दिल्ली के दो प्रमुख फ्लाईओवरों का होगा कायाकल्प: जखीरा और सीलमपुर को मजबूती देने की तैयारी
दिल्ली सरकार द्वारा धन आवंटित किए जाने के बाद, लोक निर्माण विभाग (PWD) ने जखीरा और सीलमपुर फ्लाईओवरों की मरम्मत और संरचनात्मक मजबूती के लिए एक विस्तृत योजना तैयार कर ली है। ये दोनों फ्लाईओवर शहर के व्यस्ततम मार्गों पर स्थित हैं और भारी वाणिज्यिक वाहनों के दबाव को झेलते हैं। इस परियोजना के तहत करीब 35 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिससे इन पुलों की उम्र बढ़ाने और यातायात को सुगम बनाने में मदद मिलेगी।
जखीरा फ्लाईओवर: क्या होगा कार्य का दायरा?
1970 के दशक में निर्मित जखीरा फ्लाईओवर रोहतक रोड और नजफगढ़ रोड को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण पुल है। यह मुंडका, नांगलोई और आनंद परबत जैसे औद्योगिक क्षेत्रों को आपस में जोड़ता है, जहां से भारी ट्रक और अन्य वाणिज्यिक वाहन लगातार गुजरते हैं। इस फ्लाईओवर की मरम्मत के लिए लगभग 18.7 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है।
इस परियोजना में मुख्य रूप से निम्नलिखित कार्य शामिल होंगे:
- कंक्रीट की सतह की मरम्मत और दरारों को भरना
- विस्तार जोड़ों (एक्सपेंशन जॉइंट्स) और बेयरिंग्स को बदलना
- गर्डर्स को अतिरिक्त मजबूती प्रदान करना
इस पूरे काम को पूरा करने के लिए करीब 18 महीने की समयसीमा तय की गई है।
सीलमपुर फ्लाईओवर: 20 साल बाद बड़ी मरम्मत
पूर्वी दिल्ली के व्यस्त इलाकों को जोड़ने वाला सीलमपुर फ्लाईओवर अब लगभग 20 साल पुराना हो चुका है। इसकी संरचनात्मक मजबूती सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने करीब 16.3 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। यह फ्लाईओवर शहर के एक प्रमुख व्यावसायिक और आवासीय क्षेत्र को सेवा प्रदान करता है, जहां हर दिन हजारों वाहन गुजरते हैं।
इस फ्लाईओवर पर किए जाने वाले प्रमुख कार्य इस प्रकार हैं:
- मुख्य संरचनात्मक मरम्मत और स्ट्रैंड्स की प्रीस्ट्रेसिंग
- जॉइंट्स को बदलना और सड़क की सतह को समतल करना
इस परियोजना को पूरा करने के लिए लगभग 12 महीने का समय निर्धारित किया गया है।
मजबूतीकरण की आवश्यकता क्यों है?
इन दोनों फ्लाईओवरों की मरम्मत की आवश्यकता कई कारणों से उत्पन्न हुई है। सबसे पहला कारण है भारी ट्रैफिक का दबाव। जखीरा फ्लाईओवर पर लगातार भारी ट्रकों और कमर्शियल वाहनों के आवागमन के कारण कंक्रीट में दरारें पड़ गई हैं और बेयरिंग्स में घिसाव आ गया है।
दूसरा महत्वपूर्ण पहलू है ढांचागत सुरक्षा। सीलमपुर फ्लाईओवर दो दशक पुराना हो चुका है और समय पर मरम्मत न होने से यह भविष्य में एक संभावित खतरा बन सकता है। नियमित रखरखाव और मजबूतीकरण से इसकी आयु बढ़ेगी और किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सकेगा।
तीसरा कारण है स्मूथ ड्राइविंग का अनुभव। एक्सपेंशन जॉइंट्स को बदलने से सड़क की सतह अधिक समतल हो जाएगी, जिससे वाहनों को झटके कम लगेंगे और यात्रा अधिक आरामदायक हो जाएगी।
आम जनता पर क्या होगा प्रभाव?
इस मरम्मत कार्य का आम जनता पर दोहरा प्रभाव देखने को मिल सकता है। अल्पकालिक रूप में, जब इन फ्लाईओवरों पर काम चलेगा, तब ट्रैफिक डायवर्जन लागू किए जाएंगे। इससे विशेष रूप से पीक आवर्स में यात्रियों को जाम और देरी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, दीर्घकालिक लाभ अधिक महत्वपूर्ण हैं। मरम्मत के बाद ये फ्लाईओवर अधिक सुरक्षित और मजबूत होंगे, जिससे यातायात सुचारू रूप से चलेगा। भारी वाहनों की आवाजाही बेहतर ढंग से संभव हो सकेगी और कुल मिलाकर यात्रा का अनुभव अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बन जाएगा।