D2M तकनीक: बिना इंटरनेट के मोबाइल पर चलेगा टीवी, जानिए कैसे बदलेगा खेल

कल्पना कीजिए कि आप किसी दूरदराज के इलाके में हैं जहाँ मोबाइल नेटवर्क की कोई पहुँच नहीं है, या फिर ट्रेन में सफर कर रहे हैं और आपके पास कोई डेटा पैक नहीं है। ऐसे में भी आप अपने फोन पर बिना किसी रुकावट के एचडी क्वालिटी में फिल्में या लाइव क्रिकेट मैच देख सकते हैं। यह कोई काल्पनिक दृश्य नहीं, बल्कि जल्द ही भारत में हकीकत बनने जा रहा है। यह संभव होगा D2M यानी डायरेक्ट-टू-मोबाइल तकनीक के जरिए।

क्या है D2M तकनीक और यह कैसे काम करती है?

D2M तकनीक बिल्कुल उसी सिद्धांत पर काम करती है जिस तरह आपके फोन में एफएम रेडियो चलता है। रेडियो सुनने के लिए आपको इंटरनेट की जरूरत नहीं होती, क्योंकि फोन सीधे टावर से सिग्नल पकड़ता है। इसी तरह, D2M तकनीक के जरिए वीडियो कंटेंट सीधे ब्रॉडकास्ट टावर या सैटेलाइट से आपके मोबाइल तक पहुँचेगा। इस पूरी प्रक्रिया में आपको अपना मोबाइल डेटा खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह तकनीक खासतौर पर 470 से 608 MHz के फ्रीक्वेंसी बैंड पर काम करेगी, जिसके लिए फोन में एक विशेष एंटीना और रिसीवर लगाना होगा।

सस्ते फीचर फोन के लिए वरदान

D2M तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह केवल महंगे स्मार्टफोन तक सीमित नहीं रहेगी। भारत में आज भी लगभग 20 करोड़ लोग कीपैड या फीचर फोन का इस्तेमाल करते हैं। इन लोगों के लिए यह तकनीक एक डिजिटल क्रांति से कम नहीं है। अब वे भी बिना इंटरनेट के लाइव टीवी चैनल, खबरें और मनोरंजन का आनंद ले सकेंगे। यह तकनीक खासतौर पर उन ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में क्रांतिकारी साबित हो सकती है जहाँ इंटरनेट की पहुँच सीमित है या डेटा पैक खरीदना लोगों के लिए आर्थिक रूप से संभव नहीं है।

कौन सी कंपनियां कर रही हैं तैयारी?

मोबाइल निर्माता कंपनियां इस तकनीक को लेकर काफी सक्रिय हैं। Lava और HMD जैसी कंपनियां D2M सपोर्ट वाले फीचर फोन विकसित कर रही हैं। इन फोनों की अनुमानित कीमत 2,000 से 2,500 रुपये के बीच हो सकती है। इनमें SL-3000 चिपसेट का इस्तेमाल होगा, जिसे टाटा समूह की कंपनी सांख्य लैब्स ने विकसित किया है। सांख्य लैब्स का विलय पहले ही टाटा समूह की दूरसंचार कंपनी तेजस नेटवर्क्स के साथ हो चुका है। D2M सिग्नल को प्रसारित करने के लिए खास 470-608 MHz बैंड का उपयोग किया जाएगा, जिसके लिए फोन में विशेष एंटीना और रिसीवर लगाना जरूरी होगा।

शुरुआत में क्या कंटेंट मिलेगा?

शुरुआती चरण में D2M प्लेटफॉर्म पर प्रसार भारती का कंटेंट उपलब्ध होगा। इसका मतलब है कि दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो से जुड़े चैनल सबसे पहले इस तकनीक के जरिए देखे जा सकेंगे। बाद में इस सेवा को स्मार्टफोन में भी शामिल करने की योजना है, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें।

कहाँ-कहाँ हो चुके हैं ट्रायल?

दिल्ली और बेंगलुरु में D2M तकनीक के ट्रायल सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं। अब अगले 6 से 9 महीनों में देश के लगभग 36 शहरों में इसके और परीक्षण किए जाएंगे। अगर ये ट्रायल सफल रहे, तो इसे पूरे भारत में लागू किया जा सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, देशभर में D2M नेटवर्क खड़ा करने में लगभग 8,000 करोड़ रुपये का खर्च आ सकता है। हालांकि, टेलीकॉम कंपनियां इस तकनीक को लेकर बहुत उत्साहित नहीं हैं, क्योंकि इससे उनके डेटा पैक बिजनेस पर असर पड़ सकता है।

IIT कानपुर की रिपोर्ट क्या कहती है?

IIT कानपुर ने 2022 में जारी अपनी रिपोर्ट में D2M को भारत की भविष्य की जरूरत बताया था। रिपोर्ट के अनुसार, एक ही नेटवर्क से टीवी, रेडियो और डिजिटल सेवाएं प्रदान करना संभव होगा। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया कि मौजूदा फोनों में इसके लिए जरूरी हार्डवेयर नहीं है, इसलिए नए डिजाइन और विशेष एंटीना-रिसीवर की आवश्यकता होगी।