पश्चिम एशिया के सीबीएसई छात्रों के लिए विशेष नीति पर विचार, अगली सुनवाई 22 जून को

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि पश्चिम एशिया के उन छात्रों के लिए एक विशेष नीति तैयार करने पर विचार चल रहा है, जिनके सीबीएसई बोर्ड परीक्षा परिणाम क्षेत्र में चल रहे संघर्ष और खराब सुरक्षा स्थितियों के कारण घोषित नहीं हो सके हैं। सरकार का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक छात्र तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़ी संख्या में प्रभावित छात्रों से जुड़ा हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान क्या हुआ?

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट की अवकाशकालीन पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई शामिल थे, ने इस मामले की सुनवाई की। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार ऐसी नीति बनाने पर गंभीरता से विचार कर रही है जो सभी प्रभावित छात्रों पर समान रूप से लागू हो। उन्होंने कहा कि इस नीति के तहत जल्द ही कोई ठोस निर्णय लिया जा सकता है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 22 जून 2026 को निर्धारित की है।

याचिका किसने दायर की?

यह याचिका सऊदी अरब में रहने वाले एक छात्र प्रांशु जिगरकुमार पटेल ने दायर की है। उन्होंने सीबीएसई से अपनी कक्षा 12 की सुधार (इम्प्रूवमेंट) परीक्षा का परिणाम घोषित करने का निर्देश देने की मांग की है। याचिका में बताया गया है कि परिणाम घोषित न होने के कारण छात्र के उच्च शिक्षा में प्रवेश की संभावनाएं प्रभावित हो रही हैं। समय पर रिजल्ट न मिलने से कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में दाखिले के अवसर सीमित हो सकते हैं।

पहले दिल्ली हाईकोर्ट में भी की गई थी याचिका

इससे पहले छात्र ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था, लेकिन हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट में लाया गया। छात्र का कहना है कि उसने 17 मई, 21 मई और 30 मई को सीबीएसई को कई बार प्रतिनिधित्व भेजा, लेकिन उसे कोई जवाब नहीं मिला।

किन देशों में रद्द हुई थीं परीक्षाएं?

ईरान-इजराइल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति को देखते हुए सीबीएसई ने सात पश्चिम एशियाई देशों में कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं रद्द कर दी थीं। इन देशों में शामिल हैं:

  • बहरीन
  • ईरान
  • कुवैत
  • ओमान
  • कतर
  • सऊदी अरब
  • संयुक्त अरब अमीरात (यूएई)

परीक्षाएं रद्द होने के बाद सीबीएसई ने प्रभावित छात्रों के लिए एक विशेष मूल्यांकन प्रणाली लागू की थी। अब सरकार एक नई नीति के जरिए इन छात्रों को राहत देने की योजना बना रही है, ताकि उनके शैक्षणिक भविष्य पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 22 जून को रखी है, जिसमें इस नीति पर और अधिक जानकारी सामने आने की उम्मीद है।