टेलीकॉम कंपनियों का TRAI के सस्ते वॉइस-एसएमएस प्लान पर कड़ा विरोध
देश की तीन प्रमुख दूरसंचार कंपनियों रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया (Vi) ने भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिसमें केवल वॉइस कॉलिंग और एसएमएस वाले किफायती मोबाइल प्लान शुरू करने की सिफारिश की गई थी। इस फैसले ने टेलीकॉम ऑपरेटरों और उपभोक्ता संगठनों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है।
TRAI का प्रस्ताव क्या है?
दूरसंचार नियामक TRAI ने हाल ही में सभी टेलीकॉम कंपनियों से कहा था कि वे ऐसे रिचार्ज प्लान भी पेश करें, जिनमें केवल कॉलिंग और मैसेजिंग की सुविधा हो और इंटरनेट डेटा को अनिवार्य रूप से शामिल न किया जाए।
नियामक का तर्क है कि बड़ी संख्या में ऐसे उपभोक्ता हैं, जो केवल फोन कॉल और टेक्स्ट मैसेज का उपयोग करते हैं। उन्हें डेटा युक्त महंगे बंडल पैक खरीदने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए। प्रस्ताव के अनुसार, हर उस वैधता अवधि के लिए जिसमें वर्तमान में डेटा पैक उपलब्ध है, एक समान ‘केवल वॉइस और एसएमएस’ वाला विशेष टैरिफ वाउचर (STV) भी पेश किया जाना चाहिए। इन प्लान की कीमत सिर्फ कॉलिंग और एसएमएस के अनुपात में रखी जानी चाहिए, ताकि बुजुर्ग, ग्रामीण और सीमित आय वाले ग्राहकों को राहत मिल सके।
कंपनियों ने किन कारणों से किया विरोध?
TRAI द्वारा आयोजित खुली चर्चा में तीनों कंपनियों ने स्पष्ट रूप से इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए मौजूदा व्यवस्था को बनाए रखने की वकालत की। कंपनियों के मुख्य तर्क इस प्रकार हैं:
- तकनीकी अड़चन: कंपनियों का कहना है कि 4G और 5G नेटवर्क पर वॉइस कॉल IP (इंटरनेट प्रोटोकॉल) आधारित तकनीक पर काम करती है। इसे डेटा सेवाओं से अलग करना तकनीकी रूप से जटिल और अव्यावहारिक है।
- साइबर सुरक्षा का जोखिम: जियो ने चेतावनी दी कि बेहद सस्ते वॉइस और एसएमएस प्लान साइबर अपराधियों के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं। इससे स्पैम कॉल, फर्जी मैसेज और ऑनलाइन धोखाधड़ी की घटनाओं में बढ़ोतरी होने की आशंका है। कंपनी ने यह भी दावा किया कि उसके लगभग 88 प्रतिशत शुरुआती ग्राहक सक्रिय रूप से डेटा सेवाओं का उपयोग करते हैं, इसलिए केवल वॉइस प्लान की मांग बहुत सीमित है।
- अप्रत्याशित शुल्क का खतरा: वोडाफोन आइडिया का तर्क है कि यदि डेटा को प्लान से अलग कर दिया जाता है, तो ग्राहकों को अनजाने में अतिरिक्त शुल्क चुकाना पड़ सकता है। कई एप्लिकेशन, सॉफ्टवेयर अपडेट और ओटीपी आधारित सेवाएं बैकग्राउंड में डेटा का उपयोग करती हैं, जिससे बिल अप्रत्याशित रूप से बढ़ सकता है।
- डिजिटल इंडिया के विपरीत: एयरटेल ने प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि भारत की डिजिटल सार्वजनिक व्यवस्था मोबाइल डेटा पर ही टिकी है। केवल वॉइस प्लान को बढ़ावा देना एक बड़े वर्ग को डिजिटल सेवाओं की मुख्यधारा से अलग कर सकता है, जो देश के डिजिटल इंडिया मिशन के खिलाफ होगा।
उपभोक्ता संगठनों का अलग दृष्टिकोण
दूसरी ओर, उपभोक्ता अधिकार संगठनों और गैर-सरकारी संस्थाओं ने टेलीकॉम कंपनियों के तर्कों को खारिज किया है। उनका कहना है कि देश के कई आदिवासी, पहाड़ी और दूरदराज के इलाकों में डेटा सेवाएं आज भी भरोसेमंद नहीं हैं। ऐसे में लोगों को डेटा वाले महंगे रिचार्ज प्लान खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
संगठनों का यह भी आरोप है कि शुरुआती प्लान में डेटा की प्रति जीबी लागत काफी अधिक होती है। उपभोक्ता लगभग 94 से 99 रुपये प्रति जीबी तक का भुगतान करते हैं, जबकि महंगे प्लान में यही लागत काफी कम हो जाती है। यह स्थिति छोटे उपभोक्ताओं के लिए अनुचित है।
अब सभी की निगाहें TRAI के अंतिम फैसले पर टिकी हैं। इस फैसले का सीधा असर देश के करोड़ों मोबाइल उपभोक्ताओं और पूरे टेलीकॉम बाजार पर पड़ सकता है।