बजट 2026 में हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र को मिलेगा नया आयाम
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने नौवें बजट भाषण में हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र को लेकर अहम घोषणाएं की हैं। इस बार सरकार का ध्यान पारंपरिक वस्त्र उद्योग को आधुनिकता से जोड़ने और बुनकरों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने पर केंद्रित है। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि वस्त्र क्षेत्र न सिर्फ भारत की सांस्कृतिक पहचान है, बल्कि यह रोजगार सृजन और आर्थिक विकास का एक मजबूत स्तंभ भी है।
प्राकृतिक रेशों को बढ़ावा
सरकार ने रेशम, ऊन और जूट जैसे प्राकृतिक रेशों के उत्पादन और उपयोग को प्रोत्साहित करने की योजना बनाई है। इस कदम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, क्योंकि ये उद्योग ज्यादातर छोटे कस्बों और गांवों में केंद्रित हैं। प्राकृतिक फाइबर आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने से न केवल पर्यावरण को लाभ होगा, बल्कि कच्चे माल की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी।
बुनकरों और कारीगरों को सीधा लाभ
नेशनल हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट सेक्टर को सशक्त बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इस पहल का सबसे बड़ा लाभ बुनकरों और कारीगरों को मिलेगा। उन्हें कौशल उन्नयन और वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे वे अपनी पारंपरिक कला को आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप ढाल सकेंगे। यह कदम भारतीय शिल्पकारों को अपना व्यवसाय जारी रखने में मदद करेगा, क्योंकि हाल के वर्षों में कम कमाई के कारण कई कारीगर इस पेशे को छोड़ रहे थे।
रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान
वस्त्र क्षेत्र के माध्यम से लाखों नौकरियां पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का फोकस इस बात पर है कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSME) और कुटीर उद्योगों को मजबूत किया जाए। इससे छोटे पैमाने के उद्यमियों और ग्रामीण महिलाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
टेक्निकल टेक्सटाइल और कौशल विकास
सरकार ने टेक्निकल टेक्सटाइल के क्षेत्र में भी निवेश बढ़ाने की बात कही है। इसके साथ ही, कौशल विकास कार्यक्रमों को शुरू किया जाएगा, ताकि युवा पीढ़ी इस उद्योग के लिए तैयार हो सके। फैशन और टेक्सटाइल कोर्स को शिक्षा प्रणाली में शामिल करने की योजना है, जिसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित करना है।
वैश्विक पहचान की ओर कदम
इन सभी पहलों का उद्देश्य भारत को वैश्विक टेक्सटाइल हब के रूप में स्थापित करना है। ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को नई गति देते हुए, सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि भारतीय हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में उचित स्थान मिले। इससे देश की पारंपरिक कलाओं को संरक्षण मिलेगा और निर्यात के नए रास्ते खुलेंगे।