दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेज में शिक्षकों की पहल: कामकाजी अभिभावकों के लिए क्रैच सुविधा शुरू

दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेज ऑफ वोकेशनल स्टडीज में एक सराहनीय कदम उठाया गया है। यहां के शिक्षकों ने मिलकर कॉलेज परिसर में बच्चों की देखभाल के लिए एक क्रैच (चाइल्ड केयर) सुविधा की शुरुआत की है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य कामकाजी अभिभावकों, विशेषकर महिला शिक्षकों को राहत प्रदान करना है, ताकि वे अपने छोटे बच्चों की चिंता किए बिना अपने कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

एक अनूठी और संवेदनशील शुरुआत

कॉलेज स्टाफ एसोसिएशन के सहयोग और प्राचार्य के समर्थन से यह व्यवस्था लागू की गई है। एसोसिएशन का दावा है कि यह दिल्ली विश्वविद्यालय का पहला कॉलेज है, जहां शिक्षकों की पारिवारिक जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए इस प्रकार की सुविधा शुरू की गई है। इस कदम को कार्यस्थल पर संवेदनशीलता और व्यावहारिकता का एक आदर्श उदाहरण माना जा रहा है।

क्यों पड़ी इस सुविधा की आवश्यकता?

स्टाफ एसोसिएशन के अध्यक्ष रूपेश कुमार के अनुसार, बदलते समय में कार्यस्थलों पर ऐसी सुविधाओं का होना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के दिशानिर्देशों में 20 वर्ष से अधिक आयु की महिला कर्मियों के लिए क्रैच की सुविधा का प्रावधान है। दिल्ली विश्वविद्यालय के अधिकांश कॉलेजों में लगभग 50 प्रतिशत महिला शिक्षिकाएं कार्यरत हैं। कॉलेज ऑफ वोकेशनल स्टडीज में ही कुल 132 स्टाफ सदस्यों में से 70 महिला शिक्षिकाएं हैं। ऐसे में छोटे बच्चों वाले शिक्षकों को कार्य और परिवार के बीच संतुलन बनाने में अक्सर कठिनाई होती थी, जिसे देखते हुए यह पहल की गई।

बिना बजट के शुरू हुई व्यवस्था

खास बात यह है कि इस क्रैच सुविधा के लिए कोई अलग से बजट नहीं था। स्टाफ एसोसिएशन के सदस्यों ने सामूहिक रूप से इस पहल को आगे बढ़ाया और इस पर होने वाले सभी खर्चों को वहन किया। कॉलेज के एक हॉल को क्रैच में बदल दिया गया है, जहां बच्चों की सुविधाओं और खेलने के लिए पूरी व्यवस्था की गई है।

सुविधा की मुख्य विशेषताएं

  • निःशुल्क सेवा: यह सुविधा पूरी तरह से मुफ्त है, जिससे शिक्षकों पर किसी प्रकार का अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ता।
  • सुरक्षा पर ध्यान: बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए क्रैच में कैमरे लगाए गए हैं, जिससे माता-पिता निश्चिंत होकर अपने काम पर ध्यान दे सकें।
  • सभी के लिए खुली: यह सुविधा केवल इस कॉलेज के शिक्षकों तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य कॉलेजों के शिक्षक भी इसका लाभ उठा सकते हैं।

इस पहल से शिक्षक अब अपने बच्चों को एक सुरक्षित वातावरण में छोड़कर पढ़ाने, शोध पत्र तैयार करने और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों पर बेहतर ढंग से ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। यह कदम न केवल शिक्षकों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि कार्यस्थल पर महिला सशक्तिकरण और परिवार-अनुकूल नीतियों की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करता है।