राष्ट्रपति मुर्मू का संदेश: प्रशासनिक विलंब जनता के अधिकारों पर भारी
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हाल ही में 2024 बैच के प्रशिक्षु आईएएस अधिकारियों को संबोधित करते हुए एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक फैसलों को टालना या उनमें देरी करना किसी भी स्थिति में नैतिक आचरण नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार, ऐसी देरी सीधे तौर पर आम नागरिकों को उनके वैध अधिकारों से वंचित करने के समान है।
नैतिकता और सुशासन का अटूट संबंध
राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति मुर्मू ने अधिकारियों को समझाया कि नैतिकता और सुशासन एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। केवल ईमानदार होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अधिकारियों को अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए ठोस परिणाम देने की भी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग जनता के कल्याण के लिए ही किया जाना चाहिए।
समय पर निर्णय ही सच्ची सेवा
राष्ट्रपति ने कहा कि सही समय पर और जनहित में निर्णय लेना ही वास्तविक नैतिकता है। उन्होंने न्याय प्रणाली का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार न्याय में देरी को न्याय से वंचित करना माना जाता है, उसी प्रकार प्रशासनिक फैसलों में देरी भी लोगों के मौलिक अधिकारों को प्रभावित करती है। यह एक गंभीर मुद्दा है जिस पर हर अधिकारी को ध्यान देना चाहिए।
औपनिवेशिक सोच से मुक्ति की आवश्यकता
अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने सरदार वल्लभभाई पटेल का स्मरण किया और कहा कि आज भी हमारी प्रशासनिक व्यवस्था में पुरानी औपनिवेशिक सोच और कार्यशैली के कुछ अवशेष बचे हुए हैं। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे इन अवशेषों को समाप्त करने का प्रयास करें। एक सच्चे सिविल सेवक की पहचान यह है कि वह आम लोगों को अपना समझकर काम करे और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुने।
बदलाव के लिए साहस आवश्यक
राष्ट्रपति ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था के साथ बहते रहना बहुत आसान है, लेकिन एक प्रभावी अधिकारी वही है जो जरूरत पड़ने पर बदलाव लाने का साहस दिखाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कई बार परिस्थितियों के विपरीत जाकर भी काम करना पड़ेगा। यह साहस और समर्पण ही एक अधिकारी को दूसरों से अलग करता है।
निष्पक्षता और संवेदनशीलता बनाए रखने की सलाह
अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति मुर्मू ने अधिकारियों को निष्पक्षता, पारदर्शिता और संवेदनशीलता बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि नियमों का पालन करना जरूरी है, लेकिन साथ ही व्यापक जनहित को भी ध्यान में रखना चाहिए। देश तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में आईएएस अधिकारियों से अपेक्षाएं भी बढ़ गई हैं। उन्हें तेजी से सीखने, बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने और विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम करने की क्षमता विकसित करनी होगी। यही विकसित भारत के निर्माण में उनका योगदान होगा।