चैत्र नवरात्रि: सिरोही की पहाड़ी पर विराजमान चामुंडा माता मंदिर, चंद्रावती शासनकाल से जुड़ी ऐतिहासिक धरोहर
राजस्थान के सिरोही जिले में चंद्रावती गांव के समीप एक पहाड़ी पर स्थित चामुंडा माता का मंदिर श्रद्धालुओं के लिए प्राचीन आस्था का केंद्र है। यह मंदिर आबूरोड-पालनपुर फोरलेन से लगभग 500 मीटर की दूरी पर स्थित है। भक्त यहां पैदल या निजी वाहनों से पहुंचकर माता के दर्शन करते हैं।
सीढ़ियों के माध्यम से दर्शन की व्यवस्था
मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार से माता के दर्शन तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को लगभग 200 सीढ़ियां चढ़नी होती हैं। भक्तों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यहां लोहे के शेड लगाए गए हैं, जो धूप, गर्मी और बारिश से बचाव प्रदान करते हैं। यह व्यवस्था दर्शन के अनुभव को अधिक सुगम बनाती है।
गर्भगृह और मंदिर परिसर की विशेषता
मंदिर के गर्भगृह में चामुंडा माता विराजमान हैं। बाहर की ओर काला भैरव और गोरा भैरव की प्रतिमाएं स्थापित हैं, जबकि माता के सामने शेर की मूर्ति विद्यमान है। मंदिर परिसर से शहर का फोरलेन मार्ग और आसपास की पहाड़ियां स्पष्ट दिखाई देती हैं, जो इस स्थान की प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ाती हैं।
चंद्रावती शासनकाल से जुड़ा इतिहास
इस मंदिर का इतिहास चंद्रावती शासनकाल से गहराई से जुड़ा हुआ है। 11वीं और 12वीं शताब्दी में चंद्रावती परमार राजाओं की राजधानी हुआ करती थी, जहां यशोधवल और धारवर्ष जैसे शासकों का राज था। उस समय यह नगरी शैव, वैष्णव और जैन मंदिरों के साथ-साथ राजप्रासादों से समृद्ध थी।
परमार राजाओं की कुलदेवी
ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, चामुंडा माता परमार राजाओं की कुलदेवी रही हैं। वर्ष 1303 तक यह क्षेत्र परमारों के अधीन रहा, जिसके बाद देवड़ा चौहानों का शासन स्थापित हुआ। समय के साथ इस मंदिर का कई चरणों में विकास किया गया, जो आज भी श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है।
चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर यहां भक्तों की भीड़ उमड़ती है, जो माता के आशीर्वाद की कामना करते हैं। पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि प्राचीन इतिहास की एक महत्वपूर्ण धरोहर भी है।