सीबीएसई का नया अंदाज: 2026 से डिजिटल स्क्रीन पर जांची जाएंगी 12वीं की उत्तर पुस्तिकाएं

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) अपनी मूल्यांकन प्रणाली में एक बड़ा और आधुनिक बदलाव लाने जा रहा है। साल 2026 से कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच अब पारंपरिक तरीके से नहीं, बल्कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली के माध्यम से की जाएगी। इस नई डिजिटल प्रक्रिया के तहत शिक्षक कंप्यूटर स्क्रीन पर ही उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करेंगे। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह बदलाव फिलहाल केवल कक्षा 12वीं के लिए है, जबकि कक्षा 10वीं की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच अभी भी भौतिक रूप से ही होगी।

क्यों जरूरी है यह बदलाव?

सीबीएसई हर साल देशभर में और भारत के बाहर 26 अन्य देशों में कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं आयोजित करता है। इन परीक्षाओं में लगभग 46 लाख छात्र शामिल होते हैं। इतनी बड़ी संख्या में उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन को अधिक सुव्यवस्थित, तेज और पारदर्शी बनाने के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली को लागू करने का निर्णय लिया गया है। इस कदम से मूल्यांकन प्रक्रिया में आने वाली देरी और मानवीय त्रुटियों को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

बोर्ड परीक्षाओं का कार्यक्रम

सीबीएसई द्वारा जारी आधिकारिक डेटशीट के अनुसार, वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षाएं 17 फरवरी से शुरू होंगी। कक्षा 10वीं की परीक्षाएं 11 मार्च को समाप्त होंगी, जबकि कक्षा 12वीं की परीक्षाएं 10 अप्रैल तक चलेंगी। इसी शैक्षणिक सत्र से कक्षा 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं का डिजिटल मूल्यांकन शुरू होगा, जिसे इस तकनीकी बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है।

कैसे काम करेगा ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम?

ऑन-स्क्रीन मार्किंग एक पूरी तरह से डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया है। इस प्रणाली में सबसे पहले छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन किया जाएगा और फिर उन्हें एक सुरक्षित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर दिया जाएगा। इसके बाद, मूल्यांकन करने वाले शिक्षक अपने कंप्यूटर या लैपटॉप पर लॉग इन करके सीधे स्क्रीन पर उत्तरों को पढ़ेंगे और अंक प्रदान करेंगे। इस तरीके से उत्तर पुस्तिकाओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक भौतिक रूप से ले जाने की आवश्यकता नहीं रहेगी, जिससे समय और संसाधनों दोनों की बचत होगी। बोर्ड के अनुसार, यह प्रणाली मैन्युअल जांच के दौरान होने वाली सामान्य गलतियों और देरी को कम करने में सहायक होगी।

डिजिटल मूल्यांकन के प्रमुख लाभ

सीबीएसई ने इस नई मूल्यांकन प्रणाली के अनेक लाभ गिनाए हैं, जो इसे पारंपरिक प्रणाली से अधिक प्रभावी बनाते हैं:

  • अंकों के योग में होने वाली त्रुटियां पूरी तरह समाप्त हो जाएंगी।
  • उत्तर पुस्तिकाओं के परिवहन और मैन्युअल प्रबंधन की आवश्यकता कम हो जाएगी।
  • शिक्षक अपने ही स्कूल में बैठकर उत्तर पुस्तिकाओं की जांच कर सकेंगे, जिससे उन्हें मूल्यांकन केंद्रों तक यात्रा नहीं करनी पड़ेगी।
  • मूल्यांकन की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तीव्र गति से पूरी हो सकेगी।
  • अधिक से अधिक शिक्षक एक साथ इस मूल्यांकन प्रक्रिया में भाग ले सकेंगे।
  • परिणाम घोषित होने के बाद अंकों के पुन: सत्यापन की आवश्यकता कम हो जाएगी, जिससे अतिरिक्त कार्यभार और स्टाफ की जरूरत घटेगी।
  • समय और लागत दोनों में महत्वपूर्ण बचत होगी।
  • विदेशों में स्थित सीबीएसई से संबद्ध स्कूल भी इस प्रक्रिया में आसानी से शामिल हो सकेंगे।
  • यह डिजिटल प्रणाली पर्यावरण के लिए भी लाभदायक है, क्योंकि इसमें कागज के उपयोग और परिवहन में कमी आएगी।

स्कूलों और शिक्षकों के लिए आवश्यक तैयारियां

ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली को सुचारू रूप से लागू करने के लिए, सीबीएसई ने सभी संबद्ध स्कूलों को कुछ आवश्यक डिजिटल सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • एक कंप्यूटर लैब जिसमें पब्लिक स्टैटिक आईपी की सुविधा हो।
  • ऐसे कंप्यूटर या लैपटॉप जिनमें विंडोज ओएस 8 या उससे उच्च वर्जन, कम से कम 4 जीबी रैम और 1 जीबी खाली स्थान हो।
  • अद्यतन इंटरनेट ब्राउज़र जैसे क्रोम, एज या फायरफॉक्स।
  • एडोब रीडर सॉफ्टवेयर की उपलब्धता।
  • कम से कम 2 एमबीपीएस की स्थिर इंटरनेट स्पीड।
  • निर्बाध बिजली आपूर्ति की व्यवस्था।

बोर्ड ने आश्वस्त किया है कि ये अधिकांश सुविधाएं पहले से ही सीबीएसई के संबद्धता नियमों का हिस्सा हैं। इसके अतिरिक्त, ओएएसआईएस आईडी वाले शिक्षकों को पहले से लॉग इन करके इस नई प्रणाली से परिचित होने का अवसर दिया जाएगा।

प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता की व्यवस्था

इस बदलाव को सफल बनाने के लिए सीबीएसई ने एक व्यापक योजना तैयार की है। बोर्ड द्वारा कई ड्राई रन (परीक्षण) आयोजित किए जाएंगे ताकि सिस्टम की कार्यक्षमता की जांच की जा सके। शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम, निर्देशात्मक वीडियो और तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए एक कॉल सेंटर भी स्थापित किया जाएगा। इन प्रयासों से यह उम्मीद की जा रही है कि 2026 में शुरू होने वाला यह डिजिटल मूल्यांकन सिस्टम बिना किसी बड़ी बाधा के लागू हो सकेगा और शिक्षा जगत में एक नए युग की शुरुआत करेगा।