सीबीएसई का स्पष्टीकरण: प्रश्नपत्रों पर क्यूआर कोड का असली मकसद क्या है?

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी कर परीक्षा पत्रों पर मौजूद क्यूआर कोड को लेकर सभी भ्रांतियों को दूर किया है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि ये क्यूआर कोड किसी भी प्रकार के वेब लिंक नहीं हैं, बल्कि सिर्फ आंतरिक सुरक्षा और निगरानी के लिए उपयोग किए जाते हैं। सोशल मीडिया पर इन कोडों को लेकर जो अफवाहें फैलाई जा रही हैं, उन्हें बोर्ड ने पूरी तरह से गलत और भ्रामक बताया है।

क्यूआर कोड का वास्तविक उद्देश्य

बोर्ड के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज के अनुसार, प्रश्नपत्रों पर छपे क्यूआर कोड सीधे किसी इंटरनेट पेज से नहीं जुड़े होते। इन कोडों का मुख्य काम प्रश्नपत्र की प्रमाणिकता की जांच करना और परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखना है। जब इन्हें स्कैन किया जाता है, तो कोई वेबसाइट नहीं खुलती, बल्कि इनमें संग्रहीत टेक्स्ट ही दिखाई देता है। यह टेक्स्ट बोर्ड के आंतरिक सिस्टम का हिस्सा है और इसका उपयोग केवल ट्रैकिंग और सुरक्षा उद्देश्यों के लिए किया जाता है।

गूगल सर्च से क्यों दिखते हैं अलग परिणाम?

परीक्षा नियंत्रक ने यह भी समझाया कि अगर कोई छात्र या अभिभावक क्यूआर कोड से प्राप्त टेक्स्ट को गूगल पर सर्च करता है, तो सर्च इंजन के एल्गोरिदम के आधार पर कई अलग-अलग परिणाम सामने आ सकते हैं। यह प्रक्रिया पूरी तरह से सामान्य है और इसका बोर्ड या परीक्षा से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सामान्य ब्राउज़र जैसे क्रोम में ऐसी स्थिति नहीं बनती, बल्कि यह केवल सर्च इंजन के काम करने के तरीके के कारण होता है।

अफवाहों पर बोर्ड की सफाई

सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि क्यूआर कोड से जुड़े जो भी असंबंधित सर्च परिणाम सामने आ रहे हैं, वे पूरी तरह से एल्गोरिदम आधारित हैं। बोर्ड ने आरोप लगाया है कि कुछ लोग जानबूझकर इन परिणामों को गलत तरीके से पेश कर भ्रामक जानकारी फैला रहे हैं। बोर्ड के अनुसार, क्यूआर कोड को किसी विशेष व्यक्ति या सामग्री से जोड़ना तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक है।

परीक्षाओं के दौरान सामने आए मामले

हाल ही में आयोजित कक्षा 12 की इतिहास परीक्षा के दौरान छात्रों ने बताया कि क्यूआर कोड स्कैन करने पर एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर से जुड़े सर्च परिणाम दिखाई दिए। इसी तरह, गणित परीक्षा में क्यूआर कोड स्कैन करने पर एक प्रैंक से जुड़ा कंटेंट सामने आया, जिसमें एक लोकप्रिय गाने का वीडियो दिखाया गया।

बोर्ड ने इन घटनाओं को लेकर कहा कि ये सभी सर्च इंजन के एल्गोरिदम के कारण हुए हैं और इनका परीक्षा प्रक्रिया से कोई लेना-देना नहीं है। सीबीएसई ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे ऐसी भ्रामक जानकारियों पर ध्यान न दें और केवल बोर्ड द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।