बजट स्मार्टफोन पर महंगाई का सबसे ज्यादा असर, जानिए कीमतें क्यों बढ़ रही हैं
अगर आप इन दिनों एक नया स्मार्टफोन खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो कीमतों में हुई तेज बढ़ोतरी ने आपका बजट बिगाड़ दिया होगा। हैरानी की बात यह है कि अब सिर्फ नए लॉन्च हुए मॉडल ही नहीं, बल्कि बाजार में पहले से उपलब्ध पुराने फोन भी महंगे होते जा रहे हैं। आइए समझते हैं कि आखिर स्मार्टफोन की कीमतों में यह आग क्यों लगी हुई है।
पुराने मॉडल भी हो रहे महंगे
स्मार्टफोन बाजार में इन दिनों एक नया चलन देखने को मिल रहा है। पहले जहां लॉन्चिंग के बाद फोन की कीमतें धीरे-धीरे कम होती थीं, वहीं अब इसका उल्टा हो रहा है। कई बड़ी कंपनियों ने अपने डिवाइस लॉन्च करने के कुछ ही महीनों बाद उनकी कीमतें बढ़ा दी हैं। उदाहरण के लिए, OnePlus 15R को दिसंबर 2025 में 47,999 रुपये में लॉन्च किया गया था, लेकिन अब यह 50,499 रुपये में बिक रहा है। इसी तरह, OnePlus Pad Go 2 की कीमत 26,999 रुपये से बढ़कर 27,999 रुपये हो गई है।
Samsung ने भी अपने कई मॉडलों के दाम बढ़ाए हैं। Galaxy M36 5G, जो 17,499 रुपये में आया था, अब 20,999 रुपये का हो गया है। इसके अलावा Galaxy M06, Galaxy F06 और Galaxy M17 5G जैसे फोन भी महंगे हो चुके हैं। Vivo के V70 की कीमत 45,999 रुपये से बढ़कर 49,999 रुपये हो गई है, जबकि Vivo V70 Elite अब 55,999 रुपये में मिल रहा है। Nothing के Nothing Phone 3a Lite की कीमत भी लॉन्च के बाद बढ़ाई जा चुकी है।
नए फोन भी पहले से महंगे आ रहे
पुराने मॉडलों के अलावा, नए लॉन्च होने वाले स्मार्टफोन भी पिछली पीढ़ी के मुकाबले काफी ज्यादा कीमत पर आ रहे हैं। उदाहरण के लिए, Samsung के Galaxy A56 की शुरुआती कीमत 41,999 रुपये थी, जबकि इसके नए वर्जन Galaxy A57 की कीमत 56,999 रुपये से शुरू हो रही है। इसी तरह Galaxy A36 और A37 के बीच भी कीमतों में बड़ा अंतर देखा गया है।
हालांकि, इन बढ़ी हुई कीमतों के बावजूद हार्डवेयर में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। ज्यादातर अपग्रेड केवल चिपसेट और एआई फीचर्स तक ही सीमित हैं। वहीं, Apple ने iPhone 17e को 64,900 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया है, जो iPhone 16e से थोड़ा सस्ता है, लेकिन पुराने मॉडल में कम स्टोरेज का विकल्प भी मौजूद था।
मेमोरी पार्ट्स की बढ़ती कीमतें हैं मुख्य वजह
स्मार्टफोन की कीमतों में लगातार हो रही इस बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा कारण मेमोरी पार्ट्स का महंगा होना है। फोन में इस्तेमाल होने वाले DRAM और NAND जैसे कंपोनेंट्स की कीमतों में भारी उछाल आया है। मार्केट रिसर्च फर्म काउंटरपॉइंट के अनुसार, बाजार में इस समय ग्राहकों की खरीदारी की क्षमता पर काफी दबाव है। मेमोरी की बढ़ती महंगाई और मुद्रा के दबाव के कारण कंपनियों को अपने प्रमुख मॉडलों की कीमतें बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
स्मार्टफोन की औसत कीमतों में 1,500 रुपये से अधिक की बढ़ोतरी हुई है, और इसका सबसे बुरा असर 15,000 रुपये से कम वाले बजट सेगमेंट पर पड़ा है। इस महंगाई का सीधा असर बाजार के प्रदर्शन पर भी दिख रहा है। काउंटरपॉइंट के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 की पहली तिमाही में भारत में स्मार्टफोन शिपमेंट में सालाना आधार पर 3 प्रतिशत की गिरावट आई है, जो पिछले छह सालों की सबसे कमजोर तिमाही रही है।
एआई के कारण बढ़ी मेमोरी की मांग
मेमोरी की कीमत बढ़ने का एक बड़ा कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) है। अब मेमोरी बनाने वाली कंपनियां हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं, जिसका इस्तेमाल AI इंफ्रास्ट्रक्चर में होता है और इससे ज्यादा मुनाफा मिलता है। इस वजह से स्मार्टफोन में इस्तेमाल होने वाली सामान्य मेमोरी की सप्लाई कम हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह संकट 2027 तक जारी रह सकता है।
दुनिया के कुल DRAM बाजार के 90 प्रतिशत हिस्से पर सैमसंग, एसके हाइनिक्स और माइक्रोन का कब्जा है और ये कंपनियां इतनी जल्दी अपना उत्पादन नहीं बढ़ा पा रही हैं। नई फैक्ट्रियां बन रही हैं, लेकिन उनका सही आउटपुट 2027 के बाद ही मिलेगा। नतीजतन, 2026 की शुरुआत में मेमोरी की कीमतों में तिमाही आधार पर लगभग 90 प्रतिशत का उछाल आया है। आज एक बजट फोन की कुल लागत में 20 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ मेमोरी का है, जो 2026 के मध्य तक बढ़कर 40 प्रतिशत तक जा सकता है।
सिर्फ फोन ही नहीं, अन्य गैजेट्स पर भी असर
सप्लाई की इस भारी कमी का असर सिर्फ स्मार्टफोन तक ही सीमित नहीं है। Apple ने अपने कुछ Mac कंप्यूटरों के हाई-मेमोरी वाले विकल्पों को अपनी वेबसाइट से हटा दिया है या उन्हें अनुपलब्ध कर दिया है। इससे साफ पता चलता है कि पार्ट्स की कमी के चलते कंपनियां अब कम मेमोरी वाले वेरिएंट को प्राथमिकता दे रही हैं। इसके अलावा, सोनी ने भी अपने कुछ मेमोरी कार्ड लाइनअप के ऑर्डर लेने बंद कर दिए हैं और बयान दिया है कि आने वाले समय में डिमांड के हिसाब से सप्लाई पूरी होने की कोई उम्मीद नहीं है।