डिजिटल सुरक्षा के नए युग में भारत: सीसीटीवी से लेकर डेटा तक सख्त नियम
देश में साइबर खतरों का तेजी से बढ़ता दायरा चिंता का विषय बना हुआ है। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए कई अहम फैसले लिए हैं। अब विदेशी सीसीटीवी कैमरों के जरिए किसी भी तरह की जासूसी या डेटा चोरी करना लगभग असंभव हो गया है। सरकार ने टेलीकॉम नेटवर्क, डेटा सुरक्षा और साइबर निगरानी से जुड़े नए और सख्त मानक लागू कर दिए हैं। इन कदमों का मकसद नागरिकों की निजता की रक्षा करना और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत बनाना है।
सीसीटीवी कैमरों के लिए सख्त तकनीकी मानक
हाल के वर्षों में सीसीटीवी हैकिंग की घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी थी। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सीसीटीवी सिस्टम के लिए कड़े नियम लागू किए हैं। अब हर कैमरे में इस्तेमाल होने वाले हार्डवेयर घटकों, खासकर सिस्टम ऑन चिप (SoC) की उत्पत्ति के बारे में पूरी जानकारी देना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा, किसी मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से कैमरे का परीक्षण कराना भी जरूरी होगा। सरकार ने अब तक 507 सीसीटीवी मॉडलों को नए मानकों पर प्रमाणित किया है, जो सुरक्षित माने जाएंगे।
सरकारी विभागों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश
सरकारी संस्थानों को विशेष निर्देश जारी किए गए हैं। अब केवल प्रमाणित सीसीटीवी उपकरणों का ही उपयोग करना अनिवार्य होगा। पुराने सिस्टम की सुरक्षा जांच करने और उन्हें समय पर अपडेट करने के भी आदेश दिए गए हैं। इसके साथ ही पूरे निगरानी नेटवर्क की समग्र सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी संबंधित विभागों की होगी।
टेलीकॉम नेटवर्क पर सख्त निगरानी
दूरसंचार नेटवर्क को सुरक्षित बनाने के लिए सरकार ने ‘ट्रस्टेड सोर्स’ नीति लागू कर दी है। इसके तहत अब कोई भी संस्था या व्यक्ति बिना सरकारी मंजूरी के टेलीकॉम उपकरण नहीं खरीद सकेगा। साथ ही, टेलीकॉम एक्ट 2023 को भी लागू किया गया है, जिसमें नेटवर्क सुरक्षा से जुड़े विस्तृत प्रावधान शामिल हैं। इस कानून का उद्देश्य देश के टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर को किसी भी बाहरी या आंतरिक खतरे से बचाना है।
डेटा सुरक्षा को मजबूत कानूनी आधार
डिजिटल डेटा की सुरक्षा आज के समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। इस समस्या से निपटने के लिए सरकार ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया है। इस कानून के तहत डेटा के दुरुपयोग या उल्लंघन के मामलों में सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। इससे नागरिकों के निजी डेटा को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
652 मोबाइल एप्लिकेशन पर प्रतिबंध
डेटा सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A के तहत कुल 652 मोबाइल एप्लिकेशनों को ब्लॉक कर दिया गया है। ये वे ऐप्स हैं जो डेटा चोरी या जासूसी के लिए संभावित रूप से खतरनाक पाए गए थे। यह कार्रवाई भविष्य में ऐसे खतरों को रोकने के लिए एक चेतावनी के रूप में भी देखी जा रही है।
साइबर सुरक्षा ढांचे को और मजबूत करना
राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए नेशनल साइबर को-ऑर्डिनेशन सेंटर (NCCC) सक्रिय भूमिका निभा रहा है। यह केंद्र साइबर स्पेस पर लगातार नजर रखता है और संभावित खतरों की पहचान कर रियल-टाइम अलर्ट जारी करता है। इसके अलावा, CERT-In ने भी सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं।
- CERT-In ने 237 सुरक्षा ऑडिट संगठनों की एक सूची तैयार की है, जो विभिन्न संस्थानों की सुरक्षा जांच करेंगे।
- वर्ष 2023 में सूचना सुरक्षा से जुड़े विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए गए थे।
- 2025 में सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर और उभरती तकनीकों के लिए बिल ऑफ मटेरियल्स (BOM) से संबंधित अपडेटेड गाइडलाइंस जारी की गईं। इनका उद्देश्य सप्लाई चेन की सुरक्षा और पारदर्शिता को बढ़ाना है।
विदेशी सीसीटीवी से बढ़ा खतरा
हाल ही में सुरक्षा एजेंसियों ने विदेशी, विशेषकर चीन से आने वाले सीसीटीवी उपकरणों में संभावित खामियों को लेकर चेतावनी दी है। इन उपकरणों में जासूसी नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिससे अनधिकृत निगरानी का खतरा बढ़ जाता है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि असुरक्षित निगरानी सिस्टम राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं। सरकार के इन नए कदमों से ऐसे खतरों पर प्रभावी रोक लगेगी और देश का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पहले से कहीं अधिक सुरक्षित हो जाएगा।