मिजो भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की कोशिशें तेज
मिजोरम सरकार मिजो भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करवाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इस दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने हाल ही में मिजो भाषा विकास बोर्ड (MLDB) के आठवीं अनुसूची अध्ययन समूह की बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक गुरुवार को आयोजित की गई, जिसमें समूह द्वारा अब तक किए गए कार्यों और भविष्य की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा हुई।
अध्ययन समूह की रिपोर्ट लगभग तैयार
राज्य के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की ओर से जारी बयान के अनुसार, अध्ययन समूह ने मुख्यमंत्री को बताया कि उनकी रिपोर्ट लगभग पूरी हो चुकी है और इसे जल्द ही सरकार को सौंप दिया जाएगा। समूह ने राज्य भर में विभिन्न संगठनों और जातीय समुदायों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर मिजो भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने के संबंध में उनकी राय जुटाई है। इस दौरान यह स्पष्ट हुआ कि इस प्रस्ताव को लेकर व्यापक सहमति और समर्थन मौजूद है।
पुराने प्रस्ताव को नए सिरे से पेश करने की सिफारिश
बैठक में यह भी बताया गया कि मिजोरम सरकार ने अतीत में केंद्र को मिजो भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। इस मुद्दे को हल करने के लिए अध्ययन समूह ने सिफारिश की है कि प्रस्ताव को और अधिक व्यापक रूप से पुनः प्रस्तुत किया जाए। साथ ही, इस मामले को सक्रियता से आगे बढ़ाने के लिए एक विशेष कार्य समूह गठित करने का सुझाव दिया गया है।
मिजो भाषा की वर्तमान स्थिति और मान्यता
अध्ययन समूह ने मुख्यमंत्री को मिजो भाषा की मौजूदा स्थिति से भी अवगत कराया। मिजो को 1974 में मिजोरम की आधिकारिक भाषा घोषित किया गया था। यह न केवल राज्य में बल्कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले ज़ो जातीय समुदायों के बीच संपर्क भाषा के रूप में काम करती है। उल्लेखनीय है कि साहित्य अकादमी पहले ही मिजो को एक क्षेत्रीय भाषा के रूप में मान्यता दे चुकी है, और इस भाषा में पीएचडी स्तर तक अध्ययन संभव है।
मुख्यमंत्री ने सराहे प्रयास
मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने एमएलडीबी और अध्ययन समूह द्वारा कम समय में हासिल की गई प्रगति की सराहना की। उन्होंने समूह के समर्पित प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि प्रस्तुत सिफारिशें और प्रस्ताव बेहद विचारपूर्ण हैं। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि इन सिफारिशों पर उचित रूप से अमल किया जाएगा।
मिजो भाषा बोलने वालों का विस्तार
अधिकारियों के अनुसार, 2011 की जनगणना के आंकड़े बताते हैं कि मिजो भाषा बोलने वाले लोग भारत के 26 राज्यों और 7 केंद्र शासित प्रदेशों में फैले हुए हैं। अब यह माना जा रहा है कि मिजो जातीय समूह के लोग सभी राज्यों में मौजूद हैं। 2011 की जनगणना में मिजोरम में मिजो भाषा बोलने वालों की संख्या 8.3 लाख से अधिक दर्ज की गई थी, जिसमें अब काफी वृद्धि होने की संभावना है।
वैश्विक पहचान और डिजिटल उपस्थिति
कुछ विद्वानों के अनुमान के अनुसार, विश्व स्तर पर मिजो भाषा बोलने वालों की कुल संख्या अब 22 लाख से अधिक हो गई है। डिजिटल दुनिया में भी मिजो भाषा ने अपनी पहचान बनाई है। गूगल ने मई 2022 में गूगल ट्रांसलेटर में मिजो भाषा को शामिल किया, जिससे इस भाषा की वैश्विक पहुंच बढ़ी है।
भाषाई वर्गीकरण और चुनौतियां
भारत के जनभाषाई सर्वेक्षण ने मिजो को एक ‘विकासशील भाषा’ के रूप में वर्गीकृत किया है। वहीं, यूनेस्को ने इसे विश्व की भाषाओं में ‘कमजोर’ श्रेणी में रखा है। यह वर्गीकरण बताता है कि मिजो भाषा को संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता है। आठवीं अनुसूची में शामिल होने से मिजो भाषा को संवैधानिक मान्यता मिलेगी, जिससे इसके विकास और संरक्षण को नई दिशा मिल सकती है।
- बोर्ड की भूमिका: मिजो भाषा विकास बोर्ड (MLDB) इस पूरी प्रक्रिया का नेतृत्व कर रहा है और अध्ययन समूह की रिपोर्ट सरकार को सौंपने के बाद आगे की कार्रवाई तेज होगी।
- व्यापक समर्थन: राज्य के विभिन्न संगठनों और समुदायों के बीच मिजो भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए एकमत देखा गया है।
- भविष्य की योजना: सरकार जल्द ही एक कार्य समूह का गठन करेगी जो केंद्र सरकार के समक्ष इस प्रस्ताव को मजबूती से रखेगा।