सीयूईटी ने दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रवेश प्रक्रिया को किया समावेशी: कुलपति का बयान
दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह ने कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी) को देशभर के विद्यार्थियों के लिए समान अवसर प्रदान करने वाला एक सशक्त माध्यम बताया है। उनके अनुसार, इस प्रवेश परीक्षा ने विश्वविद्यालय में दाखिले की प्रक्रिया को अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी बना दिया है। पहले जहां विभिन्न शिक्षा बोर्डों में अंक देने की अलग-अलग नीतियों के कारण कुछ बोर्डों के छात्रों को अनुचित लाभ मिल जाता था, वहीं अब सीयूईटी ने सभी को एक समान मंच प्रदान किया है।
कुलपति ने बताया कि पहले की तुलना में अब दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्रों की विविधता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। देश के कोने-कोने से, चाहे वह बड़े महानगर हों या छोटे कस्बे और गांव, प्रतिभाशाली युवा अब डीयू में प्रवेश पा रहे हैं। यह बदलाव सीयूईटी के कारण संभव हो पाया है, जिसने प्रवेश प्रक्रिया को पूरी तरह से बदल दिया है।
दिल्ली विश्वविद्यालय : विविधताओं का संगम
प्रोफेसर योगेश सिंह ने दिल्ली विश्वविद्यालय को ‘मिनी इंडिया’ की संज्ञा देते हुए कहा कि यह संस्थान देश की सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता का प्रतिनिधित्व करता है। सीयूईटी लागू होने के बाद यह विविधता और अधिक गहरी हुई है। अब विभिन्न आर्थिक और सामाजिक पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों को यहां प्रवेश पाने का समान अवसर मिल रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय इस समावेशी बदलाव का स्वागत करता है और इसे शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक कदम मानता है।
नीट विवाद के बीच सीयूईटी पर भरोसा
हाल ही में नीट यूजी परीक्षा को लेकर उठे विवादों के बीच कुलपति ने सीयूईटी का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने स्वीकार किया कि किसी भी बड़ी परीक्षा के आयोजन में चुनौतियां आ सकती हैं, लेकिन इनका समाधान संभव है। उनका मानना है कि सीयूईटी ने विश्वविद्यालयों को सही मायने में मेधावी और प्रतिभाशाली छात्रों की पहचान करने में मदद की है। यह परीक्षा सिर्फ रटने की क्षमता नहीं, बल्कि छात्रों की वास्तविक समझ और योग्यता को परखने में सक्षम है।
चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम: नए आयाम
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत शुरू किए गए चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम (यूजी) पर चर्चा करते हुए कुलपति ने बताया कि इस वर्ष लगभग 25,000 छात्र चौथे वर्ष में अध्ययनरत हैं। विश्वविद्यालय हर साल लगभग 70,000 छात्रों को स्नातक के प्रथम वर्ष में प्रवेश देता है। उन्होंने यह भी बताया कि एनईपी के तहत छात्रों को लचीलापन प्रदान किया गया है। तीन वर्ष (छह सेमेस्टर) पूरे करने के बाद वे स्नातक डिग्री लेकर बाहर निकल सकते हैं। पहले बैच के लगभग 45,000 छात्रों ने इसी विकल्प का लाभ उठाया था।
चौथे वर्ष में शोध और उद्यमिता पर जोर
कुलपति ने बताया कि चौथे वर्ष का पाठ्यक्रम विशेष रूप से छात्रों को शोध, उद्यमिता, परियोजना कार्य और सामुदायिक सेवा जैसे क्षेत्रों में अवसर प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। हाल ही में छात्रों द्वारा तैयार की गई परियोजनाओं की एक प्रदर्शनी आयोजित की गई थी, जिसे शिक्षाविदों और उद्योग जगत के लोगों से अत्यधिक सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। इससे साफ है कि नया पाठ्यक्रम छात्रों में नवाचार और व्यावहारिक ज्ञान को बढ़ावा दे रहा है।
बुनियादी ढांचे की चुनौतियां और विस्तार योजनाएं
चार वर्षीय कार्यक्रम लागू होने के बाद बुनियादी ढांचे से जुड़ी चुनौतियों को स्वीकार करते हुए कुलपति ने कहा कि पहले कॉलेज केवल शिक्षण पर केंद्रित थे, लेकिन अब उन्हें शोध, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए भी तैयार होना होगा। इस दिशा में विश्वविद्यालय तेजी से काम कर रहा है। केंद्र सरकार और उच्च शिक्षा वित्त एजेंसी (एचईएफए) के सहयोग से लगभग 2,000 करोड़ रुपये की लागत से विश्वविद्यालय परिसर और कॉलेजों में विस्तार कार्य चल रहे हैं। कई नए भवनों का निर्माण किया जा रहा है, हालांकि इन परियोजनाओं को पूरा होने में कुछ समय और लगेगा।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नई तकनीकों पर विशेष ध्यान
प्रोफेसर योगेश सिंह ने बताया कि दिल्ली विश्वविद्यालय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने पर विशेष बल दे रहा है। विश्वविद्यालय में एआई, मशीन लर्निंग और डेटा साइंस से संबंधित कई नए पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं। प्रौद्योगिकी संकाय के तहत इन विषयों में माइनर कोर्स भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि विभिन्न विषयों के छात्र भी इन तकनीकों का ज्ञान प्राप्त कर सकें।
ऑनलाइन शिक्षा और ‘सेमेस्टर अवे’ कार्यक्रम
कुलपति ने ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देने की बात करते हुए कहा कि छात्रों को स्वयं (SWAYAM) जैसे प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कोर्स करके क्रेडिट ट्रांसफर की सुविधा दी जा रही है। इसके अलावा, विश्वविद्यालय ‘सेमेस्टर अवे’ नामक एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम पर भी काम कर रहा है, जिसके तहत छात्र एक सेमेस्टर के लिए किसी दूसरे विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर सकेंगे। इस प्रस्ताव को आवश्यक संशोधनों के बाद जल्द ही कार्यकारी परिषद के समक्ष फिर से रखा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय का सर्वोच्च लक्ष्य छात्रों को अधिक से अधिक अवसर प्रदान करना है और उनकी आवश्यकताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।