दिल्ली विश्वविद्यालय में भाषा पाठ्यक्रमों का नया स्वरूप: कम नामांकन वाले कोर्स होंगे मर्ज

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) स्नातक स्तर पर भाषा पाठ्यक्रमों की संरचना में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन भाषा पाठ्यक्रमों को पुनर्गठित करने का निर्णय लिया है, जिनमें पिछले कुछ वर्षों से छात्रों का नामांकन लगातार कम हो रहा है। इस कदम का उद्देश्य उर्दू, अरबी, फारसी, बंगाली और तेलुगु जैसी भाषाओं को अधिक लोकप्रिय विषयों के साथ जोड़कर नए बीए प्रोग्राम कॉम्बिनेशन तैयार करना है।

विश्वविद्यालय के अनुसार, यह बदलाव पूरी तरह से डेटा-आधारित है। पिछले कुछ वर्षों के प्रवेश रुझानों के विश्लेषण के बाद ही यह निर्णय लिया गया है। डीयू के शैक्षणिक अधिकारियों का मानना है कि कम मांग वाले विषयों को लोकप्रिय विषयों के साथ जोड़ने से इन पाठ्यक्रमों में छात्रों की रुचि बढ़ेगी और सीटें खाली नहीं रहेंगी।

क्यों जरूरी है यह बदलाव?

दिल्ली विश्वविद्यालय के 67 कॉलेजों में वर्तमान में 73 स्नातक प्रोग्राम और 100 से अधिक बीए प्रोग्राम कॉम्बिनेशन संचालित होते हैं। इनमें से कई भाषा पाठ्यक्रमों में छात्रों की संख्या बेहद कम है। इस समस्या को हल करने के लिए विश्वविद्यालय ने एक विशेष समिति का गठन किया था। समिति ने अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया है कि कॉलेज अपने मौजूदा विषय संयोजनों की समीक्षा करें और कम लोकप्रिय भाषाओं को उन विषयों से जोड़ें, जिनमें छात्रों की अधिक मांग है।

प्रस्तावित योजना के तहत, उर्दू, अरबी और फारसी जैसी भाषाओं को अन्य डोमेन-विशिष्ट विषयों के साथ मिलाकर नए बीए प्रोग्राम तैयार किए जाएंगे। इससे न केवल इन भाषाओं का अस्तित्व बना रहेगा, बल्कि छात्रों को भी व्यापक शैक्षणिक विकल्प मिलेंगे।

प्रवेश प्रक्रिया का दूसरा चरण

डीयू ने स्पष्ट किया है कि संशोधित प्रोग्राम कॉम्बिनेशन की आधिकारिक घोषणा कॉमन सीट एलोकेशन सिस्टम (CSAS-UG) के दूसरे चरण की शुरुआत के साथ ही कर दी जाएगी। फिलहाल, स्नातक प्रवेश का पहला चरण जारी है, जिसमें छात्र CSAS पोर्टल पर पंजीकरण करा रहे हैं।

दूसरे चरण में छात्रों को निम्नलिखित प्रक्रियाओं से गुजरना होगा:

  • सबसे पहले, उम्मीदवारों को अपने पसंदीदा कोर्स और कॉलेजों की प्राथमिकताएं भरनी होंगी।
  • इसके बाद, छात्रों को अपने CUET-UG विषयों को 12वीं कक्षा में पढ़े गए विषयों से मैप करना होगा।
  • विश्वविद्यालय केवल उन्हीं भाषा और डोमेन-विशिष्ट CUET पेपर को मान्यता देगा, जो 12वीं के विषयों से संबंधित हों।
  • विषय मैपिंग के आधार पर ही यह तय होगा कि उम्मीदवार किन प्रोग्रामों के लिए पात्र हैं।
  • पात्रता सुनिश्चित होने के बाद ही छात्र कोर्स और कॉलेज की पसंद भर सकेंगे।

डेटा-आधारित निर्णय

डीयू के प्रवेश डीन के अनुसार, यह फैसला पिछले कई वर्षों के प्रवेश डेटा और रुझानों के गहन विश्लेषण के बाद लिया गया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने देखा है कि कुछ भाषा पाठ्यक्रमों में छात्रों की संख्या लगातार घट रही है, जिससे संसाधनों का कुशल उपयोग नहीं हो पा रहा है। नए कॉम्बिनेशन से न केवल इन पाठ्यक्रमों को बचाया जा सकेगा, बल्कि छात्रों को अधिक रोजगारोन्मुखी विकल्प भी मिलेंगे।

विश्वविद्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि CSAS-UG के दूसरे चरण का पूरा शेड्यूल जल्द ही जारी कर दिया जाएगा। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक पोर्टल पर नियमित रूप से अपडेट देखते रहें।