सीबीएसई ओएसएम विवाद: कांग्रेस का शिक्षा मंत्री पर हमला, इस्तीफे की मांग
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली को लेकर उठे विवाद ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को घेरते हुए गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि बोर्ड की आपत्तियों के बावजूद इस महंगी प्रणाली को लागू किया गया, जिससे वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिलते हैं।
टेंडर प्रक्रिया में लागत वृद्धि के आरोप
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने शुक्रवार को एक प्रेस वार्ता में आरोप लगाया कि ओएसएम प्रणाली से जुड़े टेंडर की लागत में लगभग 10 करोड़ रुपये की अनियमित वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि सीबीएसई द्वारा जारी शुरुआती दो टेंडरों में कार्य का मूल्य 28 करोड़ रुपये था, जो अंतिम वर्क ऑर्डर में बढ़कर 38.46 करोड़ रुपये हो गया।
जयराम रमेश ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि वास्तविक रूप से स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं के आधार पर इस कार्य की लागत लगभग 25.39 करोड़ रुपये होनी चाहिए थी। यह राशि जारी वर्क ऑर्डर से काफी कम है, जो खरीद प्रक्रिया में संभावित गड़बड़ी की ओर इशारा करती है।
बोर्ड की चिंताओं को नजरअंदाज किया गया
कांग्रेस नेता ने कहा कि दिसंबर 2024 में सीबीएसई गवर्निंग बॉडी की बैठक में ओएसएम प्रणाली लागू करने से होने वाले वित्तीय बोझ पर चिंता व्यक्त की गई थी। बावजूद इसके, इस व्यवस्था को लागू कर दिया गया। यह सवाल उठता है कि जब बोर्ड ने ही इस पर आपत्ति जताई थी, तो फिर इसे क्यों लागू किया गया और इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
संसदीय समिति में भी उठे सवाल
जयराम रमेश ने बताया कि शिक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति की बैठक में भी यह मुद्दा उठाया गया था। समिति ने सीबीएसई से खरीद प्रक्रिया से जुड़े कई सवाल पूछे थे, लेकिन बोर्ड संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। खास बात यह है कि 18 वर्षीय व्हिसलब्लोअर सार्थक सिद्धांत की बात सुनने के बाद समिति ने ये सवाल उठाए थे, जो इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है।
मंत्री के इस्तीफे की मांग
कांग्रेस ने इस पूरे मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है। पार्टी का कहना है कि निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया जाना चाहिए। जयराम रमेश ने कहा कि यदि मंत्री इस्तीफा नहीं देते हैं, तो केंद्र सरकार द्वारा गठित एक सदस्यीय जांच समिति केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी और असली सच्चाई सामने नहीं आ पाएगी।
राहुल गांधी का हमला
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को निशाने पर लिया है। उन्होंने ओएसएम विवाद के बाद सीबीएसई के शीर्ष अधिकारियों को हटाए जाने को ‘लीपापोती’ और ‘सच्चाई छिपाने की कोशिश’ बताया है। राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्री को पद से हटाने और पूरे मामले की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराने की मांग की है। उनके अनुसार, सरकार सच्चाई को दबाने का प्रयास कर रही है, जबकि छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मामले में पारदर्शिता जरूरी है।
ओएसएम विवाद की पृष्ठभूमि
सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली पिछले कुछ समय से विवादों में घिरी हुई है। कक्षा 12 के कुछ छात्रों ने दावा किया था कि बोर्ड द्वारा उपलब्ध कराई गई उनकी स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं की लिखावट उनकी वास्तविक लिखावट से मेल नहीं खा रही थी। इसके बाद से ओएसएम प्रणाली में संभावित गड़बड़ियों और उत्तर पुस्तिकाओं के मिलान को लेकर कई सवाल खड़े हुए।
- छात्रों ने आरोप लगाया कि उनकी उत्तर पुस्तिकाओं से छेड़छाड़ की गई है।
- विपक्षी दलों ने इसे शिक्षा व्यवस्था में बड़ी अनियमितता बताया।
- मामले ने संसद में भी सियासी हंगामा खड़ा कर दिया।
सरकार ने गठित की जांच समिति
बढ़ते विवाद को देखते हुए केंद्र सरकार के कैबिनेट सचिवालय ने 3 जून को ओएसएम प्रणाली की खरीद प्रक्रिया की जांच के लिए एक सदस्यीय समिति के गठन की घोषणा की थी। यह समिति सीबीएसई द्वारा ओएसएम सेवाओं की खरीद, उससे जुड़ी प्रक्रिया और लगाए गए आरोपों की विस्तृत जांच करेगी। समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति और अधिक स्पष्ट हो सकेगी, लेकिन तब तक राजनीतिक बयानबाजी जारी रहने की संभावना है।