सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक: कैसे एक साथ बजते हैं लाखों मोबाइल फोन?
शनिवार की शाम जब लाखों लोगों के मोबाइल फोन एक साथ बजने लगे, तो कई लोगों के मन में सवाल उठा कि आखिर यह कैसे संभव हुआ। स्क्रीन पर लाल रंग की चेतावनी के साथ अंग्रेजी और हिंदी में ‘अत्यंत गंभीर चेतावनी’ का संदेश दिखाई दिया। जिन लोगों के फोन साइलेंट या डू-नॉट-डिस्टर्ब मोड पर थे, वे भी इस तेज अलार्म को नहीं रोक पाए। शुरुआत में कई लोगों को लगा कि यह कोई साइबर हमला या स्कैम हो सकता है, लेकिन असल में यह सरकार द्वारा भारी आंधी, तूफान और ओलावृष्टि के लिए जारी किया गया आपातकालीन अलर्ट था। यह अलर्ट बिना इंटरनेट और नेटवर्क जाम के भी आप तक पहुंचता है।
क्या है सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक?
सेल ब्रॉडकास्ट एक ऐसी आपातकालीन संचार तकनीक है जो मोबाइल नेटवर्क के माध्यम से किसी विशेष क्षेत्र में मौजूद सभी मोबाइल फोनों तक एक साथ संदेश पहुंचा सकती है। यह सामान्य एसएमएस की तरह एक-एक नंबर पर मैसेज भेजने के बजाय सीधे मोबाइल टावर से पूरे इलाके में अलर्ट प्रसारित करती है। इसी कारण लाखों लोगों के फोन पर एक ही समय में चेतावनी संदेश दिखाई देता है और इसके लिए नेटवर्क पर अतिरिक्त दबाव भी नहीं पड़ता।
एसएमएस से कैसे अलग है यह सिस्टम?
सामान्य एसएमएस में हर मोबाइल नंबर पर अलग-अलग संदेश भेजा जाता है। बड़ी संख्या में लोगों को संदेश भेजने पर यह प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है और नेटवर्क पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है। वहीं, सेल ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम में मोबाइल टावर अपने कवरेज क्षेत्र में मौजूद सभी डिवाइसों को एक साथ संदेश प्रसारित कर देता है। इसलिए यह तकनीक नेटवर्क जाम होने की स्थिति में भी प्रभावी ढंग से काम करती है और कुछ ही सेकंड में लाखों लोगों तक चेतावनी पहुंचा सकती है।
भारत में कौन चला रहा है यह सिस्टम?
देश में इस तकनीक को दूरसंचार विभाग, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और सी-डॉट के सहयोग से विकसित किया गया है। इसके लिए स्वदेशी सचेत प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाता है। यह सिस्टम 4G और 5G नेटवर्क पर काम करता है और जरूरत पड़ने पर किसी खास राज्य, जिले या शहर के लोगों को ही अलर्ट भेज सकता है। इस तकनीक की मदद से सरकार आपात स्थिति में लोगों को समय रहते चेतावनी दे सकती है।
फोन साइलेंट होने पर भी कैसे बज जाता है अलर्ट?
सेल ब्रॉडकास्ट आपातकालीन अलर्ट सामान्य नोटिफिकेशन से बिल्कुल अलग होते हैं। इन्हें इस तरह डिजाइन किया गया है कि गंभीर स्थिति में लोगों का ध्यान तुरंत आकर्षित हो सके। इसी वजह से कई बार फोन साइलेंट या डू-नॉट-डिस्टर्ब मोड में होने के बावजूद उनमें तेज अलार्म बजता है और स्क्रीन पर चेतावनी संदेश दिखाई देता है। यह सुविधा यह सुनिश्चित करती है कि कोई भी व्यक्ति आपातकालीन चेतावनी से वंचित न रह जाए।
किन परिस्थितियों में भेजे जाते हैं ऐसे अलर्ट?
सरकार इस तकनीक का उपयोग कई तरह की आपातकालीन स्थितियों में करती है। इसके अंतर्गत निम्नलिखित परिस्थितियों में अलर्ट जारी किए जाते हैं:
- भारी आंधी और तूफान
- ओलावृष्टि
- बाढ़
- चक्रवात
- भूकंप
- सुनामी
इन सभी बड़े सार्वजनिक सुरक्षा खतरों से पहले ऐसे संदेश भेजे जाते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को समय रहते चेतावनी देकर जान-माल के नुकसान को कम करना है। यह तकनीक आपात स्थिति में एक महत्वपूर्ण संचार माध्यम के रूप में काम करती है और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मददगार साबित होती है।