सीबीएसई पोर्टल की खामियों की जांच में जुटे आईआईटी मद्रास और कानपुर के विशेषज्ञ
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के पोर्टल पर हाल ही में सामने आई तकनीकी गड़बड़ियों की गहन जांच शुरू हो गई है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास और आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञों की एक संयुक्त टीम इस मामले की पड़ताल कर रही है। यह कदम उन हजारों छात्रों और अभिभावकों की शिकायतों के बाद उठाया गया है, जिन्होंने पोर्टल पर भुगतान विफल होने, सर्वर क्रैश होने और उत्तर पुस्तिकाओं के अपलोड में त्रुटियों की सूचना दी थी।
आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामाकोटि ने पुष्टि की है कि चार सदस्यीय जांच दल ने सोमवार शाम से अपना काम शुरू कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच का मुख्य उद्देश्य समस्या की जड़ तक पहुंचना है, चाहे वह तकनीकी खामी हो, सिस्टम डिजाइन में कोई दोष हो या फिर कोई बाहरी साइबर हमला। टीम हर संभावित पहलू की बारीकी से जांच करेगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
पोर्टल स्थिर, लेकिन जांच जारी
कामाकोटि ने बताया कि पिछले 72 घंटों से सीबीएसई का पोर्टल पूरी तरह से स्थिर और सामान्य रूप से काम कर रहा है। यह राहत की बात है, क्योंकि इससे पहले लगातार दो दिनों तक छात्रों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ा था। यह जांच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के निर्देश पर शुरू की गई है, जिन्होंने सीबीएसई की पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए दोनों संस्थानों से तकनीकी सहायता मांगी थी।
निदेशक ने सीबीएसई द्वारा शुरू की गई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएमएस) प्रणाली की सराहना की। उनके अनुसार, यह प्रणाली मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने का एक सराहनीय प्रयास है। इसके जरिए छात्र अपनी जांची हुई उत्तर पुस्तिकाओं को डिजिटल रूप में देख सकते हैं और यह समझ सकते हैं कि उन्हें किस प्रश्न में कितने अंक मिले हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस प्रणाली में भुगतान गेटवे से जुड़ी कुछ तकनीकी बाधाएं सामने आई हैं, जिनकी अब विस्तार से जांच की जा रही है।
विस्तृत तकनीकी परीक्षण और टीम की संरचना
जांच टीम अब पूरे सिस्टम का गहन तकनीकी परीक्षण करेगी। विशेष रूप से, यह देखा जाएगा कि फीस भुगतान के दौरान सीबीएसई पोर्टल और बैंकिंग भुगतान प्रणाली के बीच तालमेल में कहां दिक्कत आई। टीम में आईआईटी मद्रास के दो प्रमुख विशेषज्ञ शामिल हैं:
- एक विशेषज्ञ जिनके पास बड़े पैमाने पर सॉफ्टवेयर संचालन और प्रबंधन का व्यापक अनुभव है।
- दूसरे विशेषज्ञ डेटा एनालिटिक्स और सिस्टम डिजाइन के क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता रखते हैं।
इसके अलावा, आईआईटी कानपुर के दो वरिष्ठ संकाय सदस्य भी इस जांच दल का हिस्सा हैं। यह बहु-विषयक टीम सुनिश्चित करेगी कि समस्या के हर तकनीकी पहलू की गहराई से जांच की जाए।
धुंधली उत्तर पुस्तिकाओं की शिकायतों पर भी होगी जांच
कई छात्रों ने यह भी शिकायत की है कि उनकी उत्तर पुस्तिकाएं पोर्टल पर धुंधली या अस्पष्ट दिखाई दे रही हैं। कामाकोटि ने बताया कि जांच टीम अभी तक इस स्तर की जांच तक नहीं पहुंची है, लेकिन स्कैनिंग और डिजिटल अपलोडिंग की पूरी प्रक्रिया की भी समीक्षा की जाएगी। उन्होंने संभावना जताई कि भौतिक उत्तर पुस्तिकाओं को डिजिटल रूप में बदलने की प्रक्रिया के शुरुआती चरणों में मानवीय त्रुटि की गुंजाइश हो सकती है, जिससे ऐसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
उन्होंने ओएमएस प्रणाली के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह छात्रों और अभिभावकों को मूल्यांकन प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझने का अवसर प्रदान करती है। यह शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने यह भी माना कि एक साथ लाखों छात्रों के पोर्टल पर आने से सर्वर पर अत्यधिक दबाव बना, जिससे बैंडविड्थ और सिस्टम की क्षमता प्रभावित हुई होगी।
नीट यूजी परीक्षा के संबंध में स्पष्टीकरण
नीट यूजी परीक्षा को कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) मोड में आयोजित करने की संभावनाओं पर कामाकोटि ने स्पष्ट किया कि सीबीएसई पोर्टल की समस्या और सीबीटी परीक्षा प्रणाली दोनों अलग-अलग मुद्दे हैं। उन्होंने बताया कि जेईई मेन, जेईई एडवांस्ड और गेट जैसी बड़ी परीक्षाएं पिछले कई वर्षों से सफलतापूर्वक सीबीटी मोड में आयोजित की जा रही हैं।
हालांकि, उन्होंने नीट यूजी के लिए सीबीटी मोड अपनाने की चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला। उनके अनुसार, नीट यूजी में लगभग 24 लाख छात्र शामिल होते हैं, जिनकी एक साथ परीक्षा आयोजित करना एक बड़ी चुनौती है। इसके लिए परीक्षा को कई सत्रों में विभाजित करना होगा और बाद में परिणामों को सामान्यीकृत (नॉर्मलाइज़) करना पड़ेगा, जो अपने आप में एक जटिल प्रक्रिया है।