इबोला का नया खतरा: बुंडिबुग्यो स्ट्रेन ने मचाई चिंता, WHO ने घोषित किया वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल
दुनिया भर में संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बना हुआ है। कोविड-19 महामारी के बाद अब एक बार फिर इबोला वायरस ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और युगांडा में इबोला के मामलों में तेजी देखी गई है, जिसके बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया है। इस बार चिंता का कारण वायरस का एक नया स्ट्रेन ‘बुंडिबुग्यो’ है, जो पहले के मुकाबले अधिक घातक साबित हो सकता है।
इबोला का नया स्ट्रेन: बुंडिबुग्यो कितना खतरनाक?
इबोला वायरस के कई प्रकार होते हैं, लेकिन बुंडिबुग्यो स्ट्रेन को सबसे खतरनाक माना जा रहा है। इस स्ट्रेन के कारण पहले भी साल 2007 और 2012 में प्रकोप फैल चुका है, जिसमें लगभग 30 प्रतिशत संक्रमित लोगों की जान चली गई थी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह वायरस संक्रमित व्यक्तियों में से एक-तिहाई लोगों की मौत का कारण बन सकता है। इसलिए इसे हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है।
बुंडिबुग्यो स्ट्रेन की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके लिए अभी तक कोई प्रभावी टीका या दवा उपलब्ध नहीं है। हालांकि कुछ प्रायोगिक टीकों पर शोध चल रहा है, लेकिन अभी तक कोई निश्चित इलाज सामने नहीं आया है। यही कारण है कि स्वास्थ्य संगठन इस प्रकोप को रोकने के लिए बचाव के उपायों पर जोर दे रहे हैं।
WHO ने क्यों घोषित किया आपातकाल?
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने रविवार 17 मई को इबोला के प्रकोप को ‘अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ घोषित किया। इसका मतलब यह नहीं है कि दुनिया किसी नई महामारी के कगार पर खड़ी है, बल्कि यह संकेत है कि स्थिति इतनी गंभीर है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कांगो और युगांडा के आसपास के देशों जैसे दक्षिण सूडान और रवांडा में इस वायरस के फैलने का खतरा बहुत अधिक है। इन देशों के बीच व्यापार और यात्रा के गहरे संबंध हैं, जिससे संक्रमण तेजी से फैल सकता है। इसलिए WHO ने इन देशों की सरकारों को अलर्ट जारी किया है और आवश्यक कदम उठाने की सलाह दी है।
इबोला के लक्षण: फ्लू से शुरू होकर गंभीर स्थिति तक
इबोला वायरस के लक्षण शुरुआत में सामान्य फ्लू जैसे दिखाई देते हैं, जिससे इसे पहचानना मुश्किल हो जाता है। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने के 2 से 21 दिनों के बीच लक्षण उभरने लगते हैं। शुरुआती लक्षणों में शामिल हैं:
- तेज बुखार
- सिरदर्द
- थकान और कमजोरी
- मांसपेशियों में दर्द
जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, मरीज में गंभीर लक्षण विकसित होने लगते हैं। इनमें उल्टी, दस्त, और शरीर के अंगों के काम करना बंद कर देना शामिल है। कुछ मामलों में शरीर के अंदर और बाहर से रक्तस्राव भी देखा गया है। हालांकि WHO के अनुसार, हर मरीज में रक्तस्राव के लक्षण दिखना जरूरी नहीं है, लेकिन गंभीर स्थिति में यह जानलेवा हो सकता है।
इबोला लीवर और किडनी को भी प्रभावित कर सकता है, जिससे मल्टी-ऑर्गन फेलियर का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए शुरुआती पहचान और तुरंत इलाज मरीज की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इबोला कैसे फैलता है?
इबोला वायरस मुख्य रूप से जानवरों, विशेषकर चमगादड़ों से इंसानों में फैलता है। जब कोई व्यक्ति संक्रमित जानवर के सीधे संपर्क में आता है, तो वायरस उसमें प्रवेश कर सकता है। इसके बाद, संक्रमित व्यक्ति से दूसरे इंसानों में वायरस फैलने का खतरा बढ़ जाता है। संक्रमण फैलने के मुख्य मार्ग हैं:
- संक्रमित व्यक्ति के रक्त, उल्टी, लार, पसीने, वीर्य या अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के सीधे संपर्क में आना
- संक्रमित व्यक्ति के इस्तेमाल किए गए कपड़े, बिस्तर या चिकित्सा उपकरणों के संपर्क में आना
- संक्रमित व्यक्ति के शव को छूना या उसके संस्कारों में भाग लेना
इसलिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ संक्रमित व्यक्ति को तुरंत आइसोलेट करने और उसके संपर्क में आने वाली सभी चीजों को कीटाणुरहित करने की सलाह देते हैं।
बचाव के उपाय: टीका नहीं, सावधानी है सबसे बड़ा हथियार
चूंकि बुंडिबुग्यो स्ट्रेन के लिए अभी तक कोई टीका उपलब्ध नहीं है, इसलिए बचाव ही सबसे प्रभावी उपाय है। WHO और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां बताई हैं जिनका पालन करके संक्रमण के खतरे को कम किया जा सकता है:
- प्रभावित क्षेत्रों की यात्रा से बचें। यदि यात्रा करना आवश्यक हो, तो पूरी सावधानी बरतें।
- संक्रमित व्यक्ति या उसके शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क में आने से बचें।
- नियमित रूप से हाथ धोएं और साफ-सफाई का ध्यान रखें।
- यदि किसी व्यक्ति ने प्रभावित क्षेत्र की यात्रा की हो और उसमें बुखार, कमजोरी या अन्य लक्षण दिखें, तो तुरंत चिकित्सा जांच कराएं।
- संक्रमित व्यक्ति को तुरंत आइसोलेट करें और उसके संपर्क में आने वाली सभी वस्तुओं को कीटाणुरहित करें।
हालांकि इबोला वायरस बीमारी को रोकने के लिए दो टीके उपलब्ध हैं, लेकिन ये वर्तमान बुंडिबुग्यो स्ट्रेन के लिए प्रभावी नहीं हैं। इसलिए फिलहाल सावधानी और जागरूकता ही इस बीमारी से बचने का सबसे अच्छा तरीका है।
क्या पूरी दुनिया को खतरा है?
विशेषज्ञों का मानना है कि इबोला से पूरी दुनिया को होने वाला खतरा फिलहाल बहुत कम है। यह प्रकोप मुख्य रूप से कांगो और युगांडा तक सीमित है, और आसपास के देशों में इसके फैलने का खतरा अधिक है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय यात्रा और व्यापार के कारण वायरस के अन्य देशों में पहुंचने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
WHO ने सभी देशों को सतर्क रहने और संक्रमण की निगरानी बढ़ाने की सलाह दी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते उचित कदम उठाए जाएं, तो इस प्रकोप को नियंत्रित किया जा सकता है और इसे महामारी में बदलने से रोका जा सकता है।
फिलहाल, सबसे जरूरी है कि लोग जागरूक रहें और बचाव के उपायों का पालन करें। संक्रमण के लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें और दूसरों को भी सुरक्षित रखने में मदद करें।