सीबीएसई तीन-भाषा नीति: सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक से किया इनकार, अब 14 जुलाई को सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा कक्षा 9 के छात्रों के लिए लागू की जाने वाली तीन-भाषा नीति पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने इस मामले को पहले से लंबित अन्य याचिकाओं के साथ जोड़ते हुए 14 जुलाई को अगली सुनवाई तय की है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर पहले भी विस्तार से चर्चा हो चुकी है, इसलिए फिलहाल किसी भी प्रकार की अंतरिम सुरक्षा या रोक का आदेश जारी नहीं किया जा सकता। यह नीति शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 9 के विद्यार्थियों पर लागू होने वाली है।
एनजीओ ने क्रियान्वयन के तरीके पर उठाए सवाल
यह याचिका ‘फ्रेंड्स ऑफ पीपल फॉर एक्टिव डेमोक्रेसी’ नामक एक गैर-सरकारी संगठन द्वारा दायर की गई थी। संगठन की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि वे तीन-भाषा नीति के विरोधी नहीं हैं, बल्कि इसके कार्यान्वयन की प्रक्रिया को चुनौती दे रहे हैं। सुनवाई के दौरान पीठ ने संगठन के नाम पर हल्की-फुल्की टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या यह नाम अदालत या लोगों में भय पैदा करने के लिए रखा गया है। इस पर वकील ने जवाब दिया कि यह 2013 में स्थापित एक पुराना ट्रस्ट है।
14 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
पीठ ने इस मामले को अन्य लंबित याचिकाओं के साथ टैग करते हुए 14 जुलाई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। इससे पहले 27 मई को सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई थी और केंद्र सरकार, सीबीएसई तथा एनसीईआरटी को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से यह भी पूछा था कि नई नीति को लागू करने के लिए सीबीएसई की तैयारियां किस स्तर पर हैं और इस संबंध में रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था।
क्या है सीबीएसई की नई तीन-भाषा नीति?
सीबीएसई द्वारा जारी हालिया सर्कुलर के अनुसार, 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य होगा। इनमें से कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की होना जरूरी होगा। यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ-एसई) 2023 के अनुरूप उठाया गया है। बोर्ड का कहना है कि माध्यमिक स्तर पर भाषा दक्षता और सांस्कृतिक समझ को मजबूत करने के लिए यह बदलाव किया जा रहा है।
विदेशी भाषा पढ़ने वालों के लिए नियम
सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई छात्र विदेशी भाषा पढ़ना चाहता है तो वह इसे केवल तीसरी भाषा के रूप में चुन सकता है, बशर्ते वह दो भारतीय भाषाओं का अध्ययन कर रहा हो। इसके अलावा, विदेशी भाषा को अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में भी लिया जा सकता है।
कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा में नहीं होगा आर3 का पेपर
छात्रों पर अतिरिक्त दबाव कम करने के लिए बोर्ड ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। तीसरी भाषा (आर3) के लिए कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। आर3 विषय का मूल्यांकन पूरी तरह स्कूल स्तर पर होगा और छात्रों के प्रदर्शन को सीबीएसई प्रमाणपत्र में दर्ज किया जाएगा। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी छात्र को केवल आर3 विषय के कारण कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जाएगा।
संबंधित भाषा के शिक्षक नहीं होने पर क्या होगा?
जहां संबंधित भारतीय भाषाओं के योग्य शिक्षक उपलब्ध नहीं होंगे, वहां स्कूल अस्थायी व्यवस्था के तहत अन्य विषयों के ऐसे शिक्षकों की सेवाएं ले सकेंगे जिन्हें उस भाषा का कार्यात्मक ज्ञान हो। इसके अलावा, स्कूलों को इंटर-स्कूल संसाधन साझा करने, वर्चुअल या हाइब्रिड शिक्षण, सेवानिवृत्त भाषा शिक्षकों की नियुक्ति और योग्य स्नातकोत्तर अभ्यर्थियों की सेवाएं लेने की भी अनुमति दी गई है।
दिव्यांग और विदेशी छात्रों को मिलेगी राहत
सीबीएसई ने कहा है कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (सीडब्ल्यूएसएन) को दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के अनुसार आवश्यक छूट दी जाएगी। वहीं, विदेश से भारत लौटने वाले छात्रों को मामले-दर-मामले के आधार पर दो भारतीय भाषाएं पढ़ने की अनिवार्यता से छूट दी जा सकती है।
गणित और विज्ञान में भी होंगे बड़े बदलाव
सीबीएसई ने अप्रैल 2026 में यह भी घोषणा की थी कि 2026-27 सत्र से कक्षा 9 में गणित और विज्ञान विषयों के लिए दो-स्तरीय प्रणाली लागू की जाएगी। इसके तहत दोनों विषयों में एक अनिवार्य स्टैंडर्ड स्तर और एक वैकल्पिक एडवांस्ड स्तर होगा। सभी छात्रों को 80 अंकों की समान परीक्षा देनी होगी, जबकि उच्च दक्षता वाले छात्र अतिरिक्त एडवांस्ड पेपर देकर अपनी गहन विषय समझ और उच्च स्तरीय सोच कौशल का प्रदर्शन कर सकेंगे।