CBSE ने खाड़ी देशों के प्राइवेट छात्रों के लिए नया मूल्यांकन फॉर्मूला किया लागू, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका की निपटारा
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण मामले का निपटारा करते हुए उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें खाड़ी देशों में परीक्षा रद्द होने से प्रभावित सीबीएसई कक्षा 12 के एक प्राइवेट छात्र के परिणाम को चुनौती दी गई थी। केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि इस समस्या के समाधान के लिए एक नई राष्ट्रीय नीति अधिसूचित कर दी गई है, जिसमें प्राइवेट अभ्यर्थियों के लिए अलग मूल्यांकन फॉर्मूला तैयार किया गया है।
सुनवाई के दौरान क्या हुआ?
न्यायमूर्ति एस.वी.एन. भट्टी और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को अवगत कराया कि पश्चिम एशिया के देशों में क्षेत्रीय संघर्ष के कारण परीक्षाएं रद्द हो गई थीं। इससे प्रभावित छात्रों के लिए अखिल भारतीय स्तर पर एक नीति बनाई गई है, जो प्राइवेट अभ्यर्थियों की समस्या का समाधान करेगी।
याचिका किसने दायर की थी?
यह याचिका सऊदी अरब के अल जुबैल में रहने वाले प्रांसु जिगरकुमार पटेल ने दाखिल की थी। वह सीबीएसई कक्षा 12 की सुधार (इम्प्रूवमेंट) परीक्षा के प्राइवेट अभ्यर्थी थे। याचिकाकर्ता का आरोप था कि सीबीएसई ने 27 मार्च 2026 को खाड़ी देशों के प्रभावित छात्रों के लिए एक विशेष मूल्यांकन योजना बनाई थी, लेकिन उसमें केवल नियमित छात्रों को शामिल किया गया। प्राइवेट अभ्यर्थियों, खासकर सुधार परीक्षा देने वालों के लिए कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं था। इसी कारण उनका परिणाम ‘बाद में घोषित किया जाएगा’ के रूप में रोक दिया गया था।
याचिकाकर्ता ने इसे मनमाना और भेदभावपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे उनकी उच्च शिक्षा की संभावनाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो रही हैं।
कोर्ट ने पहले भी मांगा था जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने 8 जून को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर इस समस्या का समाधान खोजने का निर्देश दिया था। इसके बाद 13 जून को केंद्र ने अदालत को सूचित किया कि याचिकाकर्ता की शिकायत के समाधान के लिए एक नीति तैयार की जाएगी। इसी आधार पर मामले को 22 जून के लिए सूचीबद्ध किया गया था।
प्राइवेट छात्रों के सामने क्या चुनौती थी?
सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को समझाया कि परीक्षा रद्द होने से प्रभावित छात्रों की दो श्रेणियां थीं – नियमित छात्र और प्राइवेट अभ्यर्थी। नियमित छात्रों के लिए स्कूलों के पास आंतरिक मूल्यांकन, त्रैमासिक, अर्धवार्षिक और प्री-बोर्ड परीक्षाओं के अंक उपलब्ध थे। इनके आधार पर 27 मार्च की मूल्यांकन योजना बनाई गई थी। लेकिन प्राइवेट अभ्यर्थियों के पास ऐसा कोई स्कूल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था। इसी वजह से उनके लिए अलग व्यवस्था करना आवश्यक हो गया।
नई नीति में क्या है फॉर्मूला?
केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि 21 जून 2026 को अधिसूचित नई नीति के तहत प्राइवेट अभ्यर्थियों के लिए एक विशिष्ट मूल्यांकन फॉर्मूला तैयार किया गया है। इस फॉर्मूले के अनुसार, जिन विषयों की परीक्षा रद्द हुई थी, उनमें अंक निम्नलिखित आधार पर तय किए जाएंगे:
- कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा के थ्योरी अंकों का 40 प्रतिशत
- कक्षा 12 बोर्ड परीक्षा के थ्योरी अंकों का 60 प्रतिशत
- कक्षा 10 के प्रदर्शन के लिए छात्र के सर्वाधिक अंक वाले तीन विषयों का औसत लिया जाएगा और इसे संबंधित विषयों के अधिकतम अंकों के अनुसार सामान्यीकृत (नॉर्मलाइज्ड) किया जाएगा
याचिकाकर्ता के मामले में कैसे हुआ मूल्यांकन?
अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता की फिजिक्स और केमिस्ट्री की परीक्षाएं आयोजित हुई थीं, जबकि गणित, अंग्रेजी और कंप्यूटर साइंस की परीक्षाएं रद्द हो गई थीं। इसलिए फिजिक्स और केमिस्ट्री में वास्तविक प्राप्तांक लिए गए, जबकि गणित, अंग्रेजी और कंप्यूटर साइंस के अंक नई मूल्यांकन नीति के तहत निर्धारित किए गए।
सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को यह भी बताया कि इस तरीके से तैयार किए गए परिणाम में याचिकाकर्ता के अंक उनके पहले के प्रदर्शन से अधिक आए हैं। यह परिणाम उन्हें ई-मेल के माध्यम से भेज दिया गया है और इसे डिजिलॉकर पर भी अपडेट किया जाएगा।
असंतुष्ट छात्रों के लिए विकल्प
केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई छात्र मूल्यांकन के आधार पर दिए गए अंकों से संतुष्ट नहीं है, तो वह अगली नियमित परीक्षा में शामिल हो सकता है। यह प्रावधान छात्रों को उनके परिणाम को बेहतर करने का एक और अवसर प्रदान करता है।
कोर्ट का अंतिम निर्णय
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने परिणाम घोषित होने की बात स्वीकार की, लेकिन अदालत से अनुरोध किया कि उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां प्राप्त करने और सीबीएसई नियमों के अनुसार पुनर्मूल्यांकन (री-इवैल्यूएशन) कराने का अधिकार सुरक्षित रखा जाए। हालांकि, पीठ ने कहा कि ऐसी राहतें मूल याचिका में नहीं मांगी गई थीं।
न्यायमूर्ति भट्टी ने टिप्पणी की कि अदालत आमतौर पर परीक्षा संबंधी मामलों में हस्तक्षेप करने में संयम बरतती है। उन्होंने कहा कि नई नीति और याचिकाकर्ता को परिणाम उपलब्ध कराए जाने के बाद उसकी मुख्य शिकायत का पर्याप्त समाधान हो गया है। इसके बाद, केंद्र सरकार द्वारा 21 जून को अधिसूचित नीति और सॉलिसिटर जनरल के बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता की कोई अन्य शिकायत शेष रहती है, तो वह कानून के अनुसार उपलब्ध अन्य उपायों का सहारा लेने के लिए स्वतंत्र होगा।