एलन मस्क बनाम OpenAI: धोखाधड़ी के आरोप हटे, मगर 134 अरब डॉलर की मांग बरकरार

एलन मस्क और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी OpenAI के बीच चल रहे कानूनी संघर्ष में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मस्क ने OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन और सह-संस्थापक ग्रेग ब्रॉकमैन पर लगाए गए धोखाधड़ी के आरोपों को वापस ले लिया है। यह कदम अमेरिकी अदालत में होने वाले एक महत्वपूर्ण मुकदमे से ठीक पहले उठाया गया है, जिससे यह हाई-प्रोफाइल मामला अब काफी संक्षिप्त हो गया है।

नवंबर 2024 में मस्क ने कुल 26 आरोप लगाए थे, लेकिन अब अदालत में केवल दो मुख्य दावों पर सुनवाई होगी। पहला दावा ‘अनजस्ट एनरिचमेंट’ यानी गलत तरीके से मुनाफा कमाने से संबंधित है, जबकि दूसरा दावा ‘चैरिटेबल ट्रस्ट का उल्लंघन’ यानी गैर-लाभकारी नियमों को तोड़ने से जुड़ा है। अमेरिकी ट्रायल कोर्ट ने मस्क की इस अपील को स्वीकार कर लिया है, और अब कैलिफोर्निया के ओकलैंड में जूरी चुनने की प्रक्रिया शुरू होगी।

मस्क के मुख्य आरोप क्या हैं?

इस पूरे विवाद की जड़ एलन मस्क का यह मानना है कि OpenAI अपने मूल उद्देश्य से पूरी तरह भटक गया है। साल 2015 में जब इस संस्था की स्थापना हुई थी, तब इसे एक गैर-लाभकारी संगठन के रूप में बनाया गया था। इसका एकमात्र लक्ष्य मानवता की भलाई के लिए सुरक्षित एआई विकसित करना था।

मस्क का तर्क है कि जब OpenAI ने अपनी दिशा बदलते हुए खुद को ‘कैप्ड-प्रॉफिट’ मॉडल में ढाला और माइक्रोसॉफ्ट से अरबों डॉलर का निवेश लिया, तो उसने अपने मूल विजन को छोड़कर सार्वजनिक हित के बजाय व्यावसायिक मुनाफे को प्राथमिकता दे दी। यही कारण है कि धोखाधड़ी के आरोप वापस लेने के बाद भी मस्क हार मानने को तैयार नहीं हैं।

वे अब भी 134 अरब डॉलर के भारी-भरकम हर्जाने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, यह पैसा वे खुद नहीं रखना चाहते, बल्कि उनका प्रस्ताव है कि यह राशि OpenAI की चैरिटी विंग को दी जाए। मस्क का असली मकसद कंपनी को फिर से उसके पुराने गैर-लाभकारी स्वरूप में वापस लाना और सैम ऑल्टमैन व ग्रेग ब्रॉकमैन को उनके नेतृत्व पदों से हटाकर संगठन में बुनियादी बदलाव करना है।

OpenAI का क्या कहना है?

दूसरी ओर, OpenAI के साथ-साथ सैम ऑल्टमैन, ग्रेग ब्रॉकमैन और माइक्रोसॉफ्ट ने मस्क द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। कंपनी ने मस्क की इस कानूनी लड़ाई को एक ‘सोची-समझी साजिश’ करार देते हुए कहा है कि ये दावे पूरी तरह बेबुनियाद हैं।

OpenAI के वकीलों का तर्क है कि इस मुकदमे के पीछे मस्क का असली इरादा जनहित नहीं, बल्कि व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा है। उनके अनुसार, मस्क ने साल 2023 में अपनी खुद की एआई कंपनी ‘xAI’ शुरू की है और अब वे इस कानूनी विवाद के जरिए अपनी प्रतिद्वंद्वी कंपनी को नुकसान पहुंचाकर अपने बिजनेस को फायदा पहुंचाना चाहते हैं।

कैसे शुरू हुआ था यह पूरा विवाद?

इस पूरे विवाद की शुरुआत को समझने के लिए थोड़ा पीछे जाना जरूरी है। दरअसल, OpenAI का गठन ही इसलिए हुआ था ताकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ताकत सिर्फ कुछ बड़ी टेक कंपनियों के हाथों में सिमट कर न रह जाए। शुरुआती दिनों में कंपनी का पूरा जोर ‘ओपन रिसर्च’ और समाज की भलाई पर था।

लेकिन, जैसे-जैसे एआई तकनीक आगे बढ़ी, यह साफ हो गया कि एडवांस एआई मॉडल बनाने के लिए बहुत बड़े निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत है। पैसों की इसी भारी किल्लत ने OpenAI को अपना रास्ता बदलने पर मजबूर कर दिया। बड़े निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कंपनी ने अपने पुराने गैर-लाभकारी ढांचे को छोड़कर एक ‘कैप्ड-प्रॉफिट’ मॉडल अपनाया।

इस कहानी में असली मोड़ नवंबर 2022 में आया, जब कंपनी ने चैटजीपीटी लॉन्च किया। इसकी बेमिसाल कामयाबी ने रातों-रात OpenAI को दुनिया के एआई मैप पर सबसे बड़े खिलाड़ी के रूप में खड़ा कर दिया। इसी लोकप्रियता को देखते हुए माइक्रोसॉफ्ट ने कंपनी में करीब 1 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश किया। इसने एलन मस्क और OpenAI के बीच वैचारिक मतभेद को एक कानूनी जंग में बदल दिया।

अदालत में कैसे चलेगा ट्रायल?

अदालत में इस मामले की सुनवाई दो अलग-अलग चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण के दौरान, जूरी के सदस्य मस्क द्वारा बचाए गए दोनों दावों की गहराई से जांच करेंगे और अपना एक सलाहकारी फैसला सुनाएंगे। हालांकि, जूरी का यह फैसला जज के लिए मानना अनिवार्य नहीं होगा, लेकिन यह केस की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाएगा।

इसके बाद मामला दूसरे चरण में पहुंचेगा, जहां मुख्य जज यह अंतिम निर्णय लेंगे कि क्या OpenAI पर कोई आर्थिक जुर्माना लगाया जाना चाहिए या फिर मस्क की मांग के अनुसार कंपनी के मौजूदा ढांचे में कोई बड़ा बदलाव करने की जरूरत है।

टेक इंडस्ट्री के लिए क्यों अहम है यह केस?

यह केस एआई इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी मिसाल बन सकता है। इससे यह तय होगा कि भविष्य में एआई कंपनियां अपने गैर-लाभकारी विजन और बड़े पैमाने पर बिजनेस के बीच कैसे तालमेल बिठाती हैं। अगर मस्क इस मामले में जीत हासिल करते हैं, तो यह पूरी एआई इंडस्ट्री के लिए एक नया मानक स्थापित कर सकता है। वहीं, अगर OpenAI इस मुकदमे से बरी होता है, तो यह कंपनियों को अपने मुनाफे के मॉडल को बदलने की छूट देगा।

फिलहाल, दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलों पर अड़े हुए हैं, और इस केस का नतीजा न केवल OpenAI बल्कि पूरी टेक दुनिया के भविष्य को प्रभावित कर सकता है।