नीट यूजी पुनर्परीक्षा 2026: शिक्षा मंत्री ने सुरक्षा इंतजामों की ली समीक्षा, सख्त दिशा-निर्देश जारी
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को नीट यूजी 2026 की पुनर्परीक्षा से जुड़ी तैयारियों की गहन समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि परीक्षा का आयोजन पूरी तरह सुरक्षित, पारदर्शी और त्रुटिहीन तरीके से होना चाहिए। अधिकारियों के अनुसार, मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
समीक्षा बैठक में धर्मेंद्र प्रधान ने पिछली परीक्षा के दौरान सामने आई कमियों को पूरी तरह दूर करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि परीक्षा की विश्वसनीयता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जाने चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि किसी भी स्तर पर अनियमितता की गुंजाइश न रहे।
परीक्षा केंद्रों पर सख्त निगरानी के निर्देश
अधिकारियों ने बताया कि शिक्षा मंत्री ने राज्यों के जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षकों के साथ समन्वय बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य परीक्षा केंद्रों पर निगरानी को मजबूत करना और सभी व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना है। मंत्री ने कहा कि हर केंद्र पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए और किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए पहले से योजना बनाई जानी चाहिए।
छात्रों की सुविधाओं पर भी ध्यान
धर्मेंद्र प्रधान ने न केवल सुरक्षा बल्कि छात्रों की सुविधाओं पर भी जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि परीक्षा केंद्रों पर परिवहन, पीने के पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि छात्रों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए।
गौरतलब है कि 3 मई को आयोजित नीट यूजी परीक्षा को अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा रद्द कर दिया गया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने पुनर्परीक्षा कराने का निर्णय लिया। शिक्षा मंत्री पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि नीट यूजी की पुनर्परीक्षा 21 जून को आयोजित की जाएगी।
इसके साथ ही, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए अगले वर्ष से मेडिकल प्रवेश परीक्षा को कंप्यूटर आधारित (सीबीटी) मोड में आयोजित किया जाएगा। इससे परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और किसी भी तरह की धांधली की संभावना कम हो जाएगी।