरोप के कई देशों में लगभग आधी आबादी किराए के मकानों में रहती है। इन लोगों के लिए एयर कंडीशनर लगवाना और भी मुश्किल हो जाता है:

  • मकान मालिक की सहमति न मिलना: ज्यादातर मकान मालिक अपनी संपत्ति में किसी भी तरह के बदलाव की अनुमति नहीं देते, खासकर अगर इसमें दीवारों में छेद करना शामिल हो।
  • भारी इंस्टॉलेशन खर्च: अगर किसी तरह अनुमति मिल भी जाए, तो एसी लगवाने का खर्च इतना अधिक होता है कि किराएदार इसे वहन नहीं कर पाते।

इन्हीं सब कारणों से जब यूरोप में अचानक भीषण गर्मी पड़ी, तो लोगों ने उन कूलिंग उत्पादों की ओर रुख किया, जिन्हें बिना किसी जटिल इंस्टॉलेशन के तुरंत इस्तेमाल किया जा सके। यही वजह है कि सुपरमार्केट में एयर कंडीशनर, कूलर और पंखे खरीदने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी और छीना-झपटी जैसी स्थिति पैदा हो गई।