सीबीएसई की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली: छात्रों और अभिभावकों के सवाल, बोर्ड का जवाब

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने इस वर्ष कक्षा 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए पूरी तरह से डिजिटल प्रणाली लागू की है। इस नई व्यवस्था में परीक्षक कंप्यूटर स्क्रीन पर स्कैन की गई कॉपियों की जांच कर रहे हैं। हालांकि, परिणाम घोषित होने के बाद से सोशल मीडिया पर छात्रों और अभिभावकों की ओर से इस प्रणाली को लेकर कड़ी नाराजगी और सवाल उठाए जा रहे हैं। आइए समझते हैं कि आखिर यह विवाद क्यों है और सीबीएसई का इस पर क्या कहना है।

क्या है ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली?

सीबीएसई द्वारा शुरू की गई ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली के तहत छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं को पहले स्कैन किया जाता है। इसके बाद ये स्कैन की गई कॉपियां मूल्यांकनकर्ताओं के कंप्यूटर पर उपलब्ध कराई जाती हैं, जहां वे डिजिटल रूप से उत्तरों की जांच करते हैं। बोर्ड के अनुसार, इस प्रणाली का उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और एकरूपता लाना है। परीक्षकों को चरण-दर-चरण अंक देने के निर्देश दिए जाते हैं, ताकि हर उत्तर का निष्पक्ष मूल्यांकन सुनिश्चित हो सके।

क्यों उठ रहा है विवाद?

सीबीएसई 12वीं के परिणाम जारी होने के बाद से सोशल मीडिया पर कई तरह की शिकायतें सामने आ रही हैं। खासकर भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और गणित जैसे विषयों में छात्रों को अपेक्षा से कम अंक मिलने की बात कही जा रही है। कई छात्रों का दावा है कि उन्हें इन विषयों में उम्मीद से 10 से 20 प्रतिशत तक कम अंक प्राप्त हुए हैं।

कुछ मामलों में जेईई मेन परीक्षा में सफलता प्राप्त करने वाले छात्रों के भी बोर्ड परीक्षा में कम अंक आने या फेल होने की खबरें हैं, जिसने मूल्यांकन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

छात्रों और अभिभावकों द्वारा उठाए जा रहे मुख्य मुद्दे इस प्रकार हैं:

  • स्कैनिंग में त्रुटि का संदेह: कई छात्रों को शक है कि स्कैनिंग प्रक्रिया के दौरान उनकी उत्तर पुस्तिकाओं के कुछ पेज या उत्तर गायब हो गए होंगे, जिससे उनके अंक प्रभावित हुए हैं।
  • तकनीकी खामियों की आशंका: डिजिटल जांच में तकनीकी गड़बड़ियों की संभावना को लेकर भी चिंता व्यक्त की जा रही है, जिससे मूल्यांकन सही ढंग से नहीं हो पाया।
  • पारदर्शिता का अभाव: अभिभावकों और छात्रों को यह समझ में नहीं आ रहा है कि मूल्यांकन प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है और उनके अंक कैसे निर्धारित किए गए।
  • स्कैन कॉपियों के लिए शुल्क: सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि अगर सीबीएसई को अपनी प्रणाली पर पूरा भरोसा है, तो वह छात्रों को उनकी स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं मुफ्त में क्यों उपलब्ध नहीं कराता। फिलहाल इन कॉपियों को देखने के लिए लगभग 700 रुपये का शुल्क लिया जा रहा है, जिसे मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए अनुचित बताया जा रहा है।

सीबीएसई का स्पष्टीकरण

बढ़ते विवाद और छात्रों की चिंताओं को देखते हुए सीबीएसई ने 15 मई को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक नोटिस जारी किया। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली पूरी तरह से निष्पक्ष, पारदर्शी और समान मूल्यांकन सुनिश्चित करने वाली है। सीबीएसई ने यह भी कहा कि यदि कोई छात्र अपने परिणाम से संतुष्ट नहीं है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर सकता है।

पास प्रतिशत में गिरावट

इस वर्ष सीबीएसई 12वीं परीक्षा का कुल उत्तीर्ण प्रतिशत 85.2 प्रतिशत रहा है, जो पिछले वर्ष के 88.39 प्रतिशत से लगभग 3.19 प्रतिशत कम है। इस गिरावट को भी कुछ लोग नई मूल्यांकन प्रणाली से जोड़कर देख रहे हैं, हालांकि बोर्ड ने ऐसा कोई संकेत नहीं दिया है।

शिक्षकों का समर्थन

दूसरी ओर, देशभर के कई शिक्षकों ने इस डिजिटल प्रणाली का स्वागत किया है। उनका मानना है कि ओएसएम प्रणाली ने मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक आधुनिक और प्रभावी बनाया है। शिक्षकों के अनुसार, इससे उत्तर पुस्तिकाओं की जांच और अंक अपलोड करने में होने वाली त्रुटियों में काफी कमी आई है।

शिक्षकों का यह भी कहना है कि डिजिटल मूल्यांकन ने प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और जवाबदेह बना दिया है। प्रारंभिक प्रशिक्षण के बाद यह प्रणाली उनके लिए उपयोगकर्ता-अनुकूल साबित हुई है। साथ ही, इस पेपरलेस व्यवस्था को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया जा रहा है। शिक्षकों को उम्मीद है कि इससे छात्रों और अभिभावकों का परिणामों पर विश्वास और मजबूत होगा।