डीयू एसओएल: छात्रों के लिए डिजिटल शिकायत पोर्टल की शुरुआत, कैंपस के चक्कर होंगे खत्म

दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (एसओएल) में पढ़ने वाले छात्रों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। अब उन्हें फीस, परीक्षा, दाखिले या किसी अन्य समस्या के लिए बार-बार कैंपस नहीं जाना पड़ेगा। विश्वविद्यालय ने एक नई डिजिटल व्यवस्था शुरू की है, जिसके तहत सभी समस्याओं का समाधान ऑनलाइन ही हो सकेगा। इस पहल का उद्देश्य छात्रों के समय और ऊर्जा की बचत करना है।

क्या है नई डिजिटल व्यवस्था?

एसओएल ने पहली बार एक विशेष शिकायत निवारण पोर्टल लॉन्च किया है, जिसे ‘कोल ग्राम’ (कैंपस ऑफ ओपन लर्निंग ग्रीवांस पोर्टल) नाम दिया गया है। यह पोर्टल छात्रों को अपनी समस्याओं को श्रेणीबद्ध तरीके से दर्ज करने की सुविधा देता है। छात्र अपनी शिकायत की प्रकृति के अनुसार सही श्रेणी चुनकर आवेदन कर सकते हैं और बाद में उसकी स्थिति भी देख सकते हैं।

पोर्टल की मुख्य विशेषताएं

  • श्रेणीबद्ध शिकायतें: पोर्टल में परीक्षा, फीस, दाखिला, पाठ्य सामग्री और लर्निंग मैनेजमेंट जैसी विभिन्न श्रेणियां बनाई गई हैं। छात्र अपनी समस्या के अनुरूप श्रेणी का चयन कर सकते हैं।
  • ऑटोमैटिक टिकट सिस्टम: शिकायत दर्ज करते ही छात्रों को एक ऑटोमैटिक टिकट आवंटित हो जाएगा। यह शिकायत सीधे संबंधित अधिकारी के पास पहुंच जाएगी।
  • समय सीमा: हर शिकायत के समाधान के लिए एक निश्चित समय सीमा तय की गई है, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।
  • स्थिति की जानकारी: छात्र ऑनलाइन यह देख सकेंगे कि उनकी शिकायत लंबित है या उसका समाधान हो चुका है। इससे उन्हें बार-बार कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

लॉन्चिंग और उद्देश्य

इस पोर्टल को हाल ही में विज्ञान भवन में आयोजित एसओएल की अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में लॉन्च किया गया। कैंपस ऑफ ओपन लर्निंग की निदेशक प्रो. पायल मागो ने बताया कि इस पोर्टल को पूरी तरह से छात्र-अनुकूल बनाया गया है। उन्होंने कहा कि एसओएल में तीन लाख से अधिक छात्र पढ़ते हैं, और पहले उन्हें छोटी-छोटी समस्याओं के लिए भी कैंपस आना पड़ता था। नई प्रणाली से न केवल छात्रों का समय बचेगा, बल्कि शिकायत निवारण की प्रक्रिया में पारदर्शिता भी आएगी।

कैसे काम करेगा पोर्टल?

प्रो. मागो ने बताया कि छात्रों को पोर्टल पर अपनी शिकायत की श्रेणी चुननी होगी। शिकायत दर्ज करने के बाद उन्हें एक टिकट नंबर मिलेगा, जिसके जरिए वे अपनी समस्या की प्रगति को ट्रैक कर सकते हैं। यह सिस्टम पूरी तरह से ऑटोमेटेड है, जिससे शिकायत सही विभाग तक पहुंचेगी और समाधान में तेजी आएगी। इस डिजिटल पहल से उम्मीद है कि छात्रों को कैंपस के चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी और उनकी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी।