दिल्ली-एनसीआर में बढ़ता पारा: हीट स्ट्रोक के लक्षण और डॉक्टर के पास कब जाएं?
उत्तर भारत इन दिनों भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों से जूझ रहा है। लगातार बढ़ता तापमान आम जनजीवन को प्रभावित कर रहा है और सेहत के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। मौसम विभाग ने दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा और गुरुग्राम जैसे शहरों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। शुक्रवार को राजधानी दिल्ली का अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया, और अगले कुछ दिनों तक लू चलने की संभावना जताई गई है।
इस भीषण गर्मी के बीच हीट स्ट्रोक के मामले भी सामने आने लगे हैं। अस्पतालों में तेज बुखार, चक्कर आना, त्वचा संबंधी समस्याएं और कमजोरी जैसी शिकायतों वाले मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है, खासकर दिन के 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच जब सूर्य की किरणें सबसे तीव्र होती हैं। बिना अत्यावश्यक काम के इस समय घर से बाहर न निकलने की सलाह दी जा रही है।
दिल्ली में हीट स्ट्रोक के मिले दो मरीज
मिली जानकारी के अनुसार, दिल्ली में अब तक हीट स्ट्रोक के दो गंभीर मामले दर्ज किए गए हैं। राम मनोहर लोहिया अस्पताल में एक 24 वर्षीय छात्र को रात करीब 1:45 बजे बेहोशी की हालत में भर्ती कराया गया। यह छात्र पश्चिम बंगाल का रहने वाला था और ट्रेन से यात्रा कर रहा था। दूसरा मरीज 50 वर्ष का एक व्यक्ति है। दोनों मरीजों को बेहोशी की स्थिति में अस्पताल लाया गया था।
डॉक्टरों के अनुसार, छात्र को पहले से कोई गंभीर बीमारी नहीं थी, लेकिन गर्मी के कारण उसके शरीर का तापमान 105 डिग्री फारेनहाइट से अधिक हो गया था। उसे बार-बार उल्टी, दस्त और भ्रम की स्थिति भी हो रही थी। रिपोर्ट के अनुसार, उसकी हालत गंभीर बनी हुई थी। इस घटना ने डॉक्टरों को एक बार फिर सचेत कर दिया है कि बढ़ती गर्मी में हीट स्ट्रोक कितनी जल्दी और गंभीर रूप ले सकता है।
गर्मी ने तोड़े रिकॉर्ड, डॉक्टरों की चेतावनी
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार को दिल्ली में पिछले 14 वर्षों में मई महीने की सबसे गर्म रात दर्ज की गई। न्यूनतम तापमान 31.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो कि सामान्य से काफी अधिक है। इससे पहले 2012 में 26 मई को न्यूनतम तापमान 32.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।
दिल्ली के एक निजी अस्पताल में इंटेंसिव केयर के डॉक्टर के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से ओपीडी में तेज बुखार, निम्न रक्तचाप और चक्कर आने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि अधिकांश मरीज सामान्य दवाओं और उपचार से ठीक हो रहे हैं, लेकिन बच्चों और बुजुर्गों में हीट स्ट्रोक का खतरा अधिक होता है। बच्चों का शरीर जल्दी गर्म होता है और उनमें डिहाइड्रेशन तेजी से हो सकता है, इसलिए उनकी विशेष देखभाल की आवश्यकता है।
हीट स्ट्रोक: एक मेडिकल इमरजेंसी
डॉक्टरों के अनुसार, हीट स्ट्रोक को एक मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है। यह तब होता है जब शरीर का तापमान नियंत्रण तंत्र विफल हो जाता है और शरीर तेजी से गर्म होने लगता है। सामान्य परिस्थितियों में पसीना आने से शरीर ठंडा रहता है, लेकिन हीट स्ट्रोक में यह प्रक्रिया बाधित हो जाती है।
हीट स्ट्रोक के मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं:
- व्यक्ति को पसीना आना अचानक बंद हो सकता है, जबकि त्वचा गर्म और शुष्क हो जाती है।
- दिल की धड़कन तेज हो जाती है और सांस लेने में कठिनाई हो सकती है।
- मानसिक स्थिति में बदलाव आ सकता है, जैसे भ्रम, बेहोशी या दौरे पड़ना।
- तेज बुखार, सिरदर्द और चक्कर आना भी सामान्य लक्षण हैं।
यदि समय पर इलाज न मिले, तो हीट स्ट्रोक मस्तिष्क, हृदय, लिवर और किडनी को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है। कई मामलों में मल्टी ऑर्गन फेलियर और मृत्यु का खतरा भी बना रहता है।
डॉक्टर के पास कब जाएं?
लू लगने की सामान्य समस्या को घरेलू उपायों और शरीर को ठंडा रखकर ठीक किया जा सकता है, लेकिन कुछ स्थितियों में तुरंत चिकित्सकीय मदद लेना आवश्यक हो जाता है।
- यदि किसी व्यक्ति का शरीर बहुत अधिक गर्म है और तेज बुखार (105 डिग्री फारेनहाइट या उससे अधिक) है।
- यदि व्यक्ति भ्रमित दिखाई दे, बेहोश होने लगे या उसे बोलने में कठिनाई हो रही हो।
- बार-बार उल्टी होना या दस्त लगना, जिससे शरीर में पानी की कमी हो रही हो।
- सांस लेने में दिक्कत या दिल की धड़कन का बहुत तेज होना।
- पसीना अचानक बंद हो जाना और त्वचा का गर्म व शुष्क हो जाना।
- तेज बुखार के साथ मानसिक स्थिति में बदलाव, जैसे चिड़चिड़ापन या उलझन।
इनमें से कोई भी लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाना चाहिए। समय पर डॉक्टरी सहायता मिलने से जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है और गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।
बचाव के उपाय
हीट स्ट्रोक से बचने के लिए कुछ सरल लेकिन प्रभावी उपाय अपनाए जा सकते हैं। दिन में खूब पानी और तरल पदार्थ पीते रहें, भले ही प्यास न लगी हो। हल्के, ढीले और सूती कपड़े पहनें। धूप में निकलने से बचें और यदि निकलना जरूरी हो तो सिर, चेहरे और गर्दन को अच्छी तरह से ढकें। छाते, टोपी या गीले कपड़े का इस्तेमाल करें। शराब और कैफीनयुक्त पेय पदार्थों से बचें, क्योंकि वे शरीर को डिहाइड्रेट कर सकते हैं। बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि वे गर्मी के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।