बकरीद 2026: भारत और सऊदी अरब में कब मनाई जाएगी ईद-उल-अज़हा?

ईद-उल-अज़हा, जिसे बकरीद के नाम से भी जाना जाता है, इस्लाम धर्म के सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह पर्व दुनिया भर के मुसलमानों द्वारा भाईचारे, खुशी और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस्लामी चंद्र कैलेंडर के अनुसार, यह त्योहार जुल हिज्जा महीने में आता है, जो इस्लामी वर्ष का अंतिम महीना है। इसी महीने में पवित्र हज यात्रा भी संपन्न होती है, जहां लाखों श्रद्धालु मक्का जाते हैं। जुल हिज्जा महीने की शुरुआत चांद दिखने के साथ होती है, और इसके बाद पूरे मुस्लिम समुदाय में त्योहार की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। आइए जानते हैं कि भारत और सऊदी अरब में बकरीद 2026 किस दिन मनाई जाएगी।

सऊदी अरब में कब मनाई जाएगी बकरीद?

सऊदी अरब की सुप्रीम कोर्ट ने ईद-उल-अज़हा 2026 की तारीख की पुष्टि कर दी है। इसके अलावा, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कतर, जॉर्डन, भारत और पाकिस्तान सहित कई देशों की चांद दर्शन समितियों ने भी अपने-अपने देशों में इस पर्व की तारीखों की घोषणा कर दी है। सऊदी कोर्ट द्वारा जारी बयान के अनुसार, वर्ष 2026 में ईद-उल-अज़हा बुधवार, 27 मई को मनाई जाएगी।

किन देशों में 27 मई को मनाई जाएगी बकरीद?

कई देशों में बकरीद का त्योहार बुधवार, 27 मई 2026 को मनाया जाएगा। इन देशों की सूची इस प्रकार है:

  • सऊदी अरब
  • ओमान
  • संयुक्त अरब अमीरात (यूएई)
  • कुवैत
  • कतर
  • इंडोनेशिया
  • मलेशिया
  • पाकिस्तान
  • ट्यूनीशिया
  • तुर्की
  • जॉर्डन
  • अफगानिस्तान
  • अमेरिका
  • कनाडा
  • सिंगापुर
  • न्यूजीलैंड
  • ऑस्ट्रेलिया
  • फ्रांस
  • जर्मनी
  • यूनाइटेड किंगडम

भारत में कब मनाई जाएगी बकरीद?

भारत, ब्रुनेई और बांग्लादेश में ईद-उल-अज़हा गुरुवार, 28 मई 2026 को मनाई जाएगी। चांद दिखने की तारीख में अंतर के कारण भारत में यह त्योहार सऊदी अरब और अन्य देशों की तुलना में एक दिन बाद मनाया जाता है।

बकरीद का महत्व

ईद-उल-अज़हा, जिसे बकरीद कहा जाता है, इस्लाम धर्म का एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहार है। इसे दुनिया भर के मुसलमान बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाते हैं। यह पर्व हजरत इब्राहिम की उस महान कुर्बानी की याद दिलाता है, जिसमें उन्होंने अल्लाह के आदेश का पालन करते हुए अपने बेटे की कुर्बानी देने का संकल्प लिया था। इस्लामी मान्यता के अनुसार, जब हजरत इब्राहिम ने अल्लाह के आदेश को स्वीकार किया, तो उनकी निष्ठा और आस्था को देखकर अल्लाह ने उनके बेटे की जगह एक जानवर को कुर्बानी के लिए भेज दिया। इसी घटना की याद में मुसलमान हर साल यह पर्व मनाते हैं और अल्लाह के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हैं। इस दिन लोग नमाज अदा करते हैं, कुर्बानी करते हैं और दान-पुण्य के कार्यों में हिस्सा लेते हैं।