कार का AC कितने टन का होता है? जानिए आपकी गाड़ी का कूलिंग सिस्टम कैसे करता है काम
कार चलाना तो हम सभी जानते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि आपकी गाड़ी का एयर कंडीशनर (AC) कितने टन का होता है? घर के लिए AC खरीदते समय हम कमरे के आकार के अनुसार 1 टन, 1.5 टन या 2 टन का चुनाव करते हैं। वहीं, कार कंपनियां अपने ब्रोशर में इंजन की पावर तो बताती हैं, लेकिन AC की क्षमता के बारे में अक्सर कोई जानकारी नहीं देतीं। आइए, इस रहस्य को समझते हैं और जानते हैं कि आपकी गाड़ी को ठंडा रखने वाला यह सिस्टम कितना शक्तिशाली होता है।
क्या कार के AC को टन में मापा जाता है?
घरों और दफ्तरों में लगे एयर कंडीशनर की क्षमता को टन में मापा जाता है, लेकिन कारों के मामले में यह थोड़ा अलग है। ऑटोमोबाइल उद्योग में AC की क्षमता को सीधे टन के बजाय BTU (ब्रिटिश थर्मल यूनिट) या किलोवॉट में व्यक्त किया जाता है। आसान भाषा में समझें तो 1 टन लगभग 12,000 BTU के बराबर होता है।
अधिकतर छोटी हैचबैक और सेडान कारों में लगा AC करीब 1 से 1.5 टन के घरेलू AC जितनी कूलिंग प्रदान करता है। वहीं, बड़ी SUV और लग्जरी गाड़ियों में यह क्षमता 2 टन या उससे भी अधिक हो सकती है। यह क्षमता सीधे तौर पर गाड़ी के केबिन के आकार और उसमें बैठने वाले लोगों की संख्या पर निर्भर करती है।
कार के सेगमेंट के अनुसार AC की क्षमता
अलग-अलग प्रकार की कारों में उनके केबिन साइज के हिसाब से अलग-अलग क्षमता के AC लगाए जाते हैं:
- छोटी हैचबैक और सेडान: ऑल्टो, स्विफ्ट, i20 या डिजायर जैसी कारों में आमतौर पर 1 से 1.2 टन (लगभग 10,000 से 14,000 BTU/घंटा) क्षमता का AC होता है। इनमें डैशबोर्ड के पास एक ही कूलिंग सिस्टम काम करता है।
- कॉम्पैक्ट SUV: नेक्सॉन, क्रेटा, ब्रेजा जैसी गाड़ियों का केबिन चौड़ा और ऊंचा होता है। इसलिए इनमें 1.2 से 1.4 टन (लगभग 14,000 से 17,000 BTU/घंटा) क्षमता वाले AC का इस्तेमाल किया जाता है।
- बड़ी SUV और लग्जरी कारें: फॉर्च्यूनर, इनोवा, सफारी जैसी 7-सीटर गाड़ियों में पीछे की सीटों के लिए अलग वेंट और डुअल कूलिंग सिस्टम होते हैं। इनमें 1.5 से लेकर 2 टन (लगभग 18,000 से 24,000+ BTU/घंटा) तक का हैवी-ड्यूटी AC लगा होता है।
कार का AC घर के AC से कैसे अलग है?
घर का AC एक स्थिर कमरे को लगातार ठंडा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जबकि कार का AC चलते वाहन में काम करता है। कार को धूप में खड़ी होने, ट्रैफिक में रुकने या हाईवे पर तेज गति से दौड़ने जैसी विभिन्न परिस्थितियों में भी प्रभावी ढंग से ठंडा रखना पड़ता है।
कार के AC सिस्टम में मुख्य रूप से कंप्रेसर, कंडेंसर, इवैपोरेटर और रेफ्रिजरेंट गैस का इस्तेमाल होता है। यह पूरा सिस्टम इंजन की शक्ति से संचालित होता है। इसीलिए जब AC चालू होता है, तो कार के माइलेज पर थोड़ा असर पड़ता है। यह एक ऐसी चुनौती है जिसका सामना घरेलू AC को नहीं करना पड़ता।
इलेक्ट्रिक कारों में AC का काम करने का तरीका
इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) में AC सीधे बैटरी पावर से चलता है। इसका मतलब है कि AC का अधिक उपयोग गाड़ी की ड्राइविंग रेंज को कम कर सकता है। इस समस्या को हल करने के लिए कई इलेक्ट्रिक कार निर्माता अब अधिक कुशल हीट पंप सिस्टम का उपयोग कर रहे हैं। यह तकनीक कम बिजली की खपत में बेहतर कूलिंग और हीटिंग प्रदान करती है, जिससे बैटरी की रेंज पर न्यूनतम प्रभाव पड़ता है।