ट्रंप के चीन दौरे से पहले अमेरिका का गंभीर आरोप: एआई डिस्टिलिंग के जरिए तकनीकी चोरी का मामला

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीजिंग प्रवास से कुछ सप्ताह पहले, वाशिंगटन ने बीजिंग पर एक बड़ा आरोप लगाया है। व्हाइट हाउस के अनुसार, चीन व्यापक पैमाने पर ‘एआई डिस्टिलिंग’ नामक प्रक्रिया के माध्यम से अमेरिकी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) प्रौद्योगिकी की चोरी कर रहा है। यह मुद्दा दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तकनीकी प्रतिद्वंद्विता को और गहरा कर सकता है।

क्या है ‘एआई डिस्टिलिंग’ प्रक्रिया?

सरल भाषा में समझें तो एआई डिस्टिलेशन एक ऐसी तकनीक है जिसमें एक छोटा और सीमित एआई मॉडल, किसी बड़े, अधिक उन्नत और शक्तिशाली एआई मॉडल के आउटपुट और डेटा का उपयोग करके स्वयं को प्रशिक्षित करता है। यह प्रक्रिया मूल मॉडल की जटिलताओं और विशेषताओं की नकल करने जैसी है। व्हाइट हाउस के वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकी नीति कार्यालय (ओएसटीपी) के निदेशक माइकल क्रैटसिओस द्वारा जारी एक मेमो में दावा किया गया है कि चीन स्थित कुछ संस्थाएं जानबूझकर अमेरिकी ‘फ्रंटियर एआई सिस्टम’ की डिस्टिलिंग कर रही हैं।

चोरी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे तरीके

अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, यह तकनीकी चोरी एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है। आरोपों में कहा गया है कि चीनी हैकर्स और संस्थाएं अमेरिकी एआई सिस्टम की सुरक्षा को भेदने के लिए कई तरीके अपना रही हैं:

  • फर्जी प्रॉक्सी अकाउंट: हजारों नकली बॉट अकाउंट बनाए जाते हैं जो एक सामान्य उपयोगकर्ता की तरह व्यवहार करते हैं।
  • जेलब्रेकिंग तकनीक: इन फर्जी अकाउंट्स के जरिए एआई मॉडल से वह गोपनीय जानकारी निकाली जाती है जो सार्वजनिक नहीं होनी चाहिए।
  • डेटा निष्कर्षण: बड़े एआई मॉडल से बार-बार और विभिन्न प्रकार के प्रश्न पूछकर उसके ट्रेनिंग डेटा और आर्किटेक्चर के बारे में जानकारी हासिल की जाती है।

इस तरह, चीनी संस्थाएं अमेरिकी वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के वर्षों के शोध और नवाचार का लाभ उठाकर अपनी एआई क्षमताओं को तेजी से विकसित कर रही हैं।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

यह कोई पहली घटना नहीं है जब एआई चोरी के ऐसे आरोप लगे हों। इसी वर्ष की शुरुआत में, एंथ्रोपिक और ओपनएआई जैसी प्रमुख अमेरिकी एआई कंपनियों ने भी इसी तरह की डिस्टिलिंग गतिविधियों की शिकायत की थी। एंथ्रोपिक ने विशेष रूप से खुलासा किया था कि डीपसीक, मूनशॉट और मिनीमैक्स जैसे चीनी एआई मॉडलों ने उनके सिस्टम से जानकारी चुराने की कोशिश की थी। ये घटनाएं दर्शाती हैं कि एआई तकनीक को लेकर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कितनी तीव्र हो गई है।

चीन की प्रतिक्रिया: आरोप निराधार

वाशिंगटन में चीनी दूतावास ने इन आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। दूतावास के प्रवक्ता ने सभी दावों को ‘निराधार’ बताते हुए खारिज कर दिया। प्रवक्ता ने कहा कि चीन हमेशा से बौद्धिक संपदा अधिकारों के संरक्षण को प्राथमिकता देता रहा है। उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि चीन का वर्तमान तकनीकी विकास उसकी अपनी कड़ी मेहनत, निरंतर प्रयास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का परिणाम है।

प्रवक्ता ने आगे कहा कि चीन अब केवल ‘दुनिया की फैक्ट्री’ नहीं रह गया है, बल्कि वह तेजी से एक वैश्विक ‘इनोवेशन लैब’ के रूप में उभर रहा है। यह बयान चीन के अपने एआई और तकनीकी क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और नेतृत्व के बढ़ते दावों को रेखांकित करता है। ट्रंप के आगामी दौरे के मद्देनजर, यह विवाद दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग और प्रतिस्पर्धा के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े करता है।