एक्स के ब्लू टिक पर यूरोपीय संघ का सख्त एक्शन, भारी जुर्माने के बाद बदल सकते हैं नियम
एलन मस्क के स्वामित्व वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स को यूरोप में एक बड़ी कानूनी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। यूरोपीय संघ (ईयू) ने कंपनी के ‘पेड ब्लू टिक’ सिस्टम को भ्रामक और उपयोगकर्ताओं के लिए भरोसे के लायक नहीं मानते हुए भारी जुर्माना लगाया है। इस कार्रवाई के बाद एक्स को अपनी वेरिफिकेशन नीतियों में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं। आइए समझते हैं कि यह पूरा विवाद क्यों खड़ा हुआ और इसके आगे क्या परिणाम हो सकते हैं।
ईयू ने क्यों लगाया इतना बड़ा जुर्माना?
यूरोपीय आयोग ने दिसंबर 2025 में ‘डिजिटल सर्विसेज एक्ट’ (डीएसए) के तहत एक्स पर लगभग 1,267 करोड़ रुपये (€120 मिलियन) का जुर्माना लगाया था। आयोग का स्पष्ट मानना है कि एक्स का मौजूदा ब्लू टिक सिस्टम यूजर्स को गुमराह कर रहा है और यह सुरक्षित नहीं है। नियामकों के अनुसार, यह प्रणाली उपयोगकर्ताओं को यह विश्वास दिलाती है कि ब्लू टिक वाले अकाउंट प्रामाणिक और भरोसेमंद हैं, जबकि हकीकत में कोई भी व्यक्ति पैसे देकर इसे खरीद सकता है।
ब्लू टिक विवाद की असली जड़ क्या है?
इस विवाद को समझने के लिए पुराने और नए ब्लू टिक सिस्टम के बीच का अंतर जानना जरूरी है। मस्क के आने से पहले, ब्लू टिक केवल उन्हीं खातों को दिया जाता था जो सार्वजनिक रूप से पहचाने जाते थे, जैसे नेता, पत्रकार, सेलिब्रिटी या सरकारी अधिकारी। इसका उद्देश्य फर्जी अकाउंट्स को रोकना और लोगों को असली पहचान की पुष्टि करना था।
लेकिन 2022 में एक्स को खरीदने के बाद एलन मस्क ने पेड सब्सक्रिप्शन मॉडल शुरू कर दिया। अब कोई भी व्यक्ति सिर्फ पैसे देकर अपने अकाउंट पर ब्लू टिक लगवा सकता है। यूरोपीय नियामकों की मुख्य चिंता यही है कि आम लोग आज भी ब्लू टिक को सच्चाई और भरोसे का प्रतीक मानते हैं। ऐसे में, जब कोई भी इसे खरीद सकता है, तो फर्जी या गलत जानकारी फैलाने वाले अकाउंट्स के धोखा देने का खतरा काफी बढ़ जाता है।
एक्स ने बदलाव का प्रस्ताव दिया है
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारी जुर्माने और सख्त कार्रवाई से बचने के लिए एक्स ने यूरोपीय संघ को अपने सिस्टम में कुछ नए बदलावों का प्रस्ताव सौंपा है। यूरोपीय आयोग के प्रवक्ता ने बताया कि वे फिलहाल इन प्रस्तावों की बारीकी से जांच कर रहे हैं। कंपनी को इस मामले का उचित समाधान निकालने के लिए 12 मार्च तक का समय दिया गया था। अगर जांच के बाद आयोग एक्स के प्रस्तावों से संतुष्ट नहीं होता है, तो कंपनी पर और भी सख्त कार्रवाई या नया जुर्माना लगाया जा सकता है।
सिर्फ ब्लू टिक ही नहीं, ये मुद्दे भी हैं चिंता का विषय
यूरोपीय संघ ने सिर्फ ब्लू टिक के मामले में ही नहीं, बल्कि कुछ अन्य गंभीर मुद्दों पर भी एक्स को घेरा है। नियामकों का आरोप है कि प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन प्रदर्शन को लेकर पारदर्शिता की भारी कमी है। इसके अलावा, एक और बड़ी समस्या यह है कि स्वतंत्र शोधकर्ताओं को एक्स के जरूरी पब्लिक डेटा तक उचित पहुंच नहीं मिल पा रही है। इससे प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली पर और सवाल खड़े हो रहे हैं।
यूरोप और अमेरिका के बीच बहस छिड़ गई
इस जुर्माने के बाद यूरोप और अमेरिका के बीच सोशल मीडिया को नियंत्रित करने को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है। कुछ अमेरिकी अधिकारियों ने इस फैसले की निंदा करते हुए कहा है कि यह इंटरनेट पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाने की एक कोशिश है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल एक्स ने इस जुर्माने के खिलाफ कोर्ट में अपील कर दी है। लेकिन जब तक मामले की सुनवाई चलेगी, तब तक कंपनी को या तो जुर्माने की रकम जमा करनी होगी या इसकी गारंटी देनी होगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि एक्स अपनी वेरिफिकेशन नीतियों में क्या बदलाव लाता है और यूरोपीय संघ उसे कितनी छूट देता है।