सर्वाइकल कैंसर से बचाव: एचपीवी वैक्सीन का सही समय और इससे जुड़ी अहम जानकारियां
दुनिया भर में कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। पुरुषों में फेफड़े, मुंह और प्रोस्टेट कैंसर का खतरा अधिक होता है, वहीं महिलाओं में स्तन और सर्वाइकल कैंसर के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। सर्वाइकल कैंसर महिलाओं के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है। वैश्विक स्तर पर इस बीमारी से होने वाली कुल मौतों में से लगभग एक चौथाई मौतें अकेले भारत में होती हैं। देश में हर साल लगभग 80,000 महिलाएं इस कैंसर से अपनी जान गंवा देती हैं, जो हर एक लाख महिलाओं में से लगभग 11.2 महिलाओं की मृत्यु के बराबर है। हालांकि, राहत की बात यह है कि नियमित जांच और टीकाकरण के माध्यम से इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
हाल ही में भारत सरकार ने सर्वाइकल कैंसर के बढ़ते खतरे को देखते हुए 14 वर्ष और उससे अधिक उम्र की लड़कियों के लिए देशभर में मुफ्त एचपीवी टीकाकरण कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है। यह कदम इस बीमारी से लड़ने में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है।
एचपीवी वायरस और वैक्सीन का महत्व
ह्यूमन पैपिलोमावायरस, जिसे एचपीवी के नाम से जाना जाता है, सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण माना जाता है। यह वायरस न केवल सर्वाइकल कैंसर बल्कि गले, गुदा और जननांगों से जुड़े कई अन्य कैंसर के जोखिम को भी बढ़ाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, एचपीवी वैक्सीन इन सभी जोखिमों को कम करने में अत्यधिक प्रभावी है। इस वैक्सीन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह तब सबसे अधिक असरदार होती है जब इसे वायरस के संपर्क में आने से पहले लगाया जाए। यही कारण है कि किशोरावस्था में ही इस टीके को लगाने की सलाह दी जाती है।
किस उम्र में लगवाना चाहिए एचपीवी वैक्सीन?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि एचपीवी वैक्सीन लगवाने के बाद भी महिलाओं को डॉक्टर की सलाह के अनुसार सर्वाइकल कैंसर की नियमित जांच कराते रहना चाहिए। वैक्सीन की प्रभावशीलता को अधिकतम करने के लिए सही उम्र का चुनाव बेहद जरूरी है।
- सामान्यतः 9 से 14 वर्ष की आयु के बीच और यौन संबंध शुरू करने से पहले यह वैक्सीन सबसे अधिक प्रभावी मानी जाती है।
- इस उम्र तक अधिकांश बच्चे वायरस के संपर्क में नहीं आए होते, जिससे वैक्सीन पूरी सुरक्षा प्रदान कर सकती है।
- इस आयु वर्ग में वैक्सीन की दो खुराकें दी जाती हैं। पहली खुराक के 6 से 12 महीने के अंतराल के बाद दूसरी खुराक लगाई जाती है।
क्या लड़कों को भी लगवानी चाहिए एचपीवी वैक्सीन?
एचपीवी संक्रमण केवल महिलाओं को ही प्रभावित नहीं करता है। कई विशेषज्ञ लड़कों और पुरुषों के लिए भी इस टीकाकरण की सिफारिश करते हैं। पुरुषों में एचपीवी संक्रमण गले का कैंसर, गुदा कैंसर, पेनाइल कैंसर और जननांगों पर मस्से जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है। यदि पुरुषों का टीकाकरण नहीं होता है, तो वायरस का संक्रमण फैलता रहता है और दूसरों को भी इसका खतरा बना रहता है। इसलिए समलैंगिक पुरुषों के लिए भी वैक्सीनेशन को आवश्यक माना जाता है।
एचपीवी वैक्सीन एक सुरक्षित और प्रभावी तरीका है जो सर्वाइकल कैंसर और अन्य संबंधित कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है। सही उम्र में टीकाकरण करवाकर और नियमित जांच जारी रखकर इस गंभीर बीमारी से बचाव संभव है।