ईद-उल-फितर: वैश्विक तनाव के बीच नसीरुद्दीन चिश्ती का संदेश- संवाद और भाईचारा ही समाधान

अजमेर में ईद-उल-फितर के पावन अवसर पर हजरत सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने ईदगाह में मीडिया से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विश्व एक अत्यंत नाजुक और निर्णायक दौर से गुजर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जहां एक ओर शांति, संवाद और सहयोग की बातें हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर हथियारों की होड़ मानवता के भविष्य के लिए गंभीर चिंता पैदा कर रही है।

अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और वैश्विक संतुलन पर टिप्पणी

नसीरुद्दीन चिश्ती ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की प्रभावशीलता आज सवालों के घेरे में है। उनके अनुसार, यदि शक्तिशाली देश स्वयं को वैश्विक निर्णयकर्ता या तानाशाह मानने लगें, तो यह अंतरराष्ट्रीय संतुलन, न्याय और समानता के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। उन्होंने सभी देशों की संप्रभुता और गरिमा के सम्मान पर विशेष बल दिया।

भारत की भूमिका और कूटनीति पर विचार

उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा शांति, सह-अस्तित्व और संवाद का मार्ग दिखाया है। उनके मुताबिक, भारत सरकार वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में युद्ध के बजाय कूटनीति और संवाद के माध्यम से समाधान खोजने का प्रयास कर रही है।

वैश्विक तनाव के बीच कूटनीतिक उदाहरण

नसीरुद्दीन चिश्ती ने कहा कि मौजूदा वैश्विक तनाव के बीच भारत सरकार ने परिपक्व कूटनीति का परिचय दिया है। उन्होंने ईरान के साथ संवाद के जरिए होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय ऑयल और गैस टैंकरों को सुरक्षित निकालने का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि कई टैंकर भारत पहुंच चुके हैं और शेष सुरक्षित मार्ग पर हैं, जो प्रभावी कूटनीति का स्पष्ट उदाहरण है।

भारत की सामाजिक एकता पर जोर

उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में जहां कई देश संघर्षों से जूझ रहे हैं, वहीं भारत में विविधता के बावजूद लोग शांति और सौहार्द के साथ जीवन जी रहे हैं। यहां विभिन्न धर्मों के लोग अपने-अपने पर्व मिल-जुलकर मनाते हैं, जो देश की सांस्कृतिक एकता और सामाजिक समरसता का प्रतीक है।

शांति को सच्चा नेतृत्व बताया

अपने संदेश के अंत में नसीरुद्दीन चिश्ती ने कहा कि शक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि शांति का संरक्षण ही सच्चे नेतृत्व की पहचान है। उन्होंने कहा कि मानवता का भविष्य युद्ध में नहीं, बल्कि संवाद, सहयोग और आपसी विश्वास में सुरक्षित है।