अमेरिकी संसद में स्कूलों में एआई पर बहस: 60% शिक्षक कर रहे इस्तेमाल, दुरुपयोग भी चिंता का विषय

अमेरिकी संसद में हाल ही में एक महत्वपूर्ण सुनवाई हुई, जिसमें स्कूलों में तेजी से बढ़ते आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग पर विस्तार से चर्चा की गई। इस सुनवाई का शीर्षक “एआई-तैयार अमेरिका का निर्माण: एआई युग में शिक्षण” रखा गया था। सांसदों ने इस तकनीक के लाभों को तो गिनाया ही, साथ ही इससे जुड़े जोखिमों और चुनौतियों पर भी गंभीरता से विचार किया।

शिक्षकों के बीच एआई की बढ़ती लोकप्रियता

सुनवाई के दौरान सांसद केविन काइली ने बताया कि 2024-2025 शैक्षणिक सत्र में अमेरिका के लगभग 60 प्रतिशत सरकारी स्कूल शिक्षकों ने अपने कामकाज में एआई टूल्स का उपयोग किया है। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि जो शिक्षक नियमित रूप से हर हफ्ते एआई का इस्तेमाल करते हैं, वे औसतन छह घंटे प्रति सप्ताह बचा पाते हैं। यह समय सालभर में लगभग छह सप्ताह के अतिरिक्त शिक्षण के बराबर है, जिसका उपयोग वे छात्रों के साथ अधिक गहनता से जुड़ने में कर सकते हैं।

हालांकि, इसके साथ ही एक चिंताजनक तथ्य भी सामने आया। लगभग 70 प्रतिशत शिक्षकों ने माना कि वे कक्षा में एआई का प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं हैं। यह आंकड़ा शिक्षकों को आवश्यक प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

छात्रों द्वारा एआई का दुरुपयोग एक बड़ी चिंता

चर्चा का एक प्रमुख बिंदु छात्रों द्वारा एआई का बढ़ता दुरुपयोग रहा। सर्वेक्षण के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि करीब 40 प्रतिशत माध्यमिक और हाई स्कूल के छात्रों ने स्वीकार किया है कि उन्होंने शिक्षक की अनुमति के बिना अपना असाइनमेंट पूरा करने के लिए एआई टूल्स का सहारा लिया। यह स्थिति शैक्षणिक ईमानदारी और मूल्यांकन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। स्कूलों के सामने अब यह चुनौती है कि वे छात्रों को एआई के नैतिक उपयोग के बारे में कैसे शिक्षित करें।

एआई को लेकर नीति और दिशा-निर्देश

वेस्ट वर्जीनिया की राज्य विद्यालय अधीक्षक मिशेल ब्लैट ने अपने राज्य के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि उनके राज्य ने एआई के उपयोग को लेकर कठोर प्रतिबंध लगाने के बजाय मार्गदर्शक सिद्धांतों को अपनाया है। 2024 में लागू किए गए इन दिशानिर्देशों ने सुरक्षा उपायों को लागू करने में मदद की है। बदलती परिस्थितियों और तकनीकी विकास को ध्यान में रखते हुए इस दस्तावेज में अब तक दो बार संशोधन भी किए जा चुके हैं, जो एक लचीली और अनुकूलनीय नीति की आवश्यकता को दर्शाता है।

क्या एआई शिक्षकों की जगह ले सकता है?

इस अहम सवाल पर ‘टीच फॉर अमेरिका’ के भारतीय-मूल के सीईओ अनीश सोहोनी और मिशेल ब्लैट ने स्पष्ट रूप से कहा कि एआई कभी भी शिक्षकों की जगह नहीं ले सकता। सोहोनी ने कहा, “एआई सिर्फ एक उपकरण है। वास्तविक शिक्षा तब होती है जब छात्र अपने शिक्षक के साथ व्यक्तिगत जुड़ाव महसूस करते हैं।” इस बात पर जोर दिया गया कि एआई शिक्षकों के काम को आसान बना सकता है, लेकिन मानवीय संवेदना और मार्गदर्शन की जगह नहीं ले सकता।

डेटा गोपनीयता और सुरक्षा के मुद्दे

बैठक में डेटा प्राइवेसी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। माइक्रोसॉफ्ट की प्रतिनिधि एलिसन नॉक्स ने स्पष्ट किया कि उनकी कंपनी छात्रों के डेटा का उपयोग अपने एआई मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए नहीं करती है। उन्होंने यह भी बताया कि 13 साल से कम उम्र के बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उनके लिए चैटबॉट के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि एआई अब भविष्य की तकनीक नहीं, बल्कि वर्तमान की वास्तविकता है। कॉलेजों का प्रतिनिधित्व करने वाले डेविड स्लीखुइस ने एक महत्वपूर्ण चेतावनी देते हुए कहा कि हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि छात्र तकनीक पर इस कदर निर्भर न हो जाएं कि उनकी अपनी आलोचनात्मक सोचने की क्षमता ही खत्म हो जाए। यह सुनवाई शिक्षा के क्षेत्र में एआई के संतुलित और जिम्मेदाराना उपयोग की दिशा में एक अहम कदम है।