सीबीएसई ने 12वीं की डिजिटल जांच प्रक्रिया पर दी विस्तृत जानकारी, छात्रों के 27 सवालों के जवाब

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा 2026 के मूल्यांकन में लागू ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर उठ रही शंकाओं का समाधान किया है। हाल के दिनों में कई छात्रों और अभिभावकों ने अपेक्षा से कम अंक मिलने और मूल्यांकन में संभावित त्रुटियों को लेकर चिंता जताई थी। इसके जवाब में बोर्ड ने आधिकारिक बयान और नोटिस जारी कर पूरी प्रक्रिया को स्पष्ट किया है। बोर्ड ने बताया कि डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया को पारंपरिक पद्धति के अनुरूप ही विकसित किया गया था, जिसमें स्कैनिंग, गुणवत्ता जांच, शिक्षक प्रशिक्षण और अंकन प्रणाली शामिल है। इसके साथ ही, बोर्ड ने छात्रों के मन में उठ रहे 27 प्रमुख सवालों के जवाब भी दिए हैं।

OSM प्रणाली की अवधारणा और विकास

सीबीएसई ने ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) की योजना सबसे पहले वर्ष 2014 में बनाई थी। उस समय आवश्यक तकनीकी संसाधन उपलब्ध न होने के कारण इसे लागू नहीं किया जा सका। बाद में जब तकनीक विकसित हुई और अन्य शैक्षिक बोर्डों में इसका सफल उपयोग देखने को मिला, तब वर्ष 2025-26 के सत्र से इसे लागू करने की मंजूरी दी गई।

OSM क्या है और पारंपरिक मूल्यांकन से अंतर

OSM एक डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली है, जिसमें छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके शिक्षकों के लिए कंप्यूटर स्क्रीन पर उपलब्ध कराया जाता है। बोर्ड के अनुसार, मूल्यांकन प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं हुआ है, केवल कॉपी जांचने का माध्यम बदला है। पहले शिक्षक कागज पर हाथ से अंक देते थे, अब वही प्रक्रिया डिजिटल स्क्रीन पर पूरी की जाती है। सिस्टम को मार्किंग स्कीम से इस प्रकार जोड़ा गया है कि जैसे ही शिक्षक किसी प्रश्न के अंक दर्ज करते हैं, सिस्टम स्वचालित रूप से उन्हें जोड़ देता है, जिससे जोड़ने में होने वाली मानवीय त्रुटियां समाप्त हो जाती हैं।

प्रशिक्षण और ड्राई रन प्रक्रिया

बोर्ड ने OSM प्रणाली को लागू करने से पहले पांच स्कूलों में शिक्षकों के साथ इसका परीक्षण किया। शिक्षकों को पहले प्रशिक्षित किया गया और फिर उनके सुझावों के आधार पर सिस्टम में आवश्यक सुधार किए गए। सुझावों के अनुसार, सिस्टम में ‘सेव’ विकल्प जोड़ा गया, अंक हटाने की प्रक्रिया को सरल बनाया गया और विभिन्न स्तरों के परीक्षकों के लिए रंग कोड की सुविधा शामिल की गई। शिक्षकों को वेबिनार, ऑनलाइन प्रशिक्षण, मॉक मूल्यांकन, वीडियो ट्यूटोरियल और विस्तृत दिशा-निर्देशों के माध्यम से प्रशिक्षित किया गया। इसके अलावा, बोर्ड ने एक अलग अभ्यास पोर्टल भी उपलब्ध कराया, जहां शिक्षक अपनी सुविधा अनुसार सिस्टम पर अभ्यास कर सकते थे।

उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग और गुणवत्ता जांच

उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग क्षेत्रीय कार्यालयों में विशेष ‘लैंप स्कैनर’ की सहायता से की गई। इस तकनीक से कॉपियों को बिना कोई नुकसान पहुंचाए स्कैन किया गया। स्कैनिंग के दौरान कॉपियों की बाइंडिंग नहीं काटी गई और न ही उन्हें फाड़ा गया। गुणवत्ता जांच तीन स्तरों पर सुनिश्चित की गई: पहली जांच स्कैनिंग के समय, दूसरी क्वालिटी कंट्रोल टीम द्वारा, और तीसरी मूल्यांकन करने वाले शिक्षक द्वारा। यदि कोई स्कैन धुंधला या अस्पष्ट पाया जाता था, तो शिक्षक उसे अस्वीकार कर सकते थे। ऐसी कॉपियों को दोबारा स्कैन किया जाता था और गुणवत्ता जांच के बाद पुनः मूल्यांकन के लिए भेजा जाता था।

OSM प्रणाली की पूरी कार्यप्रणाली

परीक्षा केंद्रों से उत्तर पुस्तिकाएं क्षेत्रीय कार्यालयों में भेजी जाती हैं, जहां उन्हें स्कैन कर पोर्टल पर अपलोड किया जाता है। इसके बाद शिक्षक अपने लॉगिन आईडी से पोर्टल पर जाकर डिजिटल कॉपियों की जांच करते हैं। यह प्रणाली फिलहाल केवल कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा के लिए लागू की गई है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि कंप्यूटर उत्तरों की जांच नहीं कर रहे हैं, बल्कि अनुभवी शिक्षक ही मूल्यांकन कर रहे हैं। कंप्यूटर केवल एक डिजिटल माध्यम के रूप में कार्य कर रहा है।

OSM प्रणाली के प्रमुख लाभ

इस प्रणाली से अंकों के जोड़ में त्रुटि की संभावना कम हो जाती है, मूल्यांकन प्रक्रिया तेज होती है, पारदर्शिता बढ़ती है और यह पर्यावरण के लिए भी बेहतर मानी जाती है। सिस्टम स्वचालित रूप से अंक जोड़ता है और किसी प्रश्न को बिना जांचे छोड़ने जैसी गलतियों को रोकता है। मार्किंग स्कीम और मूल्यांकन के मानक पारंपरिक प्रणाली के समान ही रहते हैं, केवल कॉपी जांचने का तरीका डिजिटल हुआ है, जिससे मूल्यांकन अधिक सख्त नहीं हो जाता।

स्कूलों और प्रधानाचार्यों की तैयारी

बोर्ड ने स्कूलों को कंप्यूटर लैब, इंटरनेट कनेक्टिविटी और बिजली बैकअप की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। साथ ही बड़े स्तर पर लाइव वेबकास्ट का आयोजन किया गया। प्रधानाचार्यों के लिए एक विशेष डैशबोर्ड बनाया गया था, जिससे वे यह देख सकें कि उनके स्कूल के किन शिक्षकों ने प्रशिक्षण और मॉक मूल्यांकन पूरा कर लिया है। तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए क्षेत्रीय कार्यालयों और मुख्यालय में विशेष कॉल सेंटर और सहायता टीम तैनात की गई थी।

धुंधली छवियों और शिकायतों का समाधान

धुंधली छवियों को लेकर छात्रों के आरोपों पर बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि स्कैनिंग की गुणवत्ता की जांच कई स्तरों पर की गई थी और शिक्षकों को खराब स्कैन को अस्वीकार करने का अधिकार दिया गया था। इसलिए ऐसी शिकायतों की संभावना बहुत कम थी। बोर्ड ने मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सटीक और तेज बनाने तथा मानवीय गलतियों को कम करने के उद्देश्य से यह प्रणाली शुरू की है।

OSM से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न

  • स्कैनिंग के दौरान कॉपियों की सुरक्षा: स्कैनिंग बिना कॉपियों की बाइंडिंग काटे या नुकसान पहुंचाए की गई।
  • गुणवत्ता जांच का उद्देश्य: यह सुनिश्चित करना कि स्कैन साफ, पूर्ण और बारकोड से सही ढंग से जुड़े हुए हों।
  • शिक्षक द्वारा कॉपी रिजेक्ट करने की प्रक्रिया: खराब स्कैन वाली कॉपियों को दोबारा स्कैन कर गुणवत्ता जांच के बाद पुनः मूल्यांकन के लिए भेजा जाता था।
  • OSM प्रणाली का दायरा: यह प्रणाली फिलहाल केवल कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा में लागू की गई है।
  • मूल्यांकन की कठोरता: मार्किंग स्कीम और मूल्यांकन मानक पारंपरिक प्रणाली के समान ही हैं, इसलिए मूल्यांकन अधिक सख्त नहीं होता।

बोर्ड ने अपने विस्तृत स्पष्टीकरण के माध्यम से यह सुनिश्चित किया है कि OSM प्रणाली पूरी तरह से पारदर्शी और त्रुटिरहित है, तथा छात्रों के हितों का पूरा ध्यान रखा गया है।